प्रवीण दुबे

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. माधवराव सिंधिया को खेलों से विशेष लगाव था यही वजह है की उनके प्रयासों से ही ग्वालियर में पहले क्रिकेट ओर फिर हॉकी के अंतरराष्ट्रीय मैचों की सुविधाएं ग्वालियर को प्राप्त

हुईं। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा की स्व . माधवराव ने अपने रेलमंत्री रहते जिस रेलवे हॉकी स्टेडियम की स्थापना कराई थी। वह स्टेडियम आज अपनी दुर्दशा पर नौं नौं आँसू रो रहा है। यहां करोड़ों की लागत से बिछाए गए एक्स्ट्रोटर्फ की अनदेखी के चलते आलम यह है की वह जगह जगह से फट चुका है।

इसमें स्टेडियम को तरबतर करने के लिए लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम की बोरिंग का पानी भर जाने से तालाब बन चुका है। इस अंतराष्ट्रीय स्टेडियम पर लम्बे समय से कोई मैच भी नहीं खेला गया है।
स्व. माधवराव सिंधिया जब केंद्रीय रेल राज्यमंत्री थे उन्होंने ग्वालियर में रेलवे हॉकी स्टेडियम की स्थापना कराई थी। इसी के अंतर्गत 1987 में यहां हॉकी के लिए कुत्रिम घास का मैदान अर्थात एस्ट्रोटर्फ बिछाया गया था। उस समय देश में मात्र चार ऐसे हॉकी स्टेडियम ही थे जिनमें एस्ट्रोटर्फ की सुविधा प्राप्त थी। करोड़ों की लागत से यह एस्ट्रोटर्फ विदेश से आयात करके यहां लगवाया गया था। उस समय कई विदेशी हॉकी टीमों के साथ यहां लगातार मैच खेले गए।
माधवराव के निधन के बाद यह रेलवे हॉकी स्टेडियम भी अनाथ हो गया और अनदेखी के कारण यह बदहाल होता चला गया। एस्ट्रोटर्फ भी फट गया। जब माधवराव के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री बने तो उनका ध्यान इस स्टेडियम की दुर्दशा की ओर गया और उनके प्रयासों से इसके पुराने दिन लौट आए। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस स्टेडियम में नए एस्ट्रोटर्फ का लोकार्पण 4 फरवरी 2006 में कराया।
कुछ दिन तो इसका रखरखाव ठीक से हुआ लेकिन शने शने यह उसी पुरानी दुर्दशा पर जा पहुंचा यहां का स्प्रिंकलर सिस्टम जो की एस्ट्रोटर्फ के लिए बहुत जरूरी होता है। खराब हो गया। पानी में खारेपन और ठीक प्रकार से देखरेख न होने से इसका बुरा हाल हो गया। हालात तो यहां तक जा पहुंचे की इस अंतरराष्ट्रीय सुविधायुक्त स्टेडियम को शादी समारोह के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।

2013 में यह जानकारी आई की ग्वालियर. हॉकी खिलाडिय़ों को जल्द एक सौगात मिलने वाली है। रेलवे हॉकी स्टेडियम का खराब हो चुका एस्ट्रोटर्फ जल्द ही बदलेगा। रेलवे ने नए एस्ट्रोटर्फ के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे, जोरशोर से प्रचारित किया गया की स्टेडियम पर एस्ट्रोटर्फ डालने का काम इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा। रेलवे हॉकी स्टेडियम के एस्ट्रोटर्फ के अलावा सरफेस, स्प्रिंगल सिस्टम, जालियां और स्टेडियम के बिल्डिंग में सुधार कार्य होगा। इसके बाद एस्ट्रोटर्फ स्तरीय रूप में सामने आएगा। लेकिन उस समय अचानक यह जानकारी आई की ग्वालियर के लिए स्वीकृत एस्ट्रोटर्फ झांसी में लगेगा। इस प्रकार नए एस्ट्रोटर्फ का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके पुराने दिन वापस लौटाने के पुनः प्रयास नरेंद्र सिंह तोमर ने अवश्य किये वे जब केंद्रीय मंत्री बने तो 2019 में बदहाल रेलवे हॉकी स्टेडियम के उँनीकर्ण का काम शुरू हुआ। हॉकी संघ की कमान उनके पुत्र देवेंद्रप्रताप सिंह के हाथ थी। उन्होंने भी इसमें रुचि दिखाई थी। लेकिन इस हॉकी स्टेडियम के पुराने स्वर्णकाल को लौटा नहीं सके। यह कहा जा रहा था की
दर्शक दीर्घा में टॉयलेट ब्लॉक बनेगा।पवेलियन की बिल्डिंग को हॉस्टल में बदला जाएगा।
चेंजिंग रूम, रेस्ट रूम और खिलाड़ियों के लिए कमरे तैयार किए जाएंगे।डग आउट नए सिरे से बनाया जाएगा।पुराने टर्फ को भी इस्तेमाल में लेंगे। कुछ काम हुए भी लेकिन इसके अंतरराष्ट्रीय स्वरूप के मुताबिक वह नाकाफी ही रहे।
आज तो आलम यह है की इस मैदान का एस्ट्रोटर्फ पूरी तरह से फट चुका है। ऐसा दिखाई देता है जैसे कोई फटा चीथड़ा फर्श इसपर बिछा हो। जगह जगह पानी भरा हुआ है। मैच खेला जाना तो दूर यहां खड़े होना तक सम्भव नहीं है। मैदान की दर्शक दीर्घा भी जीर्णशीर्ण हो चुकी हैं। जालिया और बैठने के स्थान जगह जगह से टूट रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए बना ड्रेसिंग रूम खराब हालत में धूल खा रहा है। कई बार रेलवे द्वारा अपने सुरक्षा बल या अन्य कर्मचारियों को ठहरने के लिए इसका इस्तेमाल जरूर कर लेता है। तब कुछ हिस्से की औपचारिक साफ सफाई की जाती है। यहां के परिसर में शराबी व असामाजिक तत्वों ने अपना अड्डा बना लिया है। केयरटेकर के नामपर किसी भी कर्मचारी को यहां तैनात नही। किया है। कुल मिलाकर स्व माधवराव सिंधिया के प्रयासों से निर्मित अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह सौगात अनदेखी के कारण दम तोड़ चुकी है।