प्रवीण दुबे
ग्वालियर में भाजपा के दो प्रमुख गुटों—ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के बीच कोल्ड वॉर तेज हो गया है। सिंधिया की विकास बैठक में तोमर गुट के सांसद भारत सिंह कुशवाहा की अनुपस्थिति ने गुटबाजी को फिर उजागर कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी में ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह और गुना शिवपुरी से सांसद तथा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच वर्चस्व की लड़ाई थमने का नाम ही नहीं ले रही है इसका ताजा उदाहरण आज फिर सामने आया है। इसमें ग्वालियर के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक को श्री सिंधिया सम्पादित करते दिखाई दिए लेकिन स्थानीय सांसद भारत सिंह ने इस बैठक से दूरी बना ली,आश्चर्य का विषय तो यह है कि श्री भारत सिंह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा शिवपुरी में बैठक लेते दिखाई दिए हैं।
इससे पूर्व 15 सितंबर को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर और मुरैना क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिए थे।
श्री सिंधिया की ग्वालियर में यह सक्रीयता उस वक़्त सामने आई थी जब मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों ने ग्वालियर की सड़कों के गड्ढे और विकास की दुर्दशा को लेकर मुख्यमंत्री के सामने बात रखी थी, वह असामान्य घटना के रूप में अंकित हो गई थी।
उसके दो-चार दिन में ही केंद्रीय मंत्री सिंधिया द्वारा ग्वालियर में विकास कार्यों को लेकर ली गई बैठक चर्चा में बनी रही। बड़ी बात यह है कि सिंधिया द्वारा ली गई बैठक में सांसद भारत सिंह कुशवाहा मौजूद नहीं रहे थे। इसके साथ ही नगर निगम के सभापति मनोज तोमर भी मौजूद नहीं रहे थे। सांसद ने अपनी तरफ से इतना जरूर कहा कि वे दिल्ली में ग्वालियर के विकास को लेकर व्यस्त थे।
इसके पहले जब सांसद भारत सिंह ने बैठक ली थी तो सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और सिंधिया समर्थक विधायक मौजूद नहीं थे। सिंधिया तीन दिन तक ग्वालियर और मुरैना क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। कई नेताओं को इस बात पर आपत्ति थी कि सिंधिया ना तो ग्वालियर-मुरैना के सांसद हैं और ना विधायक, फिर ऐसे में उनका ग्वालियर में सरकारी बैठक लेना, सक्रियता बढ़ाना, कहां तक उचित है। उस समय यह भी बात आई थी कि केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद ही सिंधिया ने ग्वालियर में विकास की बैठक ली है और केंद्रीय नेतृत्व शीघ्र ही इस तनातनी का समाप्त करा देगा।
लेकिन अब आज पुनः सिंधिया का ग्वालियर में विकास बैठक लेना और स्थानीय सांसद द्वारा उसके बहिष्कार से वर्चस्व की जंग फिर सड़कों पर आ गई है।
ग्वालियर में चल रहे घटनाक्रम को लेकर शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री क्या करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
कांग्रेस ने कसा तंज
भाजपा के भीतर ग्वालियर में सिंधिया और सांसद भारत सिंह के बीच छिढ़ी वर्चस्व की जंग पर कांग्रेस ने निशाना साधा है।
प्रदेश प्रवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने कहा है कि
ग्वालियर-चंबल भाजपा की गुटबाज़ी और अफसरशाही की भेंट चढ़ गया है,
22 साल की सत्ता, फिर भी ग्वालियर में नर्क जैसे हालात हैं यहां विकास नहीं, सिर्फ बैठकों और गुटबाज़ी का खेल चल रहा है
शर्मा ने कहा कि ग्वालियर-चंबल अंचल आज बदहाली और अव्यवस्था का शिकार है। भाजपा को सत्ता में बैठे 22 साल हो चुके हैं, लेकिन जनता को विकास के बजाय बैठकों और गुटबाज़ी का तमाशा परोसा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की वर्तमान स्थिति की पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार और अफसरशाही पर है।
शर्मा ने आरोप लगाया कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाहा ग्वालियर की बजाय शिवपुरी में बैठक कर रहे हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर में अलग बैठक कर रहे हैं। सवाल यह है कि यह कैसी समीक्षा बैठक है जिसमें स्थानीय सांसद ही नदारद हैं और जनता की समस्याओं से इसका कोई सरोकार नहीं है। भाजपा की राजनीति अब केवल दिखावे और गुटबाज़ी तक सीमित रह गई है, जहां जनता की उम्मीदें और विकास की ज़रूरतें ताक पर रख दी गई हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि खुद भाजपा के कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर मान चुके हैं कि ग्वालियर की हालत “नर्क” जैसी है। टूटी सड़कों से लेकर गंदगी, जल संकट और बेरोजगारी तक हर मुद्दे पर भाजपा सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। महंगाई और भ्रष्टाचार ने जनता का जीना मुश्किल कर दिया है, लेकिन भाजपा नेताओं की प्राथमिकता जनता की तकलीफें नहीं बल्कि अपने-अपने गुटों की ताकत दिखाना है।
उन्होंने कहा कि अफसरशाही का आलम यह है कि प्रशासन जनता की आवाज़ सुनने के बजाय नेताओं की चापलूसी और अपने स्वार्थ में डूबा हुआ है। भ्रष्टाचार खुलेआम हो रहा है, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती और अफसर जनता के बजाय नेताओं की कृपा पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि ग्वालियर-चंबल के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
धर्मेंद्र शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर 22 साल के शासन का हिसाब कौन देगा? उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने शासन में न कोई बड़ा उद्योग लगाया, न युवाओं को रोजगार दिया और न ही नागरिक सुविधाओं में सुधार किया। भाजपा नेताओं की प्राथमिकता सिर्फ बैठकों और समीक्षाओं तक ही सीमित रही, जबकि धरातल पर नतीजा जनता के लिए सिर्फ निराशा और अव्यवस्था रहा।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धर्मेन्द्र शर्मा ने कहा, “ग्वालियर-चंबल भाजपा की गुटबाज़ी और अफसरशाही की भेंट चढ़ चुका है। जनता ने 22 साल तक भाजपा को मौका दिया लेकिन नतीजा सिर्फ निराशा, भ्रष्टाचार और बदहाली के रूप में सामने आया। अब जनता भाजपा से सवाल पूछ रही है कि उसका अंचल विकास की बजाय गुटबाज़ी और अफसरशाही की राजनीति में क्यों झोंक दिया गया। वक्त आ गया है कि ग्वालियर-चंबल को सच्चे मायनों में विकास देने वाली राजनीति को आगे लाया जाए।”