संभल में शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश देते हुए निचली अदालत से संभल जामा मस्जिद मामले पर सुनवाई न करने को कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा है और कहा कि अब हाईकोर्ट के निर्देश पर ही कोई कार्रवाई हो सकेगी।
दरअसल मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर कर मस्जिद का सर्वे कराने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वह उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ अहम निर्देश दिए, जिनके मुताबिक निचली अदालत को इस मामले पर सुनवाई करने से रोक दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में हई कोर्ट के आदेश के बिना कुछ भी न किया जाए. हालांकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह सुप्रीम कोर्ट आने से पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए. दरअसल, ये याचिका मस्जिद कमेटी ने दाखिल की है. मस्जिद पक्ष ने स्थानीय कोर्ट के सर्वे के आदेश को चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा,’ क्या 227 के तहत हाई कोर्ट जाना उचित नहीं है? बेहतर होगा कि हम इसे यहीं लंबित रखें. आप अपनी दलीलें उचित पीठ के सामने दायर करें.’ सुनवाई के दौरान CJI ने कहा,’हम नहीं चाहते कि इस बीच कुछ भी हो. उन्हें आदेश को चुनौती देने का अधिकार है. वे रिवीजन या 227 याचिका दायर कर सकते हैं.’
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा,’ जिला प्रशासन सभी दलों के प्रतिनिधियों के साथ शांति समिति बनाएगा. हमें पूरी तरह से तटस्थ रहना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि कुछ भी न हो.’ इस बीच याचिकाकर्ता ने कहा कि मेरी जानकारी के मुताबिक देशभर में इस तरह के 10 मुकदमे लंबित हैं. इनमें से 5 यूपी में हैं. इस मामले में जो तरीका अपनाया जा रहा है, वह यह है कि मुकदमा दायर किया जाता है और फिर कहानी गढ़ी जाती है.
शांति और सद्भाव बनाए रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,’ कुछ प्रतिवादी कैविएट पर उपस्थित हुए हैं. हमें लगता है कि याचिकाकर्ताओं को 19 तारीख को पारित आदेश को उचित मंच पर चुनौती देनी चाहिए. इस बीच शांति और सद्भाव बनाए रखा जाना चाहिए. हम यह भी मानते हैं कि यदि कोई अपील/पुनरीक्षण किया जाता है तो उसे 3 दिनों के अंदर सुनवाई के लिए लिस्टेड किया जाना चाहिए.’