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ट्रंप को बड़ा झटका अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ़ पॉलिसी को बताया गैर कानूनी

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन ग्लोबल टैरिफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है, जो पिछले साल लागू किए गए थे.कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के टैक्स लगाकर अपनी शक्तियों का उल्लंघन किया है

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल ही दूसरे देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैक्स लगाने का एलान किया था. उनका कहना था कि इससे अमेरिकी फ़ैक्ट्रियों को फ़ायदा होगा.

इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से मंज़ूरी नहीं ली थी, बल्कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था.

इस क़ानून के तहत इमरजेंसी घोषित करने से ट्रंप तुरंत आदेश जारी कर सकते थे और कांग्रेस को दरकिनार कर सकते थे. लिहाज़ा, ट्रंप ने इसका फ़ायदा उठाया.

अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने कहा कि ट्रंप के ज़्यादातर टैक्स ग़ैरक़ानूनी हैं, लेकिन उन्हें लागू रहने दिया गया.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री तब हुई, जब व्हाइट हाउस ने अपील कोर्ट के फ़ैसले को पलटने की मांग की.

अपने फ़ैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी सीमा से बाहर जाकर अधिकारों का इस्तेमाल किया और नेशनल इमरजेंसी के लिए बने क़ानून का सहारा लिया.

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़, इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को टैरिफ़ लगाने की इजाज़त नहीं देता. सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया.

डोनाल्ड ट्रंप महीनों से इस बात की चेतावनी दे रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का एक संभावित फैसला अमेरिका के लिए भयंकर परिणाम लेकर आएगा और उनके टैरिफ लगाने की क्षमता को सीमित करेगा.

लेकिन ऐसा लगा जैसे सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चिंताओं की ‘परवाह’ नहीं की और छह न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ फैसला सुनाया.

न्यायाधीशों ने कहा कि टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का काम नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की शक्ति है और जिस कानून का ट्रंप ने अपनी कानूनी रक्षा में हवाला दिया, यानी 1977 का इमरजेंसी इकॉनॉमिक पावर्स एक्ट, उसने ट्रंप को इतनी व्यापक शक्तियां नहीं दी थीं.

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकार के व्यापक इस्तेमाल पर रोक का प्रतीक है.

पिछले साल अधिकांश न्यायाधीश ट्रंप के एजेंडे के पक्ष में दिखाई दे रहे थे खासकर आप्रवासन और संघीय सरकार को पुनर्गठित करने के मामलों में, जबकि इससे संबंधित कई अपीलों पर कोर्ट में सुनवाई जारी थी.

इसके अलावा जन्म अधिकार नागरिकता को समाप्त करने की ट्रंप की कोशिश और कथित अनियमितताओं के आधार पर फेडरल रिजर्व गवर्नर को हटाने की कोशिश पर भी विवाद जारी था.

हो सकता है इन मोर्चों पर भी आने वाले महीनों में ट्रंप को कोर्ट से झटका लगे.

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