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भय बिनु होइ न प्रीति, देश जितना ताकतवर होगा हम उतने सुरक्षित होंगे

भय बिनु होइ न प्रीति, देश जितना ताकतवर होगा हम उतने सुरक्षित होंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन के पश्चात अपना सम्बोधन भी दिया उन्होंने कहा, “भगवान राम भी मानते हैं कि भय बिनु होइ न प्रीति यानी बिना डर के प्रेम नहीं होता है. इसलिए हमारा देश जितना अधिक ताक़तवर होगा, हम उतने ही सुरक्षित और भयमुक्त होंगे.”

उन्होंने लोगों से कोरोना के दौर में देशवासियों से श्रीराम की मर्यादा के रास्ते पर चलने की अपील की. उन्होंने लोगों से मास्क लगाने और शारीरिक दूरी बनाए रखने की अपील की

राम अनेकता में एकता के प्रतीक हैं

प्रधानमंत्री ने कहा राम अनेकता में एकता के प्रतीक हैं. सब राम के हैं, राम सबके हैं तुलसी के राम सगुण राम हैं. नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं. आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के रघुपति राम हैं. तमिल, मलयालम, बांग्ला, कश्मीर, पंजाबी में राम हैं।

अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश हुई लेकिन राम हमारे मन में बसे हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि राम भारतीय संस्कृति का आधार राम हैं.उन्होंने कहा, “कोई काम करना हो तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं. आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए. इमारतें नष्ट हो गईं. क्या कुछ नहीं हुआ. अस्तित्व मिटाने का हर प्रयास हुआ, लेकिन राम आज हमारे मन में बसे हैं. हमारी संस्कृति के आधार हैं.

देशवासियों ने शांतिपूर्ण और मर्यादापूर्वक व्यवहार किया

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों के संयमित और शांतिपूर्ण व्यवहार की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, ”जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले में अपना फ़ैसला सुनाया था तब समस्त देशवासियों ने शांतिपूर्वक और मर्यादा में रहते हुए व्यवहार किया था. आज कोरोना के दौर में भूमिपूजन के समय भी हमें यही मर्यादा देखने को मिल रही है.”

प्रधानमंत्री ने कहा,“श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा. हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा. यह मंदिर करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक भी बनेगा. यह आने वाली पीढ़ियों को साधना और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा.

टूटने और फिर खड़े होने से मुक्त हुई राम जन्मभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “रामलला पिछले कई वर्षों से टेंट में रह रहे थे. टूटना और फिर खड़ा होना, सदियों से जारी इस क्रम से राम जन्मभूमि आज मुक्ति हुई है. इस मौके पर मैं 130 करोड़ देशवासियों को नमन करता हूं.

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन की शुरुआत में सुंदरकांड की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, “मुझे तो यहां आना ही था क्योंकि राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम.” इस पंक्ति का अर्थ है- भगवान राम का काम किए बना मुझे आराम कहां मिलेग

‘जय सियाराम’ कहकर प्रधानमंत्री ने की संबोधन की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय सियाराम’ और ‘जय श्रीराम’ कहकर अपने संबोधन की शुरुआत की. इससे पहले उन्होंने डिजिटल बटन दबाकर शिलापट्ट का उद्घाटन किया और राम मंदिर की डाक टिकट जारी  किया।

देशवासियों ने शांतिपूर्ण और मर्यादापूर्वक व्यवहार किया: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों के संयमित और शांतिपूर्ण व्यवहार की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, ”जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले में अपना फ़ैसला सुनाया था तब समस्त देशवासियों ने शांतिपूर्वक और मर्यादा में रहते हुए व्यवहार किया था. आज कोरोना के दौर में भूमिपूजन के समय भी हमें यही मर्यादा देखने को मिल रही है.”

प्रधानमंत्री ने कहा,“श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा. हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा. यह मंदिर करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का प्रतीक भी बनेगा. यह आने वाली पीढ़ियों को साधना और संकल्प

आडवाणी जी आ नहीं सके, घर में बैठकर ये कार्यक्रम देख रहे होंगे: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मंच से अपने संबोधन में कहा कि कोरोना संक्रमण और अन्य कारणों की वजह से राममंदिर आंदोलन से जुड़े कई लोग कार्यक्रम में नहीं सके.

उन्होंने कहा, “आडवाणी जी यहां नहीं आ सके लेकिन वो घर से बैठकर ये सारा कार्यक्रम देख रहे होंगे. हालात ऐसे हैं कि कुछ लोगों को बुलाया नहीं जा सका और कुछ आ नहीं सके. मगर इसके बावजूद आज पूरा देश आनंद में डूबा है.”

लोकतांत्रिक और संविधान सम्मत तरीके से संपन्न हुआ संघर्ष: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से राम मंदिर की आधारशिला रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया.

उन्होंने कहा, “500 वर्षों का लंबा और कड़ा संघर्ष अब लोकतांत्रिक और संविधान सम्मत तरीके से संपन्न हुआ।

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