एक समय था जब देश के राजनीतिक गलियारों में ग्वालियर के जयविलास की तूती बोला करती थी राजमाता विजयाराजे सिंधिया और उनके पुत्र माधवराव के बिना देश प्रदेश की राजनीति अधूरी मानी जाती थी। समय बदला राजमाता और माधवराव दोनों स्वर्गवासी हो गए ,जयविलास का दबदबा राजनीति में कम हो गया हालांकि राजमाता की पुत्रियों ने इस परंपरा को समाप्त नहीं होने दिया वसुंधरा ने राजस्थान तो यशोधरा ने मध्यप्रदेश की राजनीति में अलग पहचान बनाए रखी बावजूद इसके जयविलास के रुतबे में कमी दिखाई दी,समय ने एकबार फिर करवट ली जयविलास ने फिर पुराना दम दिखाया एक तरफ राजमाता की तर्ज पर ज्योतिरादित्य ने ठीक उसी प्रकार कमलनाथ सरकार को ढेर कर दिया जैसे की राजमाता ने द्वारकाप्रसाद की सरकार को सत्ताच्युत कर दिया था। अब एकबार फिर केंद्र की राजनीति के केंद्र में जयविलास फिर जीवन्त दिखाई दिया केंद्र की दमदार भाजपा सरकार के अध्यक्ष नड्डा ने ज्योतिरादित्य का स्वागत किया ,आज जहां ज्योतिरादित्य का केंद्र की सरकार में मंत्री बनना लगभग तय है वहीं उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को भी मध्यप्रदेश सरकार में मंत्रीपद से नवाजा गया है। देश प्रदेश दोनों की ही राजनीति में आज एकबार फिर जयविलास का दबदबा पूर्व की तरह साफ दिखाई देने लगा है। इसको लेकर ग्वालियर चम्बल अंचल में खुशी की लहर साफ तौर पर दिखाई दे रही है। लोग आशान्वित हैं की अब एकबार फिर देश प्रदेश की राजनीति में जयविलास के बढ़े कद का लाभ पूरे अंचल को मिलेगा।
देश प्रदेश की राजनीति में जयविलास की जोरदार वापसी
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