एक पुराने गाने की पंक्तियां आज बहुत याद आ रही हैं
सब कुछ लुटाके होश में आए तो क्या किया
दिन में अगर चिराग जलाए तो क्या किया
पिछले एक पखवाड़े से भी अधिक समय से लूटमार ,कालाबाजारी और ठगी में जुटे मध्यप्रदेश के तमाम निजी अस्पतालों को लेकर अब प्रदेश सरकार हरकत में आई है। मध्यप्रदेश के चीकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग आज पत्रकारों को ऊंची आवाज में बता रहे थे मरीजों से अनाप-शनाप बिल वसूलने की शिकायत मिलने पर प्रदेश के 72 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसमें से 35 अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं ऐसे अस्पतालों से अब तक 15 लाख 97 हजार रुपए मरीजों के परिवार वालों को वापस दिलवाए गए हैं। बहुत अच्छी बात है
मंत्री महोदय जब जागो तभी सवेरा है। लेकिन यह भी मत भूलो की यह जीवन और मौत का खेला है। आखिर आपने जागने में इतनी देर क्यों कर दी ?
आज किसी के पिता किसी की पत्नी किसी की मां और किसी का पुत्र किसी की बहिन किसी का भाई आप से पूछ रहा है की आपके मध्यप्रदेश में जहां आपकी सरकार है डॉक्टरी के वेश में ये डकैत ये लुटेरे ,ये ठग कैसे फलते फूलते रहे ?
आपको पता ही नहीं चला , इन बड़े बड़े अट्टालिकाओं जैसे अस्पतालों में रेमेडिसिवर इंजेक्शन को लेकर जो ठगी की जाती रही उसने सारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
इन्ही अस्पतालों में आपकी अपनी भोली भाली जनता दर्द से तड़फती रही और इन अस्पतालों में दो हजार के इंजेक्शन की 20 हजार कीमत वसूली जाती रही इतना ही नहीं आपके प्रशासन आपके प्रभारियों से ये अस्पताल रेमेडिसिवर वसूलते रहे और कालाबाजारी चलती रही।
नकली इंजेक्शन लगाकर भी जेबें भरी जाती रहीं। यह बात हम नहीं लिख रहे भाजपा के कई वरिष्ठ नेता यहां तक की पूर्वमंत्री तक ने चिल्ला चिल्लाकर यह आरोप लगाए हैं।
आपकी ही पार्टी के एक पूर्व जिलाध्यक्ष तो कोविड प्रभारी मंत्री के बंगले के बाहर आधी रात को जाकर लेट गए क्यों कि भाजपा के ही पांच कार्यकर्ताओं को मांगने के बावजूद रेमेडिसिवर इंजेक्शन नहीं मिले,एक की मां तो चल बसी।
यही हाल ICU का,यही हाल बेड का,यही हाल ऑक्सीजन का और यही हाल एम्बुलेंस से लेकर कोविड जांच का।
आपने बड़े जोर शोर से जानकारी दी है की जनता के साथ हेर फेर करने वाले अस्पतालों से अब तक 15 लाख 97 हज़ार रुपए की वसूली करके उन्हें मरीजों को वापस दिलाया गया है। कैसा मजाक है यह अगर आप 15 लाख की जगह 15 करोड़ की वापसी की बात भी करते तो यह भी कम कही जाती।
प्रदेश के सैकड़ों निजी अस्पतालों ने कोविड के नाम पर जीवन और मौत से बेहाल जनता से करोड़ों की ठगी की है,न जाने कितने परिवार
बर्बाद हो गए न जाने कितनों के घर जेबर सब बिक गए।
इन लुटेरों की एक छोटी सी बानगी शनिवार को ग्वालियर के बिड़ला अस्पताल में सामने आई यहां पति पत्नि दोनों के मरने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन का मन नहीं भरा बाद में कांग्रेस विधायक व आपकी ही पार्टी के एक पूर्व विधायक ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई तब उसने 7 लाख रुपए वापस कर मरने वाले की लाश सौंपी । जरा सोचिए जब एक अस्पताल 7 लाख वापस कर रहा है तो 15 लाख की क्या बिसात है।
मंत्री जी यह करोड़ों का खेल है। मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे तमाम अस्पतालों को मरीजों की सेवा के लिए गठित ट्रस्टों के लिए अपनी करोड़ों की जमीनें दान में दी हैं। आखिर कौन सी सेवा कर रहे हैं यह अस्पताल । कोरोनकाल की भीषण महामारी के वक्त में भी यह जनता की लाशों पर व्यापार करने का गोरखधंधा कर रहे हैं।
इन अस्पतालों को नोटिस देकर या मामूली वसूली करके इतिश्री नहीं करनी चाहिए । इनके खिलाफ इतनी सख्त से सख्त कार्यवाही होना चाहिए की आगे से कोई भी निजी चिकित्सालय जनता के साथ ठगी करने की हिम्मत न कर सके।