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जानिए पाकिस्तान से यारी, तुर्की को यूं पड़ी भारी

पाकिस्तान से हमदर्दी दिखाकर तुर्की अब बुरी तरह फंस चुका है. भारत ने एक बार फिर उसकी गद्दारी देख ली. अब तुर्की को उसकी औकात दिखाने की बारी है. इसकी कवायद शुरू हो चुकी है. भारत में एयरपोर्ट पर ग्राउंड ऑपरेशन का काम करने वाली तुर्की की कंपनी सेलेबी को इसका खामियाजा उठाना पड़ा है. भारत ने सेलेबी कंपनी का सिक्योरिटी लाइसेंस रद्द कर दिया है. तुर्की को पाकिस्तान से यारी भारी पड़ने लगी है. खुद नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने ऐलान किया कि भारत में एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करने वाली तुर्की की कंपनी सेलेबी एनएएस एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया लिमिटेड की सुरक्षा मंजूरी को रद्द कर दिया गया है. अब सवाल है कि आखिर कंपनी के कितने कर्मचारी भारत में हैं?तुर्की के जिस सेलेबी कंपनी के परमिट को रद्द किया गया है, उसका भारत से पूरी तरह बोरिया बिस्तर बंध चुका है. सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है. इतना ही नहीं, पहलगाम अटैक में तुर्की ने जिस तरह से पाकिस्तान का साथ दिया, ऐसे में देश में तुर्की के खिलाफ गुस्सा है. सरकार को देश भर से सेलेबी कंपनी को बैन करने की मांग हो रही थी. इन सबको देकते हुए ही मंत्रालय ने इस कंपनी की सुरक्षा मंजूरी को रद्द कर दिया है. सेलेबी के दुनियाभर में 16000 स्टाफ हैं. अब भारत की बात करें तो यहां उसके 10 हजार स्टाफ यानी कर्मचारी हैं.
पाकिस्तान से यारी, तुर्की को पड़ी भारी
    • भारत में तुर्की की कंपनी ‘सेलेबी’ का लाइसेंस रद्द: कंपनी का बोरिया बिस्तर बंधा
    • तुर्की, अजबैजान की फ्लाइट, होटल बुकिंग कैंसिल: बुकिंग में 60% की गिरावट, कैंसिलेशन में 250% इजाफा
    • हिमाचल समेत कई राज्यों में तुर्की के सेब का बहिष्कार: हर साल 821 करोड़ से ज्यादा का होता था आयात
    • उदयपुर में तुर्की से आने वाले मार्बल का भी बहिष्कार: भारत में तुर्की से आयात होता है करीब 70% मार्बल
    • JNU ने तुर्की की यूनिवर्सिटी से खत्म किया समझौता: जामिया, दिल्ली, कानपुर यूनिवर्सिटी ने भी लिया फैसला
सरकार ने क्या तर्क दिया?
सेलेबी पर एक्शन का यह आदेश बीसीएएस के संयुक्त निदेशक (ऑपरेशंस) सुनील यादव द्वारा जारी किया गया है. सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोपरि है, और इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए. इधर, देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए तुर्की के संस्थानों के साथ अपने शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को निलंबित कर दिया. सबसे ताजा कदम जामिया मिलिया इस्लामिया ने उठाया है, जिसने गुरुवार को एक बयान जारी कर तुर्की गणराज्य की सरकार से संबद्ध किसी भी संस्थान के साथ सभी समझौता ज्ञापनों को तत्काल निलंबित करने की घोषणा
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