कलाकर कभी मरता नहीं उसकी कलाकृतियां युग युगांतर तक उसे न केवल जीवित रखती हैं बल्कि उसके सदैव हमारे आसपास होने का अहसास कराती रहती हैं।

आज प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभात राय को भले ही काल के क्रूर हाथों ने हमसे छीन लिया लेकिन सहसा विश्वास ही नहीं होता की वो अब कभी नहीं मिलेंगे। उनकी कर्मस्थली ग्वालियर ही नहीं देश के तमाम छोटे बड़े शहरों के चौराहों,धार्मिक स्थलों पर लगी उनके द्वारा बनाई गई जीवंत मूर्तियां प्रभात राय को हमेशा जीवंतता प्रदान करती रहेंगी। मुझे अच्छी तरह याद है लगभग 30 वर्ष पुरानी वो मुलाकात जब शहर के अखबार स्वदेश में छपने वाले कॉलम “व्यक्तित्व” के लिए मैं प्रभात रायजी से चर्चा करने पहुंचा था। सामान्य मूर्तिकार से बातचीत का भाव मन में लेकर जब मैं वहां पहुंचा और चर्चा शुरू की तो पाया कि वो सामान्य नहीं बल्कि पूरी तरह से अदभुत और असामान्य व्यक्तित्व के धनी थे। एक कलाकार का स्वभाव कितना सहज सरल होता है प्रभात राय मेरे लिए इसका जीवंत उदाहरण बन गए थे। मुलाकात का यह दौर कई दिनों तक चला और वे खुद मुझे उस कार्यशाला में गए जहां उनके भीतर समाए एक महान शिल्पकार के मैने साक्षात दर्शन किए थे। उस शुरुआती दौर में स्वामी विद्यानंद जी के आग्रह पर गुजरात के बरूमाल आश्रम में स्थापित की जाने वाली विशाल मूर्ति ने उन्हें शहर में जो ऊंचाई प्रदान की इसके बाद इस मेधावी मूर्तिकार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


वर्तमान में शहर में लगी स्वामी विवेकानंद की मूर्ती, स्व सिंधिया की मूर्ती, बेटी बचाओ का संदेश देती मूर्ति से लेकर भोपाल इंदौर सहित देशभर में स्थापित तमाम विशाल मूर्तियां इस महान कलाकार के अनंत यात्रा पर जाने और वहां से कभी न लौटने की खबर से मानों उदास नजर आती हैं। शब्द शक्ति न्यूज की ओर से महान मूर्तिकार ,कलाकार प्रभात राय के निधन पर सादर श्रद्धांजलि ।