पटाखों के उपयोग के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी
ग्वालियर / जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी दिशा – निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि दीपावली पर्व पर रात्रि 08:00 से रात्रि 10:00 बजे तक ग्रीन पटाखों का उपयोग किया जा सकता है ग्रीन पटाखों के अंतर्गत फुलझडी ,अनार व मेरून चलाये जा सकेंगे जबकि लड़ी (जुडे हुए पटाखों) का निर्माण, उपयोग, विक्रय, वितरण प्रतिबंधित बताया गया है।
ये हैं विस्तृत दिशा-निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय एवं हरित अधिकरण के आदेशों के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया का पालन कर दीपावली पर्व पर पटाखों का निर्माण, विक्रय एवं उपयोग कराने के लिये कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक, आयुक्त नगर निगम, जिला पंचायत के सीईओ, जिले के सभी एसडीएम, जनपद पंचायतों के सीईओ, नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, स्थायी आतिशबाजी विक्रेता संघ, फुटकर विक्रेता संघ सहित सभी संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय एवं हरित अधिकरण के आदेशों का पालन कराने के आदेश दिए हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल, नर्सिंग होम्स, हेल्थ केयर सेंटर, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों इत्यादि से 100 मीटर की दूरी तक पटाखों का उपयोग प्रतिबंधित है।
ग्रीन पटाखों के संबंध में Petroleum & Explosive Safety Organisation (PESO) व National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) द्वारा स्वेच्छिक वर्गीकरण किया जाता है। जिसमें पटाखो के पैकिंग पर “लोगो” प्रिंट रहता है। साथ ही पंजीकृत निर्माताओं की सूची NEERI की वेबसाईट पर उपलब्ध है। इस “लोगो” को स्केन करने पर पटाखों के पंजीकृत निर्माताकर्ता का विवरण उपलब्ध हो जाता हैं। ग्रीन पटाखों के Petroleum & Explosive Safety Organisation (PESO) व National Environmental Engineering Research Insitiute (NEERI) के पोर्टल पर पंजीकृत निर्माताकर्ताओं की सूची उपलब्ध हैं।
ग्रीन पटाखों के अंतर्गत फुलझडी (Sparklers), अनार (Flowerpots) व मेरून (Maroons) आते हैं। पटाखों में बेरियम सॉल्ट इत्यादि विषैले रसायनों का उपयोग प्रतिबंधित हैं। लड़ी (जुडे हुए पटाखों) का निर्माण, उपयोग, विक्रय, वितरण एवं प्रस्फोटन भी प्रतिवधिंत हैं। पटाखों की तीव्रता प्रस्फोटन स्थल से 04. मीटर पर 125 डी.बी. (ए) से अधिक नही होना चाहिए। पटाखों की ऑनलाईन सेल (जैसे अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, इत्यादि से) प्रतिबधिंत हैं।
मानकों के अनुरूप निर्धारित ध्वनि स्तर के पटाखों का निर्माण एवं विक्रय की जांच के लिये नमूने एकत्रित कर इनका विश्लेषण PESO अथवा म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशालाओं में कराया जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय एवं मान्नीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण, सेंट्रल जोन, भोपाल के आदेशानुसार केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुल 14 दिन (दीपावली से 07 दिन पूर्व एवं दीपावली से 07 दिन पश्चात) परिवेशीय वायु मॉनिटरिंग नियमित पैरामीटर के साथ अन्य प्रदूषक जैसे एल्यूमिनियम, बेरियम, आयरन का विश्लेषण भी किया जाना है, इस बावत् मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सभी प्रयोगशालाओं को निर्देशित किया जा चुका हैं।
पटाखों के जलने के बाद बचे हुये कागज के टुकडे एवं अधजली बारूद के संपर्क आने से पशुओं एवं बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना रहती हैं। पटाखों के जलने के उपरांत उत्पन्न कचरें को ऐसे स्थनों पर न फेंका जायें, जहां पर प्राकृतिक जल स्त्रोत एवं पेय जल स्त्रोत प्रदूषित होने की संभावना हो। पटाखों के जलने के उपरांत बचे हुये कचरे को पृथक स्थान पर एकत्रित किया जाये। साथ ही नगर निगम के कर्मचारियों को सौंपा जाये। नगर निगम एवं नगर पालिका इस संग्रहित कचरें का पृथक से एकत्रीकरण कर उसका अपवहन सुनिश्चित करें।