ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्वाधीनता के अमृत महोत्सव’ के तहत स्कूलों में सूर्य नमस्कार कराए जाने का विरोध किया है.

केंद्र सरकार ने देश के स्कूलों को निर्देश दिया है कि एक से सात जनवरी तक छात्रों को ‘सूर्य नमस्कार कराया जाए.’
‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ स्वतंत्रता के 75 साल के मौके पर मनाया जा रहा है.
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ‘सूर्य नमस्कार’ से जुड़े आदेश का विरोध करते हुए कहा है कि ‘मुस्लिम छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल होने से बचें क्योंकि सूर्य नमस्कार सूर्य की पूजा का एक रूप है.’
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी ने यह बयान जारी किया है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के मुताबिक़ हाल ही में कर्नाटक सरकार ने कॉलेजों और स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ कराने को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था जिस पर कई संस्थानों ने आरोप लगाया था कि यह सरकार की ‘भगवाकरण’ की योजना के तहत हो रहा है.
12 दिसंबर को जारी किए गए सर्कुलर में कहा गया था कि स्कूल मॉर्निंग असंबेली में ‘सूर्य नमस्कार’ कराएं और यह सुनिश्चित करें कि उसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हों. सर्कुलर में पहले कॉलेज को यह आदेश दिए गए थे लेकिन बाद में स्कूलों को भी इसमे शामिल करने को कहा.
सर्कुलर में कहा गया है कि यह तैयारी 26 जनवरी को होने वाले सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम के लिए है.
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर सरकार की योजना सूर्य नमस्कार पर कार्यक्रम आयोजित करने की है. अनुमान है कि इस विशाल कार्यक्रम में 7.5 लाख लोग भाग लेंगे.
कर्नाटक में कई लोग ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण भी इस कार्यक्रम पर नाराज़गी जता रहे हैं.