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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ झूठा हो हल्ला मचाने वालों की खुली पोल

प्रवीण दुबे

झूठा हो-हल्ला मचाने वालों के मुंह पर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट का करारा जवाब!,कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया के सामने दिखाई दान की वस्तुएं, बोले— “जिसे देखना है, अयोध्या आ जाए”

अयोध्या 7 जुलाई 2026/श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की वस्तुओं को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगाए जा रहे आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सार्वजनिक रूप से बड़ा जवाब दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीडिया के सामने दान में प्राप्त विभिन्न वस्तुओं का प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट कहा कि मंदिर को प्राप्त सभी भेंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास मौजूद है। ट्रस्ट के इस सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर नया मोड़ आ गया है। ट्रस्ट का दावा है कि तथ्यों और रिकॉर्ड के सामने आने के बाद दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिशों की पोल खुल गई है

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “जिस किसी को भी संदेह है, वह अयोध्या आए और स्वयं अपनी दान की गई वस्तु देखकर संतुष्ट हो जाए। ट्रस्ट के पास हर वस्तु का पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध है।”
ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर को प्राप्त सभी सोने-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य दान का विधिवत रिकॉर्ड रखा जाता है। जिन चांदी की वस्तुओं को तकनीकी आवश्यकता के कारण टकसाल में गलाकर सिल्वर बार बनाया गया, उनकी भी पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ दर्ज है।
ट्रस्ट के इस सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर नया मोड़ आ गया है। ट्रस्ट का दावा है कि तथ्यों और रिकॉर्ड के सामने आने के बाद दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिशों की पोल खुल गई है।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम की चर्चा तेज है। ट्रस्ट समर्थकों का कहना है कि बिना पूरे तथ्य सामने आए लगाए गए आरोप अब कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं। वहीं विपक्षी दल अपने-अपने दावे और सवाल पहले की तरह उठाते रहे हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि मंदिर में आने वाले प्रत्येक दान की सुरक्षा, रिकॉर्ड और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी श्रद्धालु को यदि कोई शंका हो तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी प्राप्त कर सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रस्ट स्वयं रिकॉर्ड और दान की वस्तुएं सार्वजनिक रूप से दिखाने को तैयार है, तब क्या आरोप लगाने वाले भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपनी बात स्पष्ट करेंगे, या फिर यह विवाद राजनीतिक बहस तक ही सीमित रहेगा?

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