मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कम्प्यूटर बाबा ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया है। बाबा ने सरकार पर संत समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि सरकार ने मेरी एक नहीं सुनी, सरकार धर्म के प्रति नहीं चलना चाहती है इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा लगा शिवराज धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का काम कुछ करना ही नहीं चाहते हैं। मैंने गायों की स्थिति और नर्मदा से हो रहा अवैध उत्खनन के बारे में चर्चा की थी। लेकिन मुझे कुछ भी करने के लिए इजाजत नहीं दी गई। मैं संतों के विचार सरकार के सामने नहीं रख सका और इस लिए मैं ऐसी सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहता। इस्तीफा देने से पहले बाबा ने सरकार से नर्मदा मंत्रालय बनाने की मांग भी की थी।
दरअसल, रविवार को सागर में जनसभा के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गौ मंत्रालय बनाने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि अब गायों के लिए बोर्ड नहीं सीधा मंत्रालय बनेगा। पूरे राज्य में जहां जमीन मिलेगी वहां गो अभ्यारण्य और गौशालाओं का जाल बिछाया जाएगा। वहीं, इस बात की अफवाह भी है कि कम्प्यूटर बाबा भाजपा द्वारा दिए गए राज्यमंत्री का दर्जा भी वापस कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने खुद अभी इस विषय पर कोई बयान जारी नहीं किया है। शिवराज के इस ऐलान के बाद प्रदेश में गौमाता को लेकर बयानबाजियां तेज हो गईं थी. कांग्रेस ने इस मामले पर सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया वहीं यह कयास भी लगाए गए कि सीएम शिवराज की यह घोषणा कांग्रेस की उस घोषणा का जवाब है, जिसमें कमलनाथ ने ऐलान किया था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर हर पंचायत में गोशाला बनायी जाएगी हालांकि राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कम्प्यूटर बाबा के इस बयान के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।