Homeदेशरामजन्मभूमि विवाद समाधान के लिए नया फार्मूला पेश

रामजन्मभूमि विवाद समाधान के लिए नया फार्मूला पेश

 उच्चतम न्यायाल (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई की तारीख तय होने के बाद अयोध्या विवाद का अदालत के बाहर समाधान खोज निकालने के प्रयास तेज होने लगे हैं, लेकिन इन प्रयासों कितनी सफलता मिलेगी यह तो वक्त ही बताएगा। हालांकि इस सिलसिले में सोमवार को गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली में एक सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें रामजन्मभूमि विवाद का एक नया फार्मूला पेश किया।

मीडिया रिपोर्ट अनुसार पुणे स्थित एमआइटी व‌र्ल्ड पीस यूनिवसिर्टी के अध्यक्ष डाक्टर विश्वनाथ कराड इस फार्मूले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं। माना जा रहा है कि नए फार्मूले के तहत विवाद का केंद्र बनी 2.77 एकड़ जमीन पर भव्य राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव है और इस जमीन पर दूसरे पक्ष अपना दावा छोड़ देंगे। बदले में सरकार द्वारा अधिगृहित 67 एकड़ जमीन पर विश्वधर्मी श्रीराम मानवता भवन बनाया जाएगा। जिसमें सभी धर्मो के लिए भव्य उपासना गृह बनाए जाएंगे।
देश के कुछ बुद्धिजीवियों ने प्रस्ताव किया है कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर हिन्दुओं की आकांक्षाओं के अनुरूप भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ सरकार के अधीन 67 एकड़ की भूमि पर एक भव्य श्रीराम विश्वधर्मी मानवता भवन का निर्माण हो जो आतंकवाद, युद्ध और अशांति से ग्रस्त दुनिया को शांति का संदेश दे।

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो. डॉ. विश्वनाथ डी. कराड के नेतृत्व में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी, यहूदी आदि समुदायों के धर्मगुरू एवं विचारकों ने ये प्रस्ताव किया है।

 सोमवार को इस फार्मूले पर अयोध्या आंदोलन के केंद्र में रहे रामजन्मभूमि न्यास के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व भाजपा के पूर्व सांसद राम विलास वेंदाती और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान के साथ-साथ स्वामी अग्निवेश, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एस एन पठान, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं परम सुपरकंप्यूटर के जनक पद्मभूषण डॉ. विजय पी भटकर, जम्मू कश्मीर विधान परिषद के उपसभापति जहांगीर हसन मीर आदि शामिल हैं।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments