त्वरित टिप्पणी:प्रवीण दुबे
बिहार के चुनाव परिणाम उन भारत विरोधी शक्तियों के मुंह पर करारा तमाचा कहा जा सकता है जो भारत में हिन्दू वोटों को बांटकर सत्ता हथियाने के षड्यंत्र में लगे हैं,बिहार के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि हिन्दू वोट जाति,भाषा, वर्ग के आधार पर बटने वाला नहीं है और और पूरा देश अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुका है कि सनातन धर्म में सभी को समान अधिकार हैं केवल देश को तोड़ने और बाँटने वाली शक्तियां ऊंच नीच अगड़ा पिछड़ा जाति वर्ग आरक्षण आदि के नाम पर देश को तोड़कर उसका राजनितिक लाभ उठाना चाहती हैं। इन चुनाव परिणामों से बिहार की जनता ने अपने पडोसी राज्य के भगवाधारी मुख्यमंत्री के “बंटोगे तो कटोगे” के आव्हान पर जैसे पूरी तरह से अमल करके बहुत बड़ा संदेश दिया है। लिखने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होना चाहिए कि देश के दो प्रमुख और सबसे बड़े राज्यों उत्तरप्रदेश और बिहार से चली सनातन एकता की यह लहर आगे जाकर पूरे देश में बहुत भीषण आंधी के रूप में तब्दील होती दिखाई दे रही है। एक ऐसे राज्य के चुनावों में जहां कई दलों के बीच जबरदस्त वैचारिक मतभिन्नता के बीच कई कोणीय मुकाबला था वोटर ने बिना बंटे NDA को स्पष्ट ही नहीं प्रचंड बहुमत देकर बहुत सारे संदेश दिए हैं। सबसे बड़ा संदेश तो इस बात का है कि बिहार के लोग अब बाहरी ताकतों को सहन करने वाले नहीं हैं वोटर लिस्ट से बांग्लादेशी घुसपैठियों सहित फर्जी वोटरों के शुद्धिकरण अभियान को उसने अपना पूर्ण समर्थन दिया, चुनाव परिणामों ने बिहार की जनता की विकास पसंद सोच को भी व्यक्त किया है उसने लालटेन युग की समाप्ति करके बता दिया कि बिहार अब विकास के रास्ते पर बहुत ऊँची छलांग लगाने को तैयार है।बिहार चुनाव में अब तक सभी 243 सीटों पर रुझान सामने आए हैं. 11.30 बजे तक के अपडेट्स के अनुसार, महागठबंधन 50 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 64 कम है. जबकि एनडीए को 188 सीटों पर बढ़त के साथ सुनामी की ओर बढ़ रही है. सीटों के हिसाब से बीजेपी 84 सीटों और जदयू 73 सीटों पर आगे है. ऐसे में बीजेपी और जदयू में ही सबसे बड़ी पार्टी बनने की रेस चल रही है. पिछले चुनाव में बीजेपी और राजद के बीच सबसे बड़ी पार्टी बनने की रेस थी. राजद 74 सीटों के साथ सिर्फ एक सीट के अंतर से सबसे बड़ा दल बनी थी. बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी. राजद इस बार सिर्फ 36 सीटों पर आगे है.
विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा और जदयू ने 101-101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा।वहीं, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने 6-6 सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे।बिहार विधानसभा परिणाम की कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनने बहुतों को आश्चर्यचकित भी किया है सबसे बड़ी बात तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना है चुनाव से पहले बड़बोली बातें कर रहे राहुल गांधी को बिहारियों ने जैसे पिक्चर से ही गायब कर दिया है,वामपंथी दलों का भी सूपड़ा साफ हो गया है कई बाहुबली और नामचीन चेहरे जमीदोज हो गए इन सबके बीच चिराग पासवान की पार्टी की बम्पर सफलता के चलते वे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि उनका पिछले चुनावों में स्ट्राइक रेट सौ फीसदी रहा है और वे इसे सच करते दिख रहे हैं खैर इन सबके बीच दिल्ली भाजपा मुख्यालय से ढोल नगाड़ों के साथ रसगुल्ले और लड्डू की महक आना शुरू हो गई है।