Homeत्वरित टिप्पणीपठान : तू डाल डाल मैं पात पात

पठान : तू डाल डाल मैं पात पात

जगदीश गुप्ता

बायकाट के दावों और प्रयासों के साथ पठान की अग्रिम सफलता और सुपरहिट होने के समाचार साथ साथ चल रहे हैं । सामान्य व्यक्ति को कन्फ्यूज कर के फिल्म हिट कराने के प्रयास में एक वर्ग विशेष जुटा है । बॉलीवुड भयभीत है क्योंकि उसे लग रहा है कि उसका साम्राज्य ढहने को है ।

..वॉलीवुड की दीवारों में लगा दीमकपूरी दम लगा रहा है ताकि ,अपनी पैठ भारत की संस्कृति को खोखला करने का अपना लक्ष्य हासिल कर ले I

दूसरी और हजार साल की बेहोशी से बाहर आई हिंदू चेतना कसमसा रही है । कि वह अपने बंधनों को खोल सके I उसके सामने हजार चुनौतियां है । हजारों हारे हुए मोर्चे हैं । जिन्हें उसे वापस पाना है ।

हजार वर्षों में हिंदुओं और भारतीय संस्कृति ने जो नहीं खोया वह पिछले सत्तर वर्षों में खोया । किंतु यह भी एक देवयोग है कि नरेन्द्रमोदी सरकार में भारतीय चेतना में जिस साहस का जागरण हुआ है , उसके चलते हिंदुओं ने उन माध्यमों को पहचाना लिया है और उन कालनेमियों को चिन्हित किया है , जिनसे हिंदुओं को उनके गौरव को क्लोरोफार्म सुंघाता जाता रहा है I यह क्लोरोफार्म सुंघाया गया शिक्षा क्षेत्र को और सांस्कृतिक क्षेत्र को । सांस्कृतिक मोर्चे की शक्ति को , ।

विधर्मियों म्लेच्छों और भारतविरोधियों के गिरोह ने न इसे केवल पहचाना किंतु वहां अपना षड़यंत्र / प्लान लागू भी किया I

भारत के पहले छ: शिक्षमंत्रियों का एक वर्गविशेष से होना संयोग नहीं था प्रयोग था । अंग्रेजों के विरूद्ध देश में चेतना भरने वाली ,हरिश्चन्द्र तारामती और प्रताप जैसी भारतीय मूल्यो और शौर्य वाली फिल्मों के स्थान पर अचानक उर्दू भाषा और म्लेच्छ संस्कृति को प्रकाशित करना आरंभ हुआ । और स्थिति यहाँ तक आ पंहुची कि हिंदू कलाकारों को छाँट छाँट कर बाहर कर दिया गया । केवल वे हिंदू ही चल सके जो नाम के हिंदू थे । केवल चेहरे थे । सवासौ करोड़ के देश में पाकिस्तानी कलाकार पैसा कमा रहे थे हिट हो रहे थे । और इथर अपने समय के सुपरहिट काम को तरस रहे थे ।

बॉलीवुड में हिंदुओं को सहारा देने वाला नाम था बालठाकरे । माना जाने लगा कि उनके अवसान के बाद उनकी पार्टी और उनके उत्तराधिकारी सब पाकिस्तान परस्त दाऊद के टुकड़ो पर पलने को राजी हो गए ।

अपना वर्चस्व जमाने के बाद फिल्मों से आने वाली कमाई और साधन उनके हाथ में पूरी तरह चले गए जो भारत के संसाधनों पर हजार साल से डाका डाल कर जीते आए थे ।

पर जैसे ही हिंदुओं को समझ आया कि सूटकेस में मिलने वाली लड़कियों को पहला बेहाशी का इंजेक्शन ये फिल्में ही लगाती हैं । कश्मीर में हिंदुओं के निर्वासन और कत्लोगारत की पटकथा इन वालीवुडो से जुड़े पाकिस्तानी म्लेच्छ ही लिख रहे थे । उनके लिए टेररफंड यही मुहैया करा रहे थे
और यह पहचानते ही हिंदू सचेतक भी उनके लिए टेरर बढ़ाने वाले फंड जुटाने वाले इस माध्यम को नष्ट करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं I
उनका मानना है कि अघोषित रूप से यह धन भारतविरोधी गतिविधियाे के संचालको तक पंहुचेगा ही I

बायकाट के दावों और प्रयासों के साथ पठान की अग्रिम सफलता और सुपरहिट होने के समाचार साथ साथ चल रहे हैं । सामान्य व्यक्ति को कन्फ्यूज कर के फिल्म हिट कराने के प्रयास में एक वर्ग विशेष जुटा है । बॉलीवुड भयभीत है क्योंकि उसे लग रहा है कि उसका साम्राज्य ढहने को है ।

फिर भी वह कोशिश कर रहा है कि झूठी कमाई के आंकड़े प्रसारित करके कुछ तो ब्लेक को व्हाईट करके , अपने टेरर फैलाने वाले गुर्गों या उनके एजेंटो तक पंहुचा सके I ताकि मोदी सरकार द्वारा आने वाले विदेशी धन के खातों से चलने वाले , उन खातों पर रोक के बावजूद , उनके दंगों के प्लान फेल न हो जाएं ।इसलिए पठान डाल डाल और बजरंगी पात पात हैं ।

 

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