सम्पादकीय
आजकल कोरोना महामारी को लेकर मध्यप्रदेश के सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं पर यह चौपाई बिल्कुल सटीक बैठती है। यूँ तो मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री से लेकर अनेक प्रशासनिक अधिकारी मंत्री आदि कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, बचाव के लिए प्रदेश के गृहमंत्री ने हर रविवार का लॉक डाउन घोषित कर रखा है,सरकारी दफ्तरों में पूरी क्षमता के साथ कर्मचारियों की उपस्थिति पर पाबंदी है,सभी शिक्षा संस्थान बन्द है,सभी बड़े सार्वजनिक समारोहों पर रोक है,अंतिम संस्कार में केवल 20 व विवाह समारोह में 50 लोगों की ही छूट दी गई है,सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क अनिवार्य है न मानने पर चालान व जुर्माने का प्रावधान कड़ाई से लागू है,तमाम कोरोना स्क्वाड से जुड़ी गाड़ियां इसके लिए सड़कों पर दौड़ रही हैं। बावजूद इसके ऐसा लगता है इन सारी बातों नियम कानून से हमारा सत्ताधारी दल पूरी तरह से अछूता है। आजकल ग्वालियर अंचल के तमाम वाशिंदों के बीच कुछ यही चर्चा है,अब तो सोशल मीडिया पर भी लोग गुस्से का प्रगटीकरण कर रहे हैं । इस गुस्से का कारण है भाजपा द्वारा शनिवार 22 अगस्त से ग्वालियर अंचल में तीन दिनों तक आयोजित महासदस्यता अभियान समारोह ,पार्टी ने इसके लिए जो विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है वह वास्तव में इस कोरोना संकटकाल को देखते हुए परेशान कर देने वाला है। तीन दिवसीय इस आयोजन में ग्वालियर मुरैना भिंड आदि जिलों में महासदस्यता के लिए बड़े समारोह तय हैं। कहा जा रहा है इन आयोजनों में हजारों की संख्या में भाजपा जॉयन करने वालों को सदस्यता दिलाई जाएगी। यह कार्यक्रम दो कारणों के चलते बहुत भव्य व जनता को आकर्षित करने वाले बन गए हैं। पहला कारण यह की ग्वालियर अंचल में महाराज की लोकप्रिय छवि रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने के बाद पहली बार अपने गृहनगर आ रहे हैं । दूसरा कारण यह की इन आयोजनों में मध्यप्रदेश में सत्ता व संगठन से जुड़ा भाजपा का मूल नेतृत्व उपस्थित रहने वाला है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है की ऐसे समय जब कोरोना महामारी से बचाव को लेकर सरकार द्वारा ही तमाम एडवायजरी जारी की गई हैं इस तरह के भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना क्या उचित है ? हालांकि आयोजक भारतीय जनता पार्टी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कार्यक्रम की बात कही है लेकिन बड़ा संशय यह है की हजारों की संख्या में जुटने वाली कार्यकर्ताओं की भीड़ में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे सम्भव हो पाएगा हाल ही में उज्जैन में आयोजित हुए ज्योतिरादित्य के कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग धरी की धरी रह गई थी। प्रदेश में भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही ने पिछ्ले एक दो माह में कोरोना एडवायजरी की जमकर अवहेलना की यही वजह रही की दोनों ही दलों के तमाम बड़े छोटे नेता कोरोना संक्रमण की चपेट में आये खुद मुख्यमंत्री भी कोरोना पॉसिटिव हुए । आश्चर्य का विषय है की इतना होने के बावजूद ग्वालियर अंचल में लगातार तीन दिनों तक भीड़भाड़ वाले आयोजन करने का निर्णय लिया गया। बड़ी बात तो यह है की कोरोना एडवायजरी लागू कराने के लिए जो पुलिस प्रशासन ग्वालियर में कोरोना स्क्वाड चलाकर जनता पर सख्ती करता दिखाई देता है वह प्रशासन इतने बड़े आयोजन को सफल कराने की व्यवस्था में जुटा दिखाई दे रहा है। आखिर मुख्यमंत्री खुद जो आ रहे हैं।
