ग्वालियर में दो दिवसीय राष्ट्रीय योग शास्त्र संगम का भव्य समापन
ग्वालियर, 25 अक्टूबर 2026। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी प्रकल्प, नीडम, ग्वालियर और लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय तृतीय योग शास्त्र संगम 2026 राष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को गरिमामय समापन हुआ। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘पतंजलि योगदर्शन’ था। विक्रांत विश्वविद्यालय, ग्वालियर का इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि नागरिक सहकारी बैंक, ग्वालियर के अध्यक्ष श्री अतुल अधोलिया, विशिष्ट अतिथि एलएनआईपीई के कुलसचिव प्रो. एम.के. सिंह, मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अखिल भारतीय योग प्रमुख एवं जीवनव्रती कार्यकर्ता श्री रवि शर्मा तथा कार्यक्रम अध्यक्ष विवेकानंद केंद्र ग्वालियर विभाग के संचालक श्री अजय शर्मा उपस्थित रहे। संचालन डॉ. विकास सोनी ने किया।
मुख्य वक्ता श्री रवि शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने, आत्मानुशासन विकसित करने तथा जीवन को संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का मार्ग है। उन्होंने पतंजलि योगदर्शन में अभ्यास और वैराग्य की अवधारणाओं को सरल उदाहरणों से समझाया तथा नियमित अभ्यास, धैर्य, निरंतरता, आत्मसंयम और अनासक्ति को योग साधना के आधार बताते हुए प्रतिभागियों को इन्हें दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण में निहित त्याग, समर्पण और सामूहिक प्रयासों का उल्लेख करते हुए बड़े उद्देश्यों के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर कर्म की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि श्री अतुल अधोलिया और विशिष्ट अतिथि प्रो. एम.के. सिंह ने योग शिक्षा, अनुशासन, शोध तथा समाज में योग की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों और शोधार्थियों के ज्ञानवर्धन तथा व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्ष श्री अजय शर्मा ने सम्मेलन के अनुभवों के आधार पर आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने योग के शास्त्रीय ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने, युवाओं को योग से जोड़ने तथा योग शिक्षा और साधना के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने महर्षि पतंजलि द्वारा सुझाई गई मैत्री, करुणा, आनंद और समता की प्रतिक्रियाओं की जीवन में उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
दो दिवसीय सम्मेलन में शोध-पत्र प्रस्तुति, पोस्टर प्रस्तुति, योगासन प्रतियोगिता और पतंजलि योगसूत्र उच्चारण प्रतियोगिता आयोजित की गईं। समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. यतेंद्र सिंह ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद शांति पाठ किया गया और सामूहिक छायाचित्र के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ। आयोजकों ने सभी सहयोगी संस्थानों, अतिथियों, वक्ताओं, निर्णायकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह सम्मेलन योग के शास्त्रीय ज्ञान, शोध, साधना और जीवन-मूल्यों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।