क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से हुई मुलाकात मध्यप्रदेश में किसी बड़े सियासी बदलाव का संकेत हैं ? राजनीतिक पंडितों के बीच यह सवाल इस कारण से भी सरगर्म है क्यों कि पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से हर मोर्चे पर बदलाव का प्रयोग दिखाई दे रहा है । केंद्रीय मंत्रिमंडल में पार्टी आलाकमान ने बड़े बड़े धुरंधरों को बगल करके साफ तौर पर यह संदेश दे दिया है कि पार्टी के लिए व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का महत्व है जो भी इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता उसे हटना ही होगा । पार्टी ने इसके साथ ही यह भी संकेत दे दिया है कि उसके लिए नए चेहरे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना कि काम की कसौटी । केंद्रीय मंत्रिमंडल में इसकी झलक सामने आ चुकी है। परिवर्तन का यह क्रम अब राज्यों की ओर भी मुड़ता दिख रहा है। आसाम,उत्तराखंड इसका प्रमाण है।सूत्रों के अनुसार, जिन राज्यों में अगले एक साल के भीतर चुनाव हैं वहां पर परिवर्तन हो चुके है और जहां उसके बाद चुनाव हैं उसके लिए परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दृष्टि से पार्टी की सत्ता वाले कई राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन के आसार हैं। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय नेतृत्व की हाल की मुलाकातों और चर्चाओं के बाद वहां पर भी परिवर्तन की स्थिति बन रही है। इसके अलावा अन्य राज्यों की भी एक-एक कर समीक्षा की जा रही है, जिनमें सरकार और बिना सरकार वाले सभी राज्य शामिल हैं।
पार्टी से जुड़े सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी क्रम में शुक्रवार को दिल्ली आए और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात के बाद किसी से कोई चर्चा नहीं की। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश में भविष्य की रणनीति को देखते हुए पार्टी नेतृत्व जरूरी बदलाव करना चाहता है। संभवत इसी को लेकर शिवराज सिंह से चर्चा भी की गई है।
पिछले दिनों हुए पांच विधानसभा चुनाव के नतीजों और कोरोना काल के दौरान भाजपा को देश भर से मिले फीडबैक के बाद शीर्ष स्तर पर व्यापक मंथन जारी है। इसमें आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय करने के साथ भविष्य की भाजपा को भी तैयार करना है। कई राज्यों में दशकों से चले आ रहे नेतृत्व को बदलना और नए लोगों को सामने लाने पर काम शुरू हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक में भाजपा नेतृत्व ने येदियुरप्पा का विकल्प लाने का मन बना लिया है। पार्टी ने येदियुरप्पा को दिल्ली बुलाकर उनको इस बात के लिए तैयार कर लिया है। हालांकि येदियुरप्पा की अपनी कुछ शर्तें है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने उनको इसका भरोसा भी दिलाया है। राज्य में लिंगायत और वोक्कलिगा दोनों समुदायों के बीच संतुलन कायम करते हुए ही नया नेतृत्व तय किया जाएगा। जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं। उनमें केंद्रीय मंत्री प्रह्लादजोशी, राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष, उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सवदी व अश्वथ नारायण, हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले सदानंद गौड़ा, राज्य के वरिष्ठ मंत्री आर अशोक मुर्गेश निराणी व बसवराज एतनाल भी शामिल है।
इसके पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव को भी दिल्ली बुलाया गया था और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। त्रिपुरा में हाल में पार्टी के भीतर काफी असंतोष सामने आया था। मुकुल रॉय के भाजपा से तृणमल कांग्रेस में वापस जाने के बाद त्रिपुरा में भी पार्टी के लिए समस्याएं आ सकती हैं। ऐसे में पार्टी भविष्य की चिंता करते हुए नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी दिल्ली आकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद थे। राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार का एक मुद्दा तो है ही, किसान आंदोलन से लेकर कोरोना काल व राज्य की भावी राजनीति को देखते हुए पार्टी वहां पर भी बदलाव पर विचार कर रही है सूत्रों के अनुसार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी पार्टी भविष्य का नेतृत्व तैयार करने की कोशिश में है। इन दोनों राज्यों का मौजूदा नेतृत्व के साथ पार्टी नया नेतृत्व भी लाना चाहती है, जो अगले चुनाव के तक पूरी तरह तैयार हो सके। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व के साथ संघ नेतृत्व का भी मानना है कि भाजपा को अब नए युवा नेताओं को आगे लाना चाहिए जिससे कि अगले कुछ सालों में पार्टी नए और युवा नेताओं की एक टीम तैयार कर सके।