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नियुक्तियों से पहले प्रदेश प्रभारियों की सूची जारी करके पार्टी नेतृत्व ने किया बड़ा खेला अब निगम मंडल आयोगों से स्वतः हो सकता है पत्ता कट

प्रवीण दुबे
मध्य प्रदेश की निगमों, बोर्डों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों से पूर्व भाजपा नेतृत्व ने मध्यप्रदेश के 62 जिलों में प्रभारियों की नियुक्तियां करके बड़ा खेल कर दिया है  पार्टी ने कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं की जिम्मेदारी तो बढ़ा दी है,लेकिन अब इसके साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पार्टी नेतृत्व ने इन पार्टी नेताओं को निगम मंडलों आयोग प्राधिकरणों आदि में नियुक्तियों से पहले ही इनकी दावेदारी पर विराम भी लगा दिया है ऐसा इसलिए क्यों कि भाजपा ‘एक व्यक्ति–एक पद’ के फॉर्मूले पर चलने वाली पार्टी है। चूंकि इन नेताओं को एक जिम्मेदारी देदी गई है अतः इनकी किसी नई नियुक्ति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
 उल्लेखनीय है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा में ‘एक व्यक्ति–एक पद’ के फॉर्मूले को सैद्धांतिक मंजूरी दी हुई है पार्टी में जब भी कोई नियुक्ति की जाती है नेतृत्व इस सैद्धांतिक पक्ष को भी दृष्टिगत रखता है। चूंकि सत्ता के गलियारों में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की गतिविधियां तेज हैं सूत्रों के मुताबिक  चरणबद्ध तरीके से नियुक्तियां किए जाने के संकेत हैं। इसी क्रम में पार्टी ने पहले जिलों के प्रभारियों के नाम घोषित करके नियुक्तियों के दौरान किसी भी प्रकार के आक्रोश या नाराजगी को कंट्रोल करने का प्रयास किया है।
पार्टी से आ रही जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई नियुक्तियों को लेकर केंद्रीय भाजपा नेतृत्व के साथ दिल्ली में दो दौर की चर्चा की है।  राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने एक आरएसएस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल  के साथ करीब दो घंटे बैठक की है।
 भोपाल में हुई एक अहम बैठक में मुख्यमंत्री, खंडेलवाल और जामवाल ने निगम–बोर्ड नियुक्तियों की पहली सूची के नामों पर चर्चा की है।
सत्ता और संगठन में संतुलन की रणनीति क्या है?
1. उपेक्षित क्षेत्रों पर फोकस
भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश हुई, लेकिन मालवा का दबदबा रहा। मालवा से 11 पदाधिकारी हैं। मध्य भारत से पांच, बुंदेलखंड से तीन, ग्वालियर–चंबल से पांच, महाकौशल से दो और विंध्य से तीन पदाधिकारी हैं।
इस असंतुलन को दूर करने के लिए आने वाली निगम और बोर्ड नियुक्तियों में महाकौशल, विंध्य और ग्वालियर–चंबल को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
2. जातीय संतुलन
प्रदेश कार्यकारिणी में 14 सामान्य वर्ग, छह ओबीसी, तीन एसटी और दो एससी पदाधिकारी हैं। निगम–बोर्ड नियुक्तियों में भी इसी तरह का जातीय संतुलन बनाए रखा जाएगा।
किन चेहरों को मिलेगा मौका?
निगम और बोर्डों की पहली सूची में उन पूर्व मंत्रियों के नाम सबसे आगे हैं, जो चुनाव हार गए या मंत्रिमंडल में जगह नहीं पा सके। अरविंद भदौरिया, रामनिवास रावत और इमरती देवी के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
रामनिवास रावत, जो लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे, वन मंत्री रह चुके हैं, लेकिन विजयपुर उपचुनाव हार गए। सिंधिया कोटे से आने वाली इमरती देवी पहले लघु उद्योग निगम की अध्यक्ष रह चुकी हैं और डबरा से चुनाव हार चुकी हैं।
अरविंद भदौरिया, शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके हैं और संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। उमाशंकर गुप्ता और आंचल सोनकर के नाम भी चर्चा में हैं।
पूर्व विधायकों और नेताओं की लंबी सूची
इन बड़े नामों के अलावा कई पूर्व विधायक और समर्पित पार्टी कार्यकर्ता भी दौड़ में हैं। संगठन से जुड़े जिन नामों पर चर्चा है, उनमें अशुतोष तिवारी (पूर्व संगठन सचिव), विजय दुबे (पूर्व संभाग प्रभारी), केशव भदौरिया (प्रदेश कार्यसमिति सदस्य), विनोद गोटिया (पूर्व प्रदेश महामंत्री), गौरव सिरोठिया (पूर्व जिला अध्यक्ष), श्याम सुंदर शर्मा (प्रदेश कार्यसमिति सदस्य), संजय नागाइच (पूर्व अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक), शैतान सिंह पाल (पूर्व निगम अध्यक्ष) और सुनील पांडेय शामिल हैं।
पार्षद (एल्डरमैन) नियुक्तियां विधायक, सांसद और जिला अध्यक्ष की पसंद पर
मध्य प्रदेश के शहरी निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति प्रशासनिक और नगर निकाय कानूनों की जानकारी के आधार पर की जाती है और वे पार्टी सदस्य भी हो सकते हैं। आमतौर पर सक्रिय स्थानीय कार्यकर्ताओं के नाम प्रस्तावित किए जाते हैं।
इनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल तक रहता है। चार बड़े नगर निगमों (जहां आबादी 10 लाख से अधिक है) में 12–12 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। बाकी 12 नगर निगमों में 10–10, नगरपालिकाओं में छह और नगर परिषदों में चार एल्डरमैन होंगे।
यहां बताना उपयुक्त होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पहली बार 13 फरवरी 2024 को 46 निगमों, बोर्डों और प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां रद्द कर दीं। तभी से प्रदेश के शासी निकायों में नियुक्तियों का इंतजार है
प्रदेश में कुल 48 निगम, बोर्ड और प्राधिकरण हैं, जिनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के लगभग 1,200 पद हैं।
इनमें नियुक्तियों को लेकर पार्टी नेतृत्व ने यदि एक व्यक्ति–एक पद’ के फॉर्मूले को प्राथमिकता दी तो कल जारी कई बड़े नामों वाली प्रदेश प्रभारियों की सूची में शामिल नेताओं को झटका लग सकता है।
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