विराग पाचपोरे
नागरिकता संशोधित कानून और एन आर सी ये दोनों भिन्न हैं. पर इस पर खूब जम के राजनीती हो रही हैं. छात्रों को आगे कर देश के कुछ वामपंथियों के प्रभावित विश्व विद्यालयों में हिंसक आन्दोलन कराये जा रहे हैं. मैं कल एक टीवी न्यूज चैनल देख रहा था. उसकी रिपोर्टर दिल्ली के कुछ इलाखों में रहनेवाले मुसलमानों से पूछ ताछ कर रही थी और वो लोग बता रहे थे की कैसे उनको बताया गया की इस कानून की वजह से उनको देश से निकाल दिया जायेगा. यह सरासर झूट और गलत हैं.
देश के गृहमंत्री अमित भाई शाह ने साफ़-साफ़ कहा हैं की इस कानून से जो भारत के नागरिक हैं जिसमे मुसलमान भी आते हैं, उनकी नागरिकता को कोई खतरा नही हैं. उनको यहाँ से बाहर निकालने का कोई सवाल ही पैदा नही होता. यह कानून तो जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान जैसे इस्लामिक मुल्कों से प्रताड़ित होकर भारत में शरण लिए हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, इसाई और पारसी लोगों को नागरिकता देने के सम्बन्ध में हैं.
कल एक बात और अच्छी हुई की जमा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी ने भारत के मुसलमानों को इस कानून से आश्वस्त कराया. उन्होंने कहा की भारत के मुसलमानों को डरने की कोई आवश्यकता नही हैं क्यों की यह कानून उनके लिए नही हैं.
दुनिया के हर देश के पास उनके नागरिकों की सूचि होती हैं. जो भी कोई नया व्यक्ति उस देश में दाखल होता हैं तो उसके बारे में भी पूरी जानकारी उनके पास होती हैं. शायद भारत ही एक ऐसा देश हैं जहाँ लोग आते हैं, बस जाते हैं और यहाँ की व्यवस्थाओं में दाखल देने लगते हैं. असम, बंगाल, बिहार जैसे सीमावर्ती राज्य इस अवैध आव्रजन का खामियाजा भुगत रहे हैं. फिर भी इस गंभीर विषय पर राजनीती करनेवाले कांग्रेस, कम्युनिस्ट और अन्य सेक्युलर दलों को क्या कहना?
देश की सुरक्षा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय हैं. असम जैसे सीमावर्ती प्रदेश में इस घुसपैठ ने सुरक्षा को ही चैलेंज दिया हैं. इस घुसपैठियों को वोट बैंक बनाकर इस सेक्युलर दलों ने अपनी राजनितिक रोटी तो सेंक ली. पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ जरुर किया हैं. अब भी वे वाही सब कर रहे हैं. यह बात ठीक हिं आप को भाजपा से या नरेन्द्र मोदी से या अमित शाह से तकरार रही होगी. पर उसका विरोध प्रदर्शन विदेशों में करना यह कौनसी देशभक्ति हैं? कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तो पाकिस्तान की भाषामे ही बोल रहे हैं. यही वे जो देश के मुसलमानों को भड़का रहे हैं.
यह एक अच्छा संकेत मिल रहा हैं की कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवी एवं धार्मिक नेता मुसलमानों को समझा रहे हैं और प्रमाणिकता से यह बता रहे हैं आप को डरने की कोई आवश्यकता नही हैं. आशा हैं, इस पहल का अच्छा परिणाम दिखाई देगा और देश में यह जो राजनितिक अशांति फ़ैलाने का जो घृणित प्रयास हो रहा हैं वह समाप्त होगा.
इसका एक और पहलु सामने आया हैं. देश में जो कांग्रेस और अन्य राजनितिक दलों की सत्ता जिन राज्यों में हैं उन्होंने नागरिकता संशोधन मानून को और एन आर सी को लागु करने से इंकार कर दिया हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बंगाल, केरल, ओडिशा और अब महाराष्ट्र भी ऐसे राज्यों की सूचि में आते हैं. इन राज्य सरकारों ने तो इस कानून की संवैधानिकता पर भी प्रश्नचिन्ह उपश्थित किया हैं. जब की सुप्रीम कोर्ट ने इसकी संवैधानिकता को स्वीकार किया हैं.
कुल मिला कर नागरिकता संशोधन कानून एक अच्छे उद्देश्य से लाया गया कानून होते हुए भी सबसे अधिक और सुनियोजित तरीके से फैलाये गए भ्रम का शिकार हो गया हैं. सरकार की ओरसे इस कानून को लेकर जो ही ग़लतफ़हमी फैलाई जा रही हैं सका ताबड़तोड़ जबाब दिया जाना आवश्यक हैं. उसी प्रकार मुस्लिम राष्ट्रीय मंच या ख्रिश्चन राष्ट्रीय मंच जैसे सामाजिक संघटनों की सहायता से मुस्लिम और अन्य अल्प्संख्योकों के मन में इस कानून को लेकर जो गलतफहमियां फैलाई गयी हैं उनका निराकरण करना भी जरुरी हैं. इसके साथ जो अराजकता और हिंसा फैलानेवाले तत्व हैं उनसे सख्ती से पेश आकर उनको दण्डित करना होगा. तभी तो ‘सब का विश्वास’ सार्थक हो सकेगा.