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मुरादाबाद के अमरोहा में आईएस मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद कई अहम खुलासे

मुरादाबाद के अमरोहा में आईएस मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद कई अहम खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने आईएस के उस मंसूबे पर पानी फेर दिया जिसके तहत वह नए साल के मौके पर दिल्ली को दहलाना चाहता था। आईएस का मकसद मुस्लिम युवाओं को बहला फुसला कर उन्हें जेहाद के लिए तैयार करना रहा है।


सुहैल करता था भर्ती

बुधवार को हुई गिरफ्तारी बताती है कि इनसे देश को किस कदर खतरा है। एनआईए के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में जन्मे मौलवी मुफ्ती मो. सुहैल जिसका कोड नेम हजरत है, वह अमरोहा में मस्जिद के जरिए युवाओं को जिहाद के लिए बरगला रहा था। 

इससे पहले 17 मार्च 2017 को भोपाल-उज्जैन बस में धमाके की घटना के बाद कोई बड़ी घटना नजर नहीं आई थी। इस बार मामला अलग था। इंटरनेट रिसर्च का सहारा लिया गया और बताया जा रहा है कि इन आतंकियों ने 25 किलो पोटेशियम नाइट्रेट जमा कर लिया था। इनके कब्जे से 12 पिस्टल, 150 राउंड गोलियां और छोटे रॉकेट लॉन्चर भी मिले।  

पहली बार आईएस के पास से इतने घातक हथियार मिले हैं। हालांकि तेलंगाना पुलिस ने कुछ समय पहले ही आईएस के अपनी तरह के नए किस्म के मॉड्यूल का खुलासा किया था। लेकिन नए साल पर साजिश का ये प्लान कुछ अलग ही दिख रहा है।  

मो. सुहैल भले ही एक मौलवी हो लेकिन उसका सहयोगी साकिब इफ्तेखार ऐसा नहीं था। दिल्ली निवासी अनस यूनुस ने बम के लिए इलेक्ट्रानिक सामान खरीदा था। उसने नोएडा के एस विश्विद्यालय से सिविल इंजीयनियरिंग की है। जुबैर मलिक जिसने कथित रूप से सिम कार्ड खरीते वह भी नई दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ता है। उसका भाई जायद मलिक पर भी सिम खरीदने का आरोप है और वह भी यूनिवर्सिटी में पढ़ चुका है। 

अच्छे परिवारों से है युवा

सरकारी आंकडे़ बताते हैं कि आएस की विचारधारा से ऐसे लोग जुड़ रहे हैं जो अच्छे परिवारों से हैं। 68 फीसदी आरोपी मिडिल क्लास परिवारों से हैं और उनके पास डिग्री है। तीन महीने पहले ही अल कायदा से जुड़ा तौफीक नाम का शख्स मुठभेड़ में मारा गया था। उसका पिता एटोमिक एनर्जी हैवी वाटर प्लांट मनुगुरू में काम करता था। तौफीका का कभी भी किसी इस्लामिक राजनेता से संपर्क नहीं था। 

इसी तरह 2016 में अमान टंडेल नाम के युवक का वीडियो दिखा जिसमें वह हाथ में तलवार लिए बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने, मुजफ्फरनगर, गुजरात दंगों का बदला लेने की बात कह रहा था। ये युवा बाबरी की घटना के बाद ही पैदा हुए थे। इनमें बदले की भावना एक नए ट्रेंड को जन्म दे रही है। 

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