ग्वालियर /ये राजनीति भी बड़ी अजीब है यहां किसी भी व्यक्ति के बारे में कब मायने व विचार बदल जाएं पता नहीं अब ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही लीजिए कल तक जब वे कांग्रेस में थे तो श्रीमंत और महाराज कहकर उनके सामने हुजरा मुजरा करने वाले कांग्रेसियों की कतार लगी रहती थी आज जब वे भाजपा में चले गए तो बेशर्म के फूल थमाकर उन्हें बेशर्म की संज्ञा दी जा रही यह सब उसी कांग्रेस की छात्र इकाई ने किया है जिसके लिए वो कभी श्रीमंत और महाराज थे।
दिल्ली के लिए निकलने से पहले गोला का मंदिर चौराहा पर NSUI के कार्यकर्ताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया घेर लिया। अचानक कार के सामने आए NSUI कार्यकर्ताओं को देखकर उनको गाड़ी रोकनी पड़ी। NSUI ने उनको धिक्कार पत्र और बेशर्म के फूल दिए। पत्र में लिखा था जब लोग कोरोना से मर रहे थे तब आप कहां थे। इसके बाद धिक्कार पत्र को पढ़ते ही सिंधिया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उन्होंने गाड़ी का कांच चढ़ाया और निकल गए।
BJP नेता व राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया तीन दिन के अंचल के दौरे पर थे। कोविड की दूसरी लहर के बाद किसी भी नेता का यह अंचल में पहला दौरा था। पूरे कोविड पीरियड गायब रहने पर सिंधिया का विरोध पहले से ही हो रहा था, लेकिन उनके दौरे के तीन दिन सुरक्षा व्यवस्था काफी चौकस थी। पुलिस किसी भी संदिग्ध को उनके पास नहीं जाने दे रही थी। पुलिस ने दो दिन में कुछ ऐसे लोगों को नजरबंद भी किया था जो हरकत कर सकते थे। जिनमें NSUI के नेता ज्यादा थे। शुक्रवार को NSUI का नेता वंश माहेश्वरी को पुलिस ने नजरबंद कर लिया था। NSUI के प्रमुख नेता सचिन द्धिवेदी को तलाश किया जा रहा था। तीन दिन विरोध से बचते हुए सिंधिया ग्वालियर में रहे, लेकिन शहर छोड़ने से पहले उनको विरोध का सामना करना ही पड़ा।