Homeमध्यप्रदेशभाजपा में महापौर व पार्षद बनने के लिए मुंगेरीलाल के हसीन सपने...

भाजपा में महापौर व पार्षद बनने के लिए मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा माहौल, बढ़ी पार्टी हाईकमान की सिरदर्दी

 तमाम दावेदारों के कारण मंडल और प्रदेश कार्यकारिणी घोषित नहीं कर पा रही भारतीय जनता पार्टी के लिए अब  66 वार्डों के लिए पार्षद व महापौर का टिकिट चयन भी सिरदर्द बन सकता है। यह आशंका इस कारण व्यक्त की जा रही है क्योंकि जैसे ही महापौर का पद सामान्य वर्ग की महिला हेतु आरक्षित घोषित हुआ पार्टी से जुड़ी दर्जनों महिलाओं के नाम  दावेदारी में सामने आ गए हैं। यही हालत प्रत्येक वार्ड में पार्षद टिकिट के दावेदारों का भी है। आश्चर्यजनक बात यह भी है की सामान्य वर्ग की महिला और पुरुष के लिए घोषित हो चुके वार्डों व महापौर पद पर भी बड़ी संख्या में आरक्षित श्रेणी के दावेदार टिकिट की दौड़ में कूदते दिख रहे हैं इस वजह से जहां पार्टी के लिए परेशानी बढ़ती दिख रही है वहीं दबी जुबान भीतर ही भीतर सामान्य वर्ग में असंतोष भी देखने को मिल रहा है।

नगरीय निकाय चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही अब कभी भी इन चुनावों की तारीख घोषित हो सकती है। इसी वजह से अब चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के बीच बेचैनी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मारामारी सत्ताधारी दल भाजपा में देखी जा सकती है। आलम यह है की एक एक वार्ड से दो से तीन दर्जन तक नाम उछलते दिख रहे हैं। उधर महापौर पद हेतु तो स्थिति बेहद चौकानें वाली नजर आ रही है। उल्लेखनीय है की ग्वालियर का महापौर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित घोषित हो चुका है।  जैसे ही इसकी घोषणा हुई चंद मिनटों के बाद ही दर्जनों महिलाओं के नाम सोशल मीडिया पर दौड़ते दिखाई देने लगे।  इस दौड़ में जहां तमाम महिला नेत्रियां दिखाई दी वहीं पार्टी के तमाम नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने बेझिझक अपनी पत्नियों के नाम की दावेदारी कर दी। इस दावेदारी में इस बात का ख्याल भी नहीं किया। गया की महापौर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। इसके लिए 

लिए सबसे पहला नाम पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद माया सिंह का चला है। वह पहले उप महापौर भी रह चुकीं हंै। वैसे यह पद उनके लिए दो वजह से पूरी तरह उपयुक्त नहीं माना जा रहा पहला कारण वे इससे उच्च पदों पर रह चुकी है दूसरा कारण उनका जातिगत फैक्टर है हालांकि अभी इसको लेकर जानकारी पूरी तरह पुष्ट न होने से असमंजस बरकरार है।

 इसके अलावा पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का नाम भी है, लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से बागी होकर ग्वालियर दक्षिण से निर्दलीय चुनाव लडऩा उनके लिए टेड़ी खीर बन सकता है। यद्यपि वह भाजपा में आ चुकी है। उन्हें वर्ष 2009 में पिछड़ा वर्ग महिला होने के कारण महापौर का टिकट मिला था। यहां भी जातिगत फैक्टर उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

भाजपा में पार्षद एवं राज्य महिला आयोग की सदस्य रही प्रमिला वाजपेयी, महिला मोर्चा की अध्यक्ष खुशबू गुप्ता, पूर्व पार्षद एवं एमआईसी सदस्य नीलिमा शिंदे, पूर्व पार्षद डॉ.अंजली रायजादा,पूर्व पार्षद एवं एमआईसी सदस्य हेमलता रामेश्वर भदौरिया, भाजपा की प्रदेश मंत्री सुमन शर्मा, अर्पणा पाटिल, प्रदेश भाजपा की मीडिया वार्ताकार नीरु सिंह ज्ञानी,महिला मोर्चा पदाधिकारी व्यंजना मिश्रा कांग्रेस से भाजपा में आई पूर्व पार्षद कमलेश कौरव, महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद मधु भारद्वाज, पूर्व पार्षद करुणा स्वतंत्र सक्सैना, पूर्व पार्षद विनती शर्मा के नाम सोशल मीडिया पर उभरे है। इसके अलावा एमआईसी सदस्य रहे सतीश बोहरे एवं धर्मेन्द्र तोमर गुड्डू के परिवार की महिलाओं के नाम भी सामने आए है

उधर इस बात की चर्चा भी प्रबल है की कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे और पूर्व महापौर विवेक शेजवलकर की पत्नी नीलिमा शेजवलकर के नाम भी दौड़ में सामने आ सकते हैं हालांकि अभी केवल जनता के बीच ही इन नामों की चर्चा है। ऐसा माना जा रहा है की पार्टी व संगठन यदि इनपर हरी झंडी देगा तभी अधिकृत रूप से इनपर चर्चा होगी।
यह तो थी महापौर पद के दावेदारों की सिरदर्दी लेकिन 66 वार्डों में पार्षदों का टिकट तय करना भाजपा के लिए इससे बड़ी परेशानी बनने वाली है । सूत्रों का कहना है की प्रदेश पार्टी नेतृत्व ने इसपर मंथन प्रारम्भ कर दिया है। पार्टी वरिष्ठ नेताओं का एक पैनल या समिति बनाकर रायशुमारी की योजना पर काम कर रही है। डेमेज कंट्रोल और अनुशासन कैसे कायम हो इसके लिए भी जिम्मेदारी निर्धारित की जा रही है। 
पार्टी के सामने एक चुनौती ज्योतिरादित्य  सिंधिया के समर्थकों को भी सन्तुष्ट करने की है। निचले स्तर पर इनकी अच्छी खासी संख्या है। 
सूत्रों का कहना है की इन छोटे चुनावों में अपने समर्थकों की दावेदारी को पुष्ट करने हेतु   ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अंकुर मोदी केशव पांडेय जैसे कुछ नजदीकी लोगों को जिमेदारी दिए जाने की रणनीति पर काम चल रहा है। 
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments