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परिणाम आने से पहले ही भाजपा में सिर फुटव्वल की नोबत तार तार होता अनुशासन

भले ही अभी विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने नहीं आए हैं लेकिन चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश के सत्ताधारी दल में जो बगावत देखने को मिली और अब चुनाव के बाद शिकवे शिकायतों का जो दौर चल रहा है उसने यदि सबसे ज्यादा किसी के लिए परेशानी खड़ी की है तो वह प्रदेश के एक कद्दावर नेता व दमदार केंद्रीय मंत्री के लिए है। विरोध किस सीमा तक है कि चुनाव के तुरंत बाद ग्वालियर के एक होटल में माथा जोड़कर बैठे कुछ पुराने भाजपाइयों के बीच जहां हाथापाई गालीगलौज तक की नोबत आ गई वहीं इस तनावपूर्ण माहौल में सम्भाग के अधिकृत रूप से घोषित संगठन के सबसे वजनदार नेता ने यहां तक खुलासा कर दिया कि वजनदार केंद्रीय मंत्री इसबार अपने अधिकृत चुनाव क्षेत्र की जगह प्रदेश की राजधानी से चुनाव रण में अपना भाग्य आजमाएंगे।

 

यह बात अब किसी से छुपी नहीं है कि जिस पार्टी को कभी राजनीति में अनुशासन की मिसाल कहा जाता था उस पार्टी में सर्वाधिक अनुशासनहीनता दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन से लेकर उनकी घोषणा तक और उसके बाद चुनाव के दौरान और अब जबकि चुनाव समाप्त हो चुका है इस दल के ऊपर से अनुशासन का मुल्लमा पूरी तरह उतर चुका है।

 

प्रत्याशी चयन के समय खुद अपने चहेतों यहां तक कि अपने परिवार के लिए टिकट की मांग कोई छोटा कार्यकर्ता नहीं बल्कि वो नेता करते दिखाई दिए जिनके कन्धों पर संगठन ने पूरे चुनाव की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। इसके लिए कुछ ऐसे सबल प्रत्याशियों की बली चढ़ा दी गई जिनका कि अपने क्षेत्र में खासा वजूद रहा है। बड़ी चतुराई से किसी की उम्र का हवाला दिया गया तो किसी की लोकप्रियता का गलत विश्लेषण कर मनमानी की गई।

 

परिणाम सबने देखा  पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ बड़ी संख्या में बागी चुनाव में खड़े हो गए। इसी वक्त पार्टी शीर्ष नेतृत्व जिनमें कुछ कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें कुशल संगठनकर्ता कहा जाता है और इसी उद्देश्य से उन्हें चुनाव में सबकुछ ठीक ठाक चले इसके लिए उन्हें भोपाल में ही रुकने को कहा गया था , उनकी चुप्पी और नासमझी भी सामने आ गई जब ऐसे ही महत्वाकांक्षी और अलोकप्रिय नेताओं को डैमेज कंट्रोल करने की कमान सौंप दी गई परिणाम यह सामने आया डैमेज़ कंट्रोल होने के बजाए और बढ़ गया और वही नेता व उनके खास समर्थक पार्टी को डैमेज़ करते दिखाई दिए।तमाम बागी प्रत्याशी मैदान में डटे रहे और पार्टी के लिए समस्या बन गए।

 

बात यहीं समाप्त नहीं होती  प्रदेश खासकर ग्वालियर अंचल में कुछ प्रत्याशी जो खुद की दमदारी से दवाब बनाकर टिकिट प्राप्त करने में कामयाब रहे उनके खिलाफ भी योजनाबद्ध ढंग से पार्टी लाइन के बिल्कुल विपरीत अभियान चलाया गया। पूरे ग्वालियर शहर ने यह बात महसूस की । यही वजह है कि यहां कम से कम चार सीटों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इस भीतरघात की शिकायतें भी ऊपर तक पहुंच रही हैं।इतना ही नहीं यहां सत्ता और संगठन दोनों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा।

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच अब जो सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है वह यह है कि डैमेज़ कंट्रोल से लेकर पूरा चुनाव ठीक ठाक ढंग से कराने वाले नेता अपने खिलाफ भड़कते माहौल को भांपकर अपना लोकसभा क्षेत्र छोड़कर प्रदेश की राजधानी से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं और यह बात अधिकृत रूप से संगठन तक भी पहुंच चुकी है।

 

सूत्रों का कहना है कि चुनाव में हुए भितरघात व अन्य छीछालेदर का अनोपचारिक रूप से विश्लेषण करने जब कुछ वजनदार व पुराने भाजपाई ग्वालियर के एक होटल में बैठे तो गालीगलौज व जूतमपैजार  की स्थिति के बीच सम्भाग के संगठन से जुड़े सबसे अधिकृत नेता ने बातों ही बातों में यह खुलासा करके सबको चोंका दिया।

 

राजनीतिक पण्डितों का मानना है कि  पार्टी के भीतर मचे इस अंदरूनी घमासान के चुनाव परिणाम आने के बाद और अधिक बढ़ने की सम्भावना है और यह उसी स्थिति में टाला जा सकता है जब ऊपर बैठा शीर्ष नेतृत्व विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से लेकर मतदान और उसके बाद की स्थितियों का साफगोई के साथ ईमानदारी से विश्लेषण करे और कमजोर कड़ी के खिलाफ कार्रवाई करे।

 

विधानसभा चुनाव में मतदान के पश्चात सामान्य राजनीतिक चर्चा हेतु भाजपा के कुछ नेतागण एक होटल में बैठे थे इसी बीच शिवपुरी जिले पर बातचीत के दौरान एक पार्टीजन द्वारा व्यंगात्मक टिप्पणी पर एक अन्य नेता को बुरा लग गया और वे अपना आपा खो बैठे, माहौल तनावपूर्ण हो गया बाद में शांति के साथ चर्चा हुई। यह सच है कि चुनाव में जो कुछ हुआ अब उसको लेकर पार्टी में वातावरण ठीक नहीं है शीर्ष नेतृत्व को इसपर शांत बैठने के बजाए जल्द से जल्द कार्यवाही करना चाहिए क्योंकि लोकसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं।

                         

                           प्रोफेसर योगेंद्र मिश्रा

                          वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक व

                         संघ भाजपा मामलों  के विशेषज्ञ

 

 

 

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