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मुख्य यजमान बन नो दिनों तक रामकथा की रसधार का रसपान कर बोले तोमर आत्मिक ताकत देती है रामकथा

*मुरार में श्रीराम कथा-अंतिम दिन*
*राष्ट्रसंत कनकेश्वरी ने कहा-*
*मनुष्य अस्तित्व के आधार को नष्ट न करें*
*राष्ट्र की सेवा ही राम की सेवा*
*मानव की आत्मिक ताकत अध्यात्म से*
*बढ़ती है-तोमर*
ग्वालियर, 15 अक्टूबर.
माँ कनकेश्वरी देवी भक्ति योग वेदांत सेवा संघ के तत्वाधान में मुरार के श्रीरामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा के आज अंतिम दिन राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी ने नियमित गुरुवंदना के बाद कहा कि-
भगवान की कथा का आधार भगवत चिंतन है, लेकिन आज मनुष्य अपने अस्तित्व के आधार को नष्ट कर रहा है. जल, नदी और वृक्षों को नष्ट किया जा रहा है, जिसके कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है.जीवन में सत्संग का आधार प्राप्त ना होने के कारण ऐसा होता है. इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अस्तित्व के आधार को नष्ट न करे और ना नष्ट होने दे.
उन्होंने कहा-राम ने शबरी को सदगुरू माना है. शबरी ने राम से कहा था *-‘आगे बढ़ो’*,
*’पंपा सरहि जाहु रघुराई* ।
*तहँ होइहि सुग्रीव मिताई* ।।
*सो सब कहिहि देव रघुबीरा* । *जानतहूँ पूछहु मतिधीरा* ।।
हे रघुनाथ जी, आप पंपा नामक सरोवर को जाइये, वहाँ आपकी सुग्रीव से मित्रता होगी, वह सब हाल बतायेगा. आप सब जानते हुए भी मुझसे पूछते हो.
माँ कनकेश्वरी ने कहा-गुरु कभी नहीं कहेगा कि उसके पास योग्य बनकर आओ. उन्होंने उदाहारण देकर समझाया कि *’गंगा कभी नहीं कहेगी कि स्नान करके आओ’* ? अयोग्यता को स्वीकार करके ही गुरु की शरण में जाना है. उन्होंने अन्य उदाहरण देते हुए कहा कि-जिस प्रकार डाँक्टर मरीज को देखकर बता देता है कि वह ठीक हो सकता है कि नहीं ? ठीक उसी प्रकार सदगुरू बता देते हैं कि अमुक व्यक्ति का कल्याण होगा अथवा नहीं ? इसलिए गुरु के चरणों पर आश्रित रहनेवाला व्यक्ति यशस्वी होता है.
किष्किंधाकाण्ड पर प्रकाश डालते हुए कहती हैं कि यहाँ पर जो भी रहते हैं, वे सब बंदर हैं, यह बंदरों की नगरी है. श्रीराम जी से हनुमानजी का मिलना, सुग्रीव से मित्रता, बालि-सुग्रीव युद्ध में बालि के मारे जाने के बाद हनुमानजी सीता जी की खोज में लंका जाते हैं. यहाँ से सुंदरकांड की शुरुआत होती है. श्री हनुमानजी का लंका में प्रवेश होता है.विभीषण और त्रिजटा से संवाद के बाद हनुमानजी अशोकवाटिका में प्रवेश करते हैं.
*’कपि करि हृदयँ विचार दीन्हि मुद्रिका डारि तब*।
*जनु अशोक अंगार दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ* ।
हनुमानजी के द्धारा डाली गयी अगूंठी को सीताजी उठाकर पहचान लेती हैं.हनुमानजी द्धारा श्रीराम जी के गुणों का वर्णनन किये जाने पर सीताजी के दुख भाग जाते हैं.सीताजी को आदि से लेकर सारी कथा सुनाते हैं.
आगे की कथा में मेघनाद हनुमानजी पर ब्रह्मस्त्र का प्रयोग करते हैं.यहाँ पर तुलसीदास जी बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत करते हैं-
*’जासु नाम जपि सुनहु भवानी’* ।
*’भव बंधन काटहिं नर ग्यानी’* ।।
*’तासु दूत कि बंध तरु आवा’* ।
*’प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा’* ।।
शिवजी कहते हैं-हे भवानी सुनो, जिनका नाम जपकर ज्ञानी मनुष्य संसार के जन्म-मरण के बंधन को काट डालते हैं, उनका दूत कहीं बन्धन में आ सकता है ? किन्तु प्रभु के कार्य के लिए हनुमानजी ने स्वयं अपने को बँधा लिया.
हनुमानजी को रावण के समक्ष प्रस्तुत किया गया. तेल में कपड़ा डुबोकर हनुमानजी की पूछ में लपेटकर आग लगा दी. हनुमानजी देह बड़ी करके लंका में आग लगा देते हैं. श्रीराम के पास पहुंचकर माता सीता का संदेश देते हैं. यहाँ से लंकाकाण्ड शुरु होता है, जिसमें लक्ष्मण शक्ति के बाद मेघनाद का वध होता है. श्रीराम 31 इकत्तीस वाण रावण पर छोड़ते हैं, जिसमें वह मृत्यु को प्राप्त होता है.
*’तासु तेज समान प्रभु आनन* ।
*हरषे देखि संभु चतुरानन* ।।
*जय जय धुनि पूरी ब्रह्मांडा* ।
*जय रघुवीर प्रबल भुजदंडा* ।।
यह देखकर शिवजी और ब्रह्मा जी हर्षित हुए. ब्रह्मांड में जय जय की ध्वनि से गूंज गया. प्रबल भुजदंडोवाले श्रीराम की जय.
विभीषण को लंका का राजतिलक कराने के बाद श्रीराम , लक्ष्मण, सीता सहित अयोध्या वापस आते हैं, जहाँ श्रीराम का राजतिलक होता है.
आत्मिक ताकत, अध्यात्म से बढ़ती है-तोमर
श्रीराम कथा के समापन के बाद अपने संबोधन में कथा के मुख्य यजमान व केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि *’मानव की आत्मिक ताकत अध्यात्म से बढ़ती है’* धर्म का प्रचार लोगों को प्रभु से जोड़ने का प्रयास है. उन्होंने आगे कहा कि वैसे तो 2018 में यहाँ पर कथा प्रस्तावित थी, लेकिन मेरे विशेष आग्रह पर माँ के आशीर्वाद से यह कथा संपन्न हुयी. कथा श्रवण से क्षेत्र में 9 दिन तक लगातार रामरस की गंगा प्रवाहित होती रही. प्रभु की आज्ञा, माँ की कृपा और आप लोगों ने पूरे मन से कथा श्रवण की, साधूवाद.
इन्होने किया पोथी पूजन व आरती
केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, उनकी धर्मपत्नी किरण सिंह, बहिन मंजू सिंह,भाई अजय प्रताप,पुत्रद्धय देवेन्द्र प्रताप *’रामू’* प्रबल प्रताप *’रघु’*, पुत्री निवेदिता सिंह,आदि तथा उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद भागीरथ प्रसाद, विधायकगण नरेन्द्र कुशवाह, नारायण सिंह कुशवाह, भारत सिंह कुशवाह, घनश्याम पिरोनिया, साडा अध्यक्ष राकेश जादौन, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजू बाथम, सेवक बाथम, बाबूलाल जोशी, रामबाबू कटारे, सुरेश गौड़,उमेश उप्पल, नरेन्द्र सिंघल, अरुण तोमर, दिनेश दीक्षित,अशोक जैन, अशोक जादौन, महेन्द्र सेंगर, कौंशल शर्मा, रमेश तोमर, देवेन्द्र श्रीवास्तव ‘चेबी’, धर्मवीर गुर्जर, बृजेन्द्र कुशवाह, अमरीश शर्मा, शशांक जैन, गौरव जैन आदि ने पोथी पूजन, श्रीरामायण की आरती की.
9 दिन से अनवरत कथा का संचालन कर रहे महेश मुदगल ने आभार व्यक्त किया.

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