नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका को दिल्ली की एक कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यही नहीं जेएनयू स्टूडेंट की बेल अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का भी उल्लेख किया। विवेकानंद का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘हम वही होते हैं, जो हमारे विचार हमें बनाते हैं। इसलिए आप क्या सोच रहे हैं, इस बात का ध्यान रखें। शब्द बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं, लेकिन विचार जिंदा रहते हैं। वे ज्यादा प्रभाव डालते हैं और दूर तक जाते हैं।’
साकेत कोर्ट के अडिशनल सेशंस जज अनुज अग्रवाल ने शरजील इमाम के भाषण को लेकर कहा कि 13 दिसंबर 2019 की स्पीच से साफ है कि उसमें सांप्रदायिक और विभाजनकारी विचार थे। मेरे ख्याल से स्पीच की जो भाषा और मंशा थी, वह समाज में शांति और सौहार्द को बिगाड़ सकती थी। जज अनुज अग्रवाल ने कहा कि भाषण में जिस की भाषा का इस्तेमाल किया गया था, उससे शांति और सौहार्द बिगड़ने का खतरा था। ऐसे में इस स्थिति में मैं उनकी जमानत अर्जी को मंजूर नहीं कर सकता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपी दूसरे सह-आरोपियों के मुकाबले समानता की बात नहीं कर सकता क्योंकि उसका रोल दूसरे लोगों के मुकाबले पूरी तरह से अलग था।