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देशभर में आरएसएस के शताब्दी वर्ष शुभारंभ की धूम जगह जगह निकले पथसंचलन संघ प्रमुख ने नागपुर में किया शस्त्र पूजन

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी शताब्दी वर्ष पर बस्ती-बस्ती में स्वयंसेवकों ने निकाले पथ संचलन

प्रान्त प्रचारक विमल  गुप्ता ने किया सम्बोधित कहा संघ की कार्यप्रणाली और सेवा कार्यों ने पिछले सौ वर्षों में समाज को दी नई दिशा

नागपुर /भोपाल /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का शताब्दी समारोह और विजयादशमी उत्सव पूरे देश में बड़े धूमधाम के साथ  मनाया जा रहा है एक तरफ संघ मुख्यालय नागपुर में संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ शस्त्र पूजन कर मार्गदर्शन किया वहीं पूरे देश में संघ ने बस्ती और मंडल स्तर पर पथ संचलन निकाले प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक देशभर में लाखों की संख्या में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवक सड़कों पर अनुशासित ढंग से संचलन करते दिखाई दिए। यह क्रम 12अक्टूबर तक जारी रहेगा।

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इस मौके पर दलाई लामा द्वारा भेजा गया संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने संघ को शुभकामनाएं दीं.  कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपने विचार व्यक्त किए और देश के प्रति सामाजिक जिम्मेदारियों और सेवा भाव पर जोर दिया. आरएसएस का यह शताब्दी समारोह और विजयादशमी उत्सव संघ की सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक योगदान को समर्पित है.

रामनाथ कोविंद ने कही ये बात

इस मौके पर रामनाथ कोविंद ने कहा, “आज का विजयादशमी उत्सव आरएसएस की शताब्दी का प्रतीक है. नागपुर की पावन भूमि आधुनिक भारत की महान विभूतियों जैसे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर से जुड़ी है.”

पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस को एक “पवित्र, विशाल वट वृक्ष” के रूप में वर्णित किया, जो भारत के लोगों को एक साथ लाता है, उन्हें गौरव और प्रगति का अहसास कराता है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में पूरे भारत में श्रद्धा और एकाग्रता की लहर फैली, जबकि पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर निर्दोष नागरिकों की हत्या की. उन्होंने यह भी कहा कि सेना का योगदान विश्व स्तर पर देखा गया है और देश के भीतर संवैधानिक उग्रवादी तत्वों का सामना करना भी आवश्यक है.

इस दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा,” ये वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का सढ़े तीन सौ वर्ष है…जिन्होंने अत्याचार, अन्याय और सांप्रदायिक भेदभाव से समाज के मुक्ती के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और समाज की रक्षा की ऐसी एक विभूति उनका समरण इस वर्ष होगा. आज 2 अक्टूबर है तो स्वर्गीय महात्मा गांधी की जयंती है अपने स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका योगदान अविस्मरणीय है. लेकिन स्वतंत्रता के बाद भारत कैसा हो उसके बारे में विचार देने वाले हमारे उस समय के दार्शनिक नेता थे उनमें उनका स्थान अग्रणीय हैं….जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण दिए ऐसे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री का आज जयंती है. भक्ति, देश सेवा के ये उत्तम उदाहरण हैं…”

ट्रंप की टैरिफ पर क्या बोले भागवत?

भागवत ने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ अपने भले के लिए अपनाया होगा, लेकिन इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. उन्होंने जोर दिया कि भारत को किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और निर्भरता को मजबूरी में नहीं बदलना चाहिए. उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया. भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का होना जरूरी है, लेकिन यह मजबूरी का कारण नहीं होना चाहिए.

नेपाल में हाल ही में हुई हिंसा पर कही ये बात

नेपाल में हाल ही में हुई हिंसा पर उन्होंने कहा कि असंतोष को इस तरह के हिंसक आंदोलन के माध्यम से व्यक्त करना सही नहीं है. ऐसे रास्तों से सकारात्मक परिवर्तन नहीं आता.

भागवत ने यह भी कहा कि ऐसे माहौल में बाहरी स्वार्थी देश अपने खेल खेल सकते हैं. हमारे पड़ोसी राज्य हमारे अपने हैं, इसलिए उनकी स्थिति हमारे लिए चिंता का विषय है.

देश के अंदर संवैधानिक उग्रवादी तत्व: भागवत

भागवत ने कहा कि देश के अंदर संवैधानिक उग्रवादी तत्व हैं, लेकिन सरकार की कड़ी कार्रवाई और लोगों में नक्सली विचारधारा के खोखलेपन और क्रूरता के प्रति जागरूकता के कारण उग्रवादी नक्सलवादी आंदोलन पर काफी हद तक काबू पाया गया है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में न्याय, विकास, सद्भावना और सहानुभूति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना की आवश्यकता है.

भागवत ने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर और वैश्विक एकता के प्रति जागरूक होकर, हमें सुनिश्चित करना होगा कि निर्भरता हमारी मजबूरी न बने और हम अपनी इच्छानुसार कार्य कर सकें. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वदेशी और स्वावलंबन का कोई विकल्प नहीं है.

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी शताब्दी वर्ष पर बस्ती-बस्ती में स्वयंसेवकों ने निकाले पथ संचलन

प्रान्त प्रचारक विमल  गुप्ता ने किया सम्बोधित कहा संघ की कार्यप्रणाली और सेवा कार्यों ने पिछले सौ वर्षों में समाज को दी नई दिशा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विजयादशमी के पावन पर्व पर गुरुवार को भोपाल महानगर के 12 विभिन्न नगरों, खंडों और बस्तियों में पथ संचलन निकाले गए। संघ के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में इनमें सहभागिता की। विद्युत जिले के अवधनगर स्थित अविनाथ नगर बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि यशपाल सिंह और मुख्य वक्ता प्रान्त प्रचारक विमल जी गुप्ता शामिल हुए। श्री गुप्ता ने संघ के मूल विचार, उद्देश्य और समाज सेवा की दिशा में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का जन्म किसी के विरोध में नहीं, बल्कि राष्ट्र को स्वतंत्र कराने और उस स्वतंत्रता को स्थायित्व और चरित्र देने के उद्देश्य से हुआ। संघ के संस्थापक जन्मजात राष्ट्रभक्त थे, जिनका एकमात्र लक्ष्य भारत माता को परम वैभव के शिखर पर ले जाना था।

प्रान्त प्रचारक श्री विमल जी गुप्ता ने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण करना है। संघ की कार्यप्रणाली और सेवा कार्यों ने पिछले सौ वर्षों में समाज को नई दिशा दी है। उन्होंने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को गौरवशाली बताते हुए कहा कि यह केवल संगठन की नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की भी यात्रा रही है।

इसके साथ ही विद्युत जिला के अवधनगर स्थित समन्वय नगर बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में नितिन केकरे शामिल हुए। उन्होंने विजयादशमी का संघ के लिए महत्व और पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी की राष्ट्रभक्ति से उपस्थित लोगों को परिचित कराया। भोजपुर जिले के मंडीदीप नगर की प्रताप बस्ती में पथ संचलन निकाला गया। इस दौरान जिला कार्यवाह महेश राठौर जी भी पथ संचलन में शामिल हुए।

वहीं, तात्या टोपे जिले के अंबेडकर नगर की कोटरा बस्ती का विजयादशमी कार्यक्रम सरस्वती स्कूल में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, संघ के प्रांत संचालक अशोक जी पांडेय, नगर संघचालक गोपालदास मेहता, क्षेत्र संगठन मंत्री विवस्वान जी तथा संगठन मंत्री हितानंद शर्मा सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि एवं संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर वरिष्ठ गायक व सांस्कृतिक विशेषज्ञ उल्लास तेलंग ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने अपने उद्बोधन में संघ की कार्यशैली, उसके सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता की भावना को सराहा।

शस्त्र पूजन के उपरांत आयोजित सभा में वक्ताओं ने संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे संघ ने राष्ट्र निर्माण में अपना मौन लेकिन प्रभावशाली योगदान दिया है। सभा में “पंच परिवर्तन” के विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में संघ कार्य की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सत्य और धर्म के पथ पर चलना ही विजयादशमी का वास्तविक संदेश है और यही संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक का मूल संकल्प भी है। संघ के इस शताब्दी वर्ष में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का सशक्त प्रतीक था।

इन स्थानों पर भी निकाला गया पथ संचलन :

विजयादशमी के अवसर पर भोपाल विभाग के विभिन्न जिलों में भी पथ संचलन निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए। यह पथ संचलन प्रताप जिले के सुभाष कॉलोनी और अशोक विहार बस्ती में निकाला गया। इस अवसर पर विभाग प्रचारक कैलाश जी लववंशी मुख्य रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष संगठन की शताब्दी यात्रा के मूल भावों को स्मरण करने का अवसर है। इसके साथ ही शंकराचार्य नगर स्थित ग्रीन पार्क और हिनोतिया में पथ संचलन हुआ। साथ ही शंकराचार्य नगर के अंतर्गत रामबाग और गांधी बस्ती में पथ संचलन हुआ। इस अवसर पर डॉ. अमित दीक्षित मुख्य रूप से उपस्थित हुए।

इसी क्रम में तात्या टोपे जिले के अंतर्गत भरत नगर खंड के मानसरोवर में पथ संचलन हुआ। इस अवसर पर अखिलेश प्रताप सिंह राठौर जिला सह-कार्यवाह मुख्य रूप से उपस्थित हुए। इस दौरान उन्होंने विजयादशमी पर्व के महत्व को उद्धृत किया। साथ ही उन्होंने संघ की स्थापना एवं 100 वर्षों की यात्रा को संक्षेप में बताया। साथ ही तात्या टोपे जिले के भरत बस्ती में डॉ. लोकेन्द्र दवे के मुख्य अतिथ्य में पथ संचलन निकाला। इस दौरान समिधा कार्यालय प्रमुख विजय विश्वकर्मा जी बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित हुए। उन्होंने संघ की स्थापना की परिकल्पना, उसकी पृष्टभूमि के विषय पर विस्तृत चर्चा की।

 

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