निवृतमान शंकराचार्य व भारत माता जनहित ट्रस्ट के परमाध्यक्ष भारत माता मंदिर के संस्थापक रानी रंगीली अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज का आज सुबह 8:00 बजे करीब निधन उनके आश्रम संत कुटीर ऊपर वाला में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी गिनती देश के शीर्ष धर्माचार्यों में होती थी। उनका देश के शीर्ष राजनेताओं इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, आरएसएस के प्रमुख रहे कई संघचालकों से निजी संबंध थे ।
3 साल पहले उन्हें भारत सरकार ने पदम विभूषण की उपाधि से सम्मानित किया था। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। भारत माता मंदिर की स्थापना कर उन्होंने देश में समन्वय वादी सोच को नया आयाम दिया
। उनके निधन से भारतीय दशनामी सन्यासी परंपरा के एक युग का अंत हो गया है । मधुर भाषी ओजस्वी वक्ता स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज कि भारत ही नहीं बल्कि कई देशों के राष्ट्र अध्यक्षों से भी अच्छे रिश्ते थे और उनका सभी धर्मों के धर्माचार्य समान रूप से सम्मान करते थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शोक व्यक्त कर दी श्रद्धाजंलि
सत्यमित्रानंद महाराज के निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनजी भागवत व सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि परमश्रद्धेय स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज का पार्थिवत्याग हम सब के लिए एक बहुत बड़ी व वेदनायक क्षति है। भारतीय धर्मजगत के वे सशक्त स्तम्भ थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हम कार्यकर्ताओं के लिए तो वे अत्यंत आत्मीय तथा अंतरंग अभिभावक रहे। उनका पवित्र, स्नेहमय सेवापरायण तथा समर्पित जीवन, समाज-जीवन की पवित्रता व संतुलन का आधार रहा। सामाजिक अभेद दृष्टि व समरसता के लिए मनसा वाचा कर्मणा सक्रिय रहकर विषमतानिर्मूलन के लिए, प्रबल समर्थन खड़ा करने वाले वे तपस्वी थे। उनके जाने से इन सब क्षेत्रों में उत्पन्न बहुत बड़ी रिक्तता को भरने का दायित्व हम सब पर आ पड़ा है। यद्यपि सूक्ष्मावकाश से उनसे प्रेरणा व पोषण हमें मिलता रहेगा, हमारे चर्मचक्षु तो अब उनको देख नहीं पायेंगे। उनकी पवित्र व प्रेरक स्मृति को हम सबका अश्रुपूरित नेत्रों से प्रणाम व भावभीनी श्रद्धांजलि।