Homeदेशविहिप के मंच से जस्टिस यादव के बयान पर बवाल

विहिप के मंच से जस्टिस यादव के बयान पर बवाल

कहा एक से ज़्यादा पत्नी रखने, तीन तलाक़ और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी

“हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा.”

जस्टिस शेखर कुमार यादव इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज हैं. वो रविवार को विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.इस मौक़े पर उन्होंने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के मुद्दे पर कहा, “हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा.”

जस्टिस शेखर यादव का कहना था कि एक से ज़्यादा पत्नी रखने, तीन तलाक़ और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी.जस्टिस यादव की इस स्पीच से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं और अब उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

रविवार यानी आठ दिसंबर को विश्व हिन्दू परिषद के विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था.

इस कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव के अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक और मौजूदा जज जस्टिस दिनेश पाठक भी शामिल हुए.

कार्यक्रम में ‘वक़्फ़ बोर्ड अधिनियम’, ‘धर्मान्तरण-कारण एवं निवारण’ और ‘समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक अनिवार्यता’ जैसे विषयों पर अलग-अलग लोगों ने अपनी बात रखी.

इस दौरान जस्टिस शेखर यादव ने ‘समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक अनिवार्यता’ विषय पर बोलते हुए कहा कि देश एक है, संविधान एक है तो क़ानून एक क्यों नहीं है?

लगभग 34 मिनट की इस स्पीच में शाह बानो केस का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीन तलाक़ बिल्कुल ग़लत है, लेकिन तत्कालीन सरकार को झुकना पड़ा था.

जस्टिस शेखर यादव कहते हैं, “जिस नारी को हमारे यहां देवी का दर्जा दिया जाता है, आप उसका निरादर नहीं कर सकते हैं. आप यह नहीं कह सकते हैं कि हमारे यहां तो चार पत्नियां रखने का अधिकार है, हमारे यहां तो हलाला का अधिकार है, हमारे यहां तो तीन तलाक़ बोलने का अधिकार है. ये सब नहीं चलने वाला है.”

अपनी स्पीच के दौरान जस्टिस यादव ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर . उनका कहना था कि हमें किसी का कष्ट देखकर कष्ट होता है, लेकिन आपके यहां ऐसा नहीं होता है.

उन्होंने कहा, “ये कहने में बिल्कुल गुरेज़ नहीं है कि ये हिन्दुस्तान है. हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा. यही क़ानून है. आप यह भी नहीं कह सकते कि हाई कोर्ट के जज होकर ऐसा बोल रहे हैं. क़ानून तो भैय्या बहुसंख्यक से ही चलता है. परिवार में भी देखिए, समाज में भी देखिए. जहां पर अधिक लोग होते हैं, जो कहते हैं उसी को माना जाता है.”

जस्टिस शेखर यादव ने ये भी कहा कि ‘कठमुल्ले’ देश के लिए घातक हैं.

जस्टिस यादव कहते हैं, “जो कठमुल्ला हैं, ‘शब्द’ ग़लत है लेकिन कहने में गुरेज़ नहीं है, क्योंकि वो देश के लिए घातक हैं. जनता को बहकाने वाले लोग हैं. देश आगे न बढ़े इस प्रकार के लोग हैं. उनसे सावधान रहने की ज़रूरत है.”

इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अयोध्या में मौजूद राम मंदिर पर भी अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा, “कभी कल्पना की थी क्या आपने कि हम राम मंदिर को अपनी आंखों के सामने देखेंगे, लेकिन देखा है आपने. हमारे पूर्वज तमाम बलिदान देकर चले गए इसी आस में कि हम रामलला का भव्य मंदिर बनते देखेंगे लेकिन वो देख नहीं पाए. किया उन्होंने, लेकिन देख आज हम रहे हैं.”

स्पीच के आख़िर में उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यूसीसी बिल को लोग जल्दी ही देखेंगे.

कौन हैं जस्टिस शेखर यादव?

जस्टिस शेखर यादव ने बतौर वकील अपना करियर शुरू किया था. साल 1988 में उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली और साल 1990 में वकालत शुरू की. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में सिविल और संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की थी.

शेखर यादव ने हाई कोर्ट में राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता और स्थायी अधिवक्ता के पद पर काम किया है. इसके अलावा केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता और रेलवे के वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर भी काम कर चुके हैं.

दिसंबर, 2019 में जस्टिस यादव ने एडिशनल जज के रूप में शपथ ली और 26 मार्च, 2021 को हाई कोर्ट के स्थायी जज बने.

ऐसा पहली बार नहीं है जब शेखर यादव अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हों. सितंबर 2021 में उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात कही थी.

तब कथित गोकशी के एक मामले में सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा था, “वर्तमान हालात को देखते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए और गाय की सुरक्षा को हिंदू समाज का मूलभूत अधिकार बना देना चाहिए, क्योंकि हम जानते हैं कि जब एक देश की संस्कृति और विश्वास को ठेस पहुंचती है तो देश कमज़ोर होता है.”

जस्टिस यादव यह भी दावा कर चुके हैं कि गाय एक मात्र पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ती है.

दिसंबर 2021 में उन्होंने चुनावी रैलियों में होने वाली भीड़ रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयुक्त को यूपी चुनाव टालने का सुझाव दिया था.

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