प्रवीण दुबे
किसी प्रेरणास्पद व्यक्तित्व को कईबार याद किया जाए तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है ? इस दृष्टि से ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्मदिन मात्र एक पखवाड़े के अल्पसमय में ही दो बार मनाया जाना एक अच्छी बात कही जा सकती है। इसके लिए जयविलास और सिंधिया राजवंश बधाई के पात्र हैं।

निःसन्देह राजमाता विजयाराजे सिंधिया का व्यक्तित्व कृतित्व को जितनी बार याद किया जाए कम है। उन्होंने राजपथ के रेडकारपेट की जगह लोकपथ के कंटकाकीर्ण मार्ग को केवल इसलिये प्राथमिकता दी क्यों कि उनके लिए राजसुख की जगह ग्वालियर की जनता के सुखदुख की ज्यादा अहमियत थी। आइये अब उस मूल विषय की ओर चलते हैं जहां से हमने बात शुरू की थी। एक पखवाड़े में राजमाता जी के दो बार जन्मदिन के बड़े आयोजन वो भी दोनों ही जयविलास द्वारा आयोजित किए जाने के प्रसंग ने महल में थोड़ी सी भी रुचि रखने वालों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वैसे इस शुभ प्रसंग को लेकर कन बतियां उस समय ही प्रारंभ हो गईं थी जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्री बनने के बाद सर्वप्रथम ग्वालियर आने के लिए 12 अक्टूबर का दिन चुना उनके आग्रह पर उसी दिन राजमाता जी के जन्मदिन का कार्यक्रम छतरी में तय किया गया इतना ही नहीं सिंधिया के निकट के तमाम राजनीतिज्ञों को भी इसमें सक्रीयता बरतने की बात भी पहुंचाई गई। परिणाम सबने देखा यह आयोजन छतरी पर भव्यता के साथ आयोजित हुआ पूरा इलाका सिंधिया समर्थकों के बैनर झंडे व होडिंग से पटा दिखाई दिया।

केन्द्रीय मंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार समेत इस कार्यक्रम हेतु ग्वालियर आए । ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी दादी व भाजपा की संस्थापक उपाध्यक्ष राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 102वीं जयंती समारोह में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद सर्वप्रथम समस्त धर्मगुरुओं का सम्मान किया। इस अवसर अम्मा महाराजा की छत्री प्रांगण में भजन-संगीत का आयोजन हुआ।
श्रद्धांजलि सभा आयोजन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया, महाआर्यमान सिंधिया, राजमाता माधवीराजे सिंधिया, सांसद विवेक शेजवलकर, पूर्व सांसद अनूप मिश्रा, मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा, प्रद्युम्न तोमर, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, सुरेश राठखेड़ा समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता-पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने श्रद्धांजलि सभा में आए समस्त गणमान्य नागरिकों समेत भाजपा कार्यकर्ताओं, पधाधिकारियों और मध्यप्रदेश के मंत्रियों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद सिंधिया जयविलास पैलेस होते हुए विमानतल से नई दिल्ली रवाना हो गए।
शहरवासी जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा राजमाता को उनके जन्मदिन पर पूरे परिवार सहित श्रद्धाजंलि दिए जाने से प्रसन्न थे वहीं दो बातें उनके गले नहीं उतर रहीं थी पहली बात थी कि इस कार्यक्रम में जहां राजमाता की पुत्रियां शामिल नहीं थीं वहीं भाजपा के नेता व कार्यकर्ता उतनी संख्या में नजर नहीं आए जितने की होना चाहिए थे । दूसरी यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही थी कि प्रतिवर्ष परम्परागत ढंग से उनकी पुत्री यशोधरा राजे की अगुवाई में उसी स्थल पर आयोजित होने वाले जन्मदिन श्रद्धाजंलि के आयोजन की कमान अब क्या खुद ज्योतिरादित्य ने सम्भाल ली है यदि ऐसा हुआ भी है तो यशोधरा राजे अथवा उनकी दूसरी पुत्री वसुंधरा राजे ने इसमें शिरकत क्यों नहीं की ?
ग्वालियर वासियों में जारी इस चर्चा से मात्र दस दिन के भीतर ही पर्दा उठ गया है। इससे जुड़ी जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक राजमाता जी की जयंती से जुड़ा एक और भव्य आयोजन रविवार को उसी अम्मा महाराज की छतरी पर होने जा रहा है जहां 12 अक्टूबर को ज्योतिरादित्य की अगुवाई में कार्यक्रम हुआ था। अंतर केवल इतना है कि इस कार्यक्रम की अगुवाई उनकी पुत्री व मध्यप्रदेश की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया कर रही हैं। इसबारे में कहा जा रहा है कि यह तिथि अनुसार मनाया जाने वाला वही परम्परागत जन्म जयंति कार्यक्रम है जो लंबे समय से होता रहा है इस आयोजन में वह सारे लोग व भाजपा नेता कार्यकर्ता जुटे दिख रहे हैं जो 14 अक्टूबर के आयोजन में अलग थलग थे या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो उन्हे प्राथमिकता नहीं मिली थी। इसके लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया की पुत्री जो कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में मंत्री भी हैं का फोटो लगा आमंत्रण पत्र वितरित किया जा रहा है इसके लिए जयविलास में यशोधरा के लिए कार्यरत जनसम्पर्क अमला व अन्य स्टाफ द्वारा मोबाइल पर आग्रहपूर्ण आमंत्रण प्रेषित करने का क्रम जारी है।
राजमाता जी की जयंती को लेकर पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुरंत बाद ही उनकी पुत्री द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अब पूरे शहर में दबी जुबान तमाम निहितार्थ लगाए जा रहे हैं। अनेक लोगों का मानना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा जॉइन करने के बाद ऐसा लग रहा था कि महल में जो कुछ भी खटास थी वह दूर हो गई है लेकिन इस कार्यक्रम को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया का सम्भवतः पहली बार सक्रिय होना ,उस कार्यक्रम में उनकी पुत्रियों का न आना और उसके कुछ दिन बाद ही पुनः उसी प्रसंग पर उसी स्थान में यशोधरा राजे द्वारा कार्यक्रम आयोजित करने के घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि यशोधरा राजे द्वारा रविवार को आयोजित कार्यक्रम को लेकर आमंत्रण पत्र में ही यह ख़ुलासा कर दिया गया है कि यह आयोजन हिंदू तिथि के अनुसार हो रहा है और इसे मातृ वंदना नाम दिया गया है। बावजूद इसके कई सारे प्रश्न अनुत्तरित हैं। यह कहा जा रहा है कि भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी के भीतर राजमाता जी के प्रति जागृत श्रद्धा व उनके योगदान को भुनाने के लिए परम्परागत ढंग से उनकी पुत्री यशोधराराजे द्वारा कार्यक्रम से पहले श्रद्धाजंलि कार्यक्रम कर डाला।इसका उन्हें कितना लाभ मिलेगा यह तो वक्त ही बताएगा फिलहाल तो ग्वालियर वासियों की निगाह इस बात पर लगी है कि जिस बड़े पैमाने पर 14 अक्टूबर को सिंधिया समर्थक राजमाता जी को श्रद्धांजलि देने सक्रीय दिख रहे थे,जिस तरह से अचलेश्वर महादेव से लेकर अम्मा महाराज की छतरी के सम्पूर्ण इलाके को अपनी तस्वीर वाले होडिंग बैनर से पाट देने वाले नेता क्या 24 अक्टूबर को भी ऐसा करेंगे या चुपचाप बैठे रहेंगे फिलहाल अभी तक तो इस कार्यक्रम को लेकर उनकी सक्रियता नगण्य नजर आ रही है।