ग्वालियर 03 जनवरी। लोग पूछते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून की जरूरत क्या थी? सवाल करने वालों को यह समझना चाहिए कि भारत एक वैश्विक महाशक्ति है, क्षेत्रीय महाशक्ति है। एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य होने के नाते हमारा यह कत्र्तव्य है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में जहां-जहां, जो-जो लोग धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं, उन्हें संरक्षण दिया जाए। नागरिकता संशोधन कानून हमारे संविधान की भावना की अभिव्यक्ति है और यह हमारे क्षेत्र की मजहबी हुकूमतों को लोकतांत्रिक भारत का जवाब है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के ग्वालियर सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने नागरिकता संशोधन कानून के संबंध में चल रहे जन जागरण अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को बेंबू रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।
श्री शेजवलकर ने कहा कि 12 दिसम्बर 2019 को विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बना। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए लोग भारत के नागरिक बन सकेंगे। स्वाभाविक है, जिनकी धार्मिक प्रताड़ना हुई है, वह गैर इस्लामिक हैं। ऐसे सभी लोग जो 31 दिसम्बर 2014 से पूर्व भारत में प्रवेश कर चुके हैं।पहले यह प्रावधान 11 वर्षों का था और अब 5 वर्षों की निवास अवधि प्रमाणित करनी होगी। उन्होंने कहा कि मोदी जी की सरकार ने तो केवल वही काम किया है, जिसका आदेश महात्मा गांधी ने 26 सितम्बर 1947 को दिया था। गांधी जी की इच्छा को कानूनी जामा पहनाने का काम भाजपा ने किया है। गांधी ने कहा था-पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू हर नजरिए से भारत आ सकते हैं, यदि वह वहां निवास नहीं करना चाहते। उन्हें नौकरी देना, उनके जीवन को सामान्य बनाना, भारत सरकार का कत्र्तव्य है।
श्री शेजवलकर ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि कांग्रेस सहित वे सभी दल जो नागरिकता संशोधन के नाम पर देश में आग लगाना चाहते हैं। वे गांधीजी का भी अपमान कर रहे हैं। विरोध करने वालो के पास इस बात का क्या जवाब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत थी जो आज 3.7 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार बांग्लादेश में 22 प्रतिशत थी जो आज 7.8 प्रतिशत हो गई है। ठीक इसी के उलट भारत में मुस्लिमों की संख्या 9.8 प्रतिशत थी, जो आज 14 प्रतिशत के ऊपर हो गई है। उन्होंने कहा कि नये कानून का विरोध करने वाले और देश में अराजकता फैलाने वालो से हमारा प्रश्न है कि वह हमारा जवाब दें कि पाकिस्तान और बांग्लादेश आदि के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध, पारसी आदि को आसमान निगल गया या वे जमीन में समां गए। पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को स्वभाविक है, या तो मार दिया गया, या धर्म परिवर्तन करा दिया गया, या उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा गैर मुसलमानों की बेटियों का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किए गए। पुरूषों को मार दिया गया और बचे-खुचे लोग भारत आ गए हैं, उन्हें अब कांग्रेस और वामपंथी जीने का अधिकार देना नहीं चाहते।
श्री शेजवलकर ने कहा कि आज नागरिकता संशोधन के नाम पर जो लोग बवाल कर रहे हैं, वे भी मुसलमानों के हितचिंतक नहीं हैं। सच तो यह है कि यह वह लोग हैं जिन्होंने मुसलमानों को पीढ़ी दर पीढ़ी डरा कर कभी देश की मुख्य धारा में आने नहीं दिया। नागरिकता संशोधन कानून में बहुत स्पष्ट रूप से नागरिकता देने का प्रावधान है, लेने का नहीं। कुछ लोग तीन ही देषों का विषय उठा रहे हैं, हम उन्हें कहना चाहते हैं कि यह तीनों इस्लामिक देश हैं इसलिए स्वभाविक रूप से वहां धार्मिक आधार पर मुसलमानों का धार्मिक उत्पीड़न नहीं हो सकता है। भारत में पश्चिम बंगाल में 1955 में, 1960 में, 1970 में, 1980 में और 1990 में या फिर 2014 में आए उन सभी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। कुछ लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं, कि घुसपैठियों और शरणार्थियों में फर्क क्या है? साफ है कि ऐसे लोगों की बुद्धि खराब है या फिर वह स्वार्थों के कारण मुर्खतापूर्ण बातें कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ हैं। हम ऐसे लोगों को चुनौती देते हैं कि वे पूरे कानून में एक लाइन मुसलमानों के खिलाफ ढंूढकर बताएं। देश में बाहर के मुसलमानों को भी नागरिकता देने का प्रावधान है। मोदी जी के शासनकाल में ही पिछले 5 वर्षों में 566 मुसलमानों को नागरिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि अदनाम सामी जैसे तमाम नामीग्रामी लोग आज भारत में रहकर गौरव का अनुभव कर रहे हैं, लेकिन उसकी पूर्व निर्धारित प्रक्रिया है जिसके तहत वे आवेदन कर सकते हैं।
श्री शेजवलकर ने कहा कि कांग्रेसी, वामपंथी और मायावती जैसे लोग नागरिकता कानून का विरोध करके उस वर्ग पर भी अत्याचार कर रहे हैं, जिसे हम अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग कहते हैं, क्योंकि भारत आने वाले शरणार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के पीड़ित भाई-बहन हैं। क्या, नागरिकता कानून का विरोध करने वाले हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध, पारसी आदि की बेटियों और बहनों के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे स्थानों पर किए जा रहे बलात्कारों का अप्रत्यक्ष समर्थन नहीं कर रहे हैं? क्या, ऐसे लोग इन देशों में अल्पसंख्यों के कत्लेआम मंदिरों की तोड़फोड़ और संपत्तियांे को आग लगाने की आतंकी कार्यवाही का समर्थन नहीं कर रहे? नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को देश को यह बताना चाहिए कि अगर यह पीड़ित शरणार्थी भारत में शरण नहीं लेंगे या भारत इन्हें नागरिकता नहीं देगा तो दुनिया में कौन सा ऐसा देश है, जो इन्हें नागरिकता देने के लिए तैयार होगा?
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सबकुछ जानकर भी वोटों के लालच में और अपने आकाओं को खुश करने के लिए नागरिकता कानून को मध्यप्रदेश में लागू नहीं करने की बात कह रहे हैं, जबकि नागरिकता देना और नहीं देना यह राज्यों का विषय ही नहीं होता। नागरिकता देश की होती है, प्रदेश की नहीं। यह कमलनाथ भी भलिभांति जानते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इस मानवीय विषय पर भी वे वोटों की फसल उंगाने का प्रयास कर रहे हैं।
श्री शेजवलकर ने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जो लोग नागरिकता कानून के विरोध में देश को हिंसा की आग में झोंकने का प्रयास कर रहे हैंए औरभारत को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। देश विरोधी ताकतें नागरिकता कानून के विरोध में आवाज बुलंद कर रही हैं।
इन्हें देश की प्रगति और विकास से कुछ लेना-देना नहीं है। विपक्ष ये हंगामा सिर्फ स्वहित के लिए कर रहे हैं। इसलिए इनके बहकावे में ना आएं। पूरा देश श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ है। यह लोग अपने हितों के लिए नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैंए देश की जनता इनकी असलियत जान रही है। श्री शेजवलकर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि विपक्ष के बहकावे में न आएँ। व्यंक्तिगत हितों की जगह राट्रीय हितों को सर्वोपरि रख कानून का पालन करें और मोदी जी और देश के प्रजातंत्र को मजबूती दें। ऐसा मेरा सभी सामाजिक संगठनों से आग्रह है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष श्री देवेश शर्मा, महामंत्रीगण श्री कमल माखीजानी, श्री शरद गौतम, श्री महेश उमरैया, संभागीय मीडिया प्रभारी श्री पवनकुमार सेन उपस्थित थे।