भोपाल से सुबोध अग्निहोत्री की रिपोर्ट
भोपाल।बिना मुख्य सचेतक और बिना नेता प्रतिपक्ष के कोंग्रेस राज्य सभा और चौबीस उप चुनाव लड़ने जा रही है।20 मार्च 2020 को सत्ता हाथ से जाने के बाद से कॉंग्रेस के झंडाबरदार अभी तक न तो नेता प्रतिपक्ष का चयन कर पाई है और न मुख्य सचेतक किसी को बना पाई है।अंदरखाने की खबर तो यह है कि कांग्रेस अभी भी यही मानकर चल रही है कि उनके नेता कमलनाथ हैं।जबकि ये बात लिखा पढ़ी में अभी तक विधानसभा सचिवालय में नही पहुंची है।जब सचिवालय में ही कांग्रेस विधयक दल कीओर से कोई पत्र नही पहुंचा तो न तो वहां किसी का नाम मुख्य सचेतक के रूप में है और न ही नेता प्रतिपक्ष के तौर पर।ऐसे में नेता प्रतिपक्ष को मिलने वाली सुविधाएं भी सचिवालय से किसी को नही मिल पा रही हैं।दूसरी ओर 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों पर होने जा रहे चुनाव को लेकर भी कांग्रेस गंभीर नहीं दिख रही है।न तो विधायकों से कोई बात करने वाला है और न ये बताने वाला कि राज्यसभा में कैसे मतदान करना है।इसी तरह पहिली बार इतनी बड़ी संख्या में होने जा रहे 24 उप चुनाव के लिए भी कोई धनी धोरी नही है।
कमलनाथ पर कमल भारी
वर्तमान परिदृश्य में कमलनाथ ही कांग्रेस हैं और उनके इर्द गिर्द भी उनके वही सिपहसालार हैं जो उनकी जय जय कार बोल रहे हैं।जब तक कमलनाथ निष्पक्ष भाव से सभी को विश्वास में लेकर काम नही करेंगे तब तक उप चुनावों में सफलता मिलना दूर की कौड़ी है।अभी जो हालात हैं उसके हिसाब से कमलनाथ पर कमलदल हावी है।क्योंकि भाजपा के पास अनुशासनात्मक संगठन है।वहीं कांग्रेस में जितने नेता उतनी बातें।कोई किसी के बंधन में नहीं।सब स्वतंत्र।ऐसे में कांग्रेस कितनी मजबूती से चुनाव लड़ पाएगी,यह समयही बताएगा।
पी के और आज तक करेंगे सर्वे
सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में होने जा रहे 24 उप चुनावों के लिए प्रत्याशियों को खोजने का काम प्रशांत किशोर और आज तक चेनल वाले करने जा रहे हैं।पता चला है कि लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये तो उम्मीदवारों के चयन पर कांग्रेस खर्च करने जा रही है।जबकि हकीकत यह है जब तक निचले कार्यकर्ताओं और इलाके के नेताओं को विश्वास में नही लिया जाएगा तब तक कितने भी सर्वे कमलनाथ करा लें सब फेल साबित होंगे।क्योंकि स्थानीय स्तर पर कौन मजबूत प्रत्याशी है और कौन कमजोर ।ये उनसे बेहतर कोई नही जानता।यदि मनमानी के चलते टिकिट वितरण हुआ तो हो सकता है कि चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस दो फाड़ हो जाये।
22 के बाद छह और
सूत्र बताते हैं कि22 के बाद कांग्रेस के छः और विधायक पार्टी से स्तीफा दे सकते हैं।कमलनाथ सरकार में उपेक्षित रहे इन छः विध्ययको के स्तीफा देने के बाद उप चुनाव में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन भी किसी काम नही आएगा।कांग्रेस को प्रदेश में पुनः सरकार बनाने के लिए 24 विधायकों की जरूरत है ।यदि सात निर्दलीय और सपा बसपा के जोड़ भी लें (जोकि अब कांग्रेस के पाले में जाना मुश्किल है) तो संख्या 99 होती है ।फिर भी कांग्रेस को 24 में से 17 विधायकों की जरूरत पड़ेगी।जोकि बहुत ही मुश्किल काम है।ऐसे में अब कांग्रेस के लिए सत्ता में सुख तो एक स्वप्न जैसा है।


