Homeप्रमुख खबरेंपहले कलेक्टर और अब एसपी आखिर माजरा क्या है ?

पहले कलेक्टर और अब एसपी आखिर माजरा क्या है ?

प्रवीण दुबे

पहले कलेक्टर और अब एसपी यूं तो इसे सामान्य प्रशासन विभाग की परंपरागत तबादला नीति का हिस्सा कहा जा सकता है लेकिन थोड़े से समय के अंतराल में एक शहर के कलेक्टर कमिश्नर सीधे एक साथ दूसरे शहर में स्थानांतरित कर दिए जाएं तो सवाल उठना लाजमी है। सवाल यह नहीं कि ऐसा क्यों हुआ ? सवाल यह है की शिवपुरी से ग्वालियर लाए गए दोनों अधिकारियों मैं आखिर ऐसी कौन सी खूबी अथवा विशेषता है जिसे राजनीतिक रूप से मध्यप्रदेश में अहम स्थान रखने वाले ग्वालियर में लाया गया है? सर्वविदित है कि प्रदेश की राजनीति का पावर सेंटर ग्वालियर है। यहां केंद्रीय मंत्रियों, स्थानीय मंत्रियों व नेताओं से राजनीतिक तालमेल बनाना सबसे बड़ी चुनौती कहा जा सकता है। एक तरफ नौकरशाही पर जयविलास के रुतबे को कायम रखने का दबाव दूसरी तरफ देश की राजनीति के वजनदार चेहरे के इशारों को समझने की परेशानियां इन सबके बीच सत्ता और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी निभा रहे दमदार चेहरों की इच्छापूर्ति बेहद  कठिन काम है । नवागत अधिकारियों के लिए आने वाले विधानसभा चुनाव के अनुसार जनहित के निर्णय लेना बड़ी चुनौती होगा एक तरफ शहर की तमाम समस्याएं हैं दूसरी तरफ जनता की अपेक्षाएं इन सब के बीच आने वाले चुनाव कुल मिलाकर यह कांटों भरा ताज कहा जा सकता है । शहर की कानून व्यवस्था के क्या हाल हैं किसी से छुपा नहीं है यहां आए दिन लूट चोरी चैन स्नैचिंग  की घटनाएं आम बात है ।उधर दूसरी ओर शहर में बड़े पैमाने पर भू माफिया सक्रिय हैं अवैध अतिक्रमण करना सरकारी जमीनों पर कब्जे से जनमानस बेहाल है। नेताओं का संरक्षण प्राप्त बाहुबली यह सब करते हैं और नौकरशाही मूकदर्शक बनी रहती है ।कारण साफ है की चाहते हुए भी दबाव की राजनीति अफसरशाही पर हावी रहती है। बिगड़ैल यातायात व्यवस्था सेबी से भी ग्वालियर वासी प्रतिदिन परेशान दिखाई देते कई बार इसे सुधारने की प्रयास किए गए लेकिन परिणाम वही ढाक के दो पात। प्रमुख सड़कों से सिटी लिंक रोड का सही इस्तेमाल और दुकानदारों की मनमानी से बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों पर लगाम लगाना बेहद कठिन चुनौती कही जा सकती है इससे निपटने के लिए जनता के साथ मिलकर व्यापक कार्य योजना तैयार करना और उसे अमलीजामा पहनाना बेहद आवश्यक है।

स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार पिछड़ रहे ग्वालियर को चमकाने स्मार्ट सिटी के तमाम प्रोजेक्ट पर सुचारू और ठीक प्रकार से कार्य करने बर्बाद हो चुकी सड़कों का नवनर्माण ही बिजली पानी जैसी समस्याएं पैदा ना हो सरकारी योजनाओं का लाभ ठीक प्रकार से जनता को मिल सके और राजस्व बढ़ाने के लिए जनता पर सख्ती व प्रताड़ना के बजाए स्व जागरूक करने का काम भी कम परेशानी वाला नहीं होगा।

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