ग्वालियर /एक तरफ मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव को लेकर चुनाव प्रचार चरम पर जा पहुंचा है तो दूसरी ओर आम मतदाता इस उपचुनाव को लेकर उत्साहहीन नजर आ रहा है।इस उपचुनाव की 28 में से सर्वाधिक 16 सीटें ग्वालियर चम्बल अंचल से हैं। हमारे प्रतिनिधि ने उपचुनाव के बारे में यहां के कुछ मतदाताओं का मन टटोलने की कोशिश की तो तो विशेष रूप से दो बातें सामने निकलकर आईं पहली बात यह की मतदाता इस बात को पचानहीँ पा रहा है की कोरोना संकटकाल में दो पार्टियों की आपसी वर्चस्व की लड़ाई के चलते यह चुनाव जबरदस्ती उनपर थोपा गया है जबकि एक दल ने तो चुनाव लड़ने वाले चेहरे वही हैं केवल दल बदल गया है। दूसरी बात जो मतदाताओं को सर्वाधिक परेशान करती दिखाई दे रही है वह है कमर तोड़ महंगाई। मतदाता इस बात से सर्वाधिक नाराज दिख रहा है की चुनाव में ताल ठोक रहे दोनों दलों के नेता आपसी द्वंद में तो उलझे हैं लेकिन महंगाई की चर्चा पूरी तरह से गायब है। एक मतदाता देवेश सिंह ने कहा की अब तो डाल रोटी भी बेहद महंगी हो चली है। थाली से सब्जी तो पूरी तरह गायब है। एक अन्य मतदाता रामू काका ने कहा अरहर की दाल के भाव में लगातार अनिश्चितता का आलम बना हुआ है। दाल फुटकर मंडी में 116 से 118 रुपये किलो तक पहुंच गई है। दूसरी किस्म 110 से 112 रुपये किलो बिक रही है। वहीं प्याज ने भी रुलाना शुरू कर दिया है। प्याज की कीमत 50 से 60 किलो तक पहुंच गई है। उड़द दाल की कीमतों में भी अभी गिरावट नहीं आई है।
महंगाई से तनाव में दिख रही सावित्री बहन के माथे पर तो चुनाव का नाम लेते ही गुस्सा की लकीरें खिंच गईं। वे कहती हैं की महंगाई ने तो कमर तोड़ कर रख दी है खाने की जुगाड़ की सोचे की वोट देखें । वे कहती हैं आलू जैसी सब्जी जो हर किसी की आवश्यकता है। 50 – 60 रुपये किलो बिक रही है,डाल 125 के पार है। नेता इसपर चर्चा नहीं कर रहे।
उल्लेखनीय है की कोरोनाकाल मे पहले ही लोगों को परेशान कर रखा है. किसी के पास ना तो काम बचा है और ना आमदनी का कोई अच्छा साधन. वहीं अब महंगाई ने लोगों को जेब पर भार डाल दिया है.
आसमान छूती महंगाई ने एक ओर जहां कम आयवालों की कमर तोड़ दी है, वहीं मीडियम क्लास के परिवारों का बजट गड़बड़ा गया है। जोड़-तोड़ कर घर का बजट बना रहे हैं, पर हर कटौती के बाद भी पानी सिर से ऊपर हो जा रहा है।ड्पिछले एक महीने के दौरान जरूरी वस्तुओं के दामों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। गरीबों के तो निवालों पर भी आफत आ गयी है। मंहगाई से कराह रहा आम आदमी सरकार को कोस रहा है। पिछले एक माह के दौरान उसना दाल की कीमत में तो तीस रुपये तक की वृद्धि हुई है। सरसो तेल में 15 रुपये तक की वृद्धि है। साबुन, चाय, सर्फ, चीनी आदि की कीमतों में तो हर माह एक से डेढ़ रुपये तक की बढ़ोत्तरी हो रही है। इसमें दुकानदार चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। इधर आमजन महंगाई की मार से कराह रहा है। अन्य चीजों के अलावा प्याज और सब्जियों के दामों में आए उछाल से भी गरीब तबका चिंता में डूबा है। महंगाई के इस दौर में दिहाड़ी लगाकर परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने के साथ ही अन्य तरह के खर्चों को चलाना इन लोगों के लिए टेडी खीर बन गया है। गरीब तबके से संबंध रखने वाले लोगों के अलावा जिला के सामाजिक संगठन एवं बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि सरकार की मिली-जुली साजिश से कंपनियां चुपके-चुपके रसोई गैस, पेट्रोल एवं डीजल के साथ अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। लिहाजा आसमान छू रही वस्तुओं की कीमतों से आम जन का दिवाला निकलने लगा है। दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हर चीज की दरों से गरीब लोगों को परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। गरीब लोग हर माह बढ़ रहे खाने के सामान के बढ़ते दाम व अन्य तरह के बोझ तले पिसने लगा है। इससे बाहर आने के लिए कोई रास्ता न देख गरीब आत्महत्या का मार्ग देखने लगा है। रसोई गैस, सहित अन्य तरह की रोजमर्रा की वस्तुओं में हर रोज हो रही बढ़ोतरी से परेशान मध्यम एवं लोअर तबके से संबंध रखने वाला आम जनमानस रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों में कटौती की डिमांड कर रहा है, ताकि महंगाई के चलते उन्हें मानसिक परेशानियां न झेलनी पड़े। लोगों ने सरकार से बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाकर राहत प्रदान करने की अपील की है।
गिर सकता है मतदान प्रतिशत
बढ़ती महंगाई से परेशान आम मतदाता का मिजाज पूरी तरह बिगड़ा हुआ है। एक तरफ कोरोनाकाल की परेशानियों से वो जूझ रहा है तो दूसरी ओर आलू प्याज डाल चावल आटे जैसी तमाम रोजमर्रा की वस्तुओं के आसमान छूते दाम उसे नों नों आंसू रोने को मजबूर कर रहे हैं। इस मानसिक संताप के समय नेताओं का चुनावी शोरगुल उसके गुस्से को और बढ़ा रहा है खासकर मध्यम आय वर्ग और गरीब वर्ग । इसे देखकर निःसन्देह यह कहा जा सकता है की इसका असर उपचुनाव के मतदान प्रतिशत को प्रभावित कर सकता है। यह बेहद चिंता का विषय है।