हमारे समाज में नेता शब्द को बड़े हीन भाव से लिया जाता है हालांकि मैं इससे सहमति नहीं रखता महान स्वतंत्रता सैनानी सुभाष चन्द्र बोस को भी नेताजी कहकर संबोधित किया जाता था नेता अर्थात सदस्वभाव से परिपूर्ण ऐसा व्यक्तित्व जो अपने उत्तम स्वभाव और कार्यशैली से संपूर्ण समाज का नेतृत्व करने वाला ,अब यह बात अलग है की वर्तमान समय में इस शब्द ने अपनी गरिमा खो दी है और नेता को एक विलन के रूप में देखा जाने लगा है। बावजूद इसके कभी कभी समाज में ऐसे उदाहरण सामने आ जाते हैं जिनके कारण आज भी यह शब्द सम्मान का हकदार बन जाता है। ऐसा ही एक आदर्श आजकल मध्यप्रदेश में खासा चर्चा में बना हुआ है। मध्यप्रदेश के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी जो की पूर्व में एक वैचारिक अखबार के सम्पादक रहे हैं। उनके द्वारा कृतिरुप में बहुत अच्छी पहल देखने को मिली जिसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है। वे मध्यप्रदेश भाजपा के युवा नेताओं में शुमार हैं और उन्हें कई बड़े नेताओं यहां तक की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का भी निकट माना जाता है। चूंकि वे राजनीतिक दल के बड़े पद पर आसीन हैं अतः अब नेता ज्यादा और पत्रकार कम हैं यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए,और इसी कारण से अब इन नेता महोदय को ग्वालियर की भितरवार विधानसभा सीट से सम्भावित उम्मीदवार के रूप में भी देखा जा रहा है । हालांकि यह बात इन श्रीमान नेताजी ने अपने मुंह से आजतक नहीं कही है लेकिन इनके समर्थक उन्हें अवश्य यहां से टिकट का दावेदार निरूपित करते हैं। चूंकि इसी विधानसभा में इनका गृह ग्राम रिछेरा भी स्थित है दूसरा पिछले कुछ दिनों से इनकी सक्रीयता भी यहां से बढ़ गई है अतः इस बात में वजन भी नजर आने लगा है। खैर चुनाव अभी दूर है अतः इसपर चर्चा फिर कभी होगी आज पुनः असल मुद्दे पर आते हैं। तो युवा मीडिया प्रभारी का भोपाल में बढ़ता राजनीतिक रुतबा और जोरदार सम्भावनाओं ने उनके नगर ग्वालियर में समर्थकों की बड़ी फ़ौज तैयार कर दी है। हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी कार्यकारिणी में दूसरी बार जब नेताजी को प्रदेश मीडिया की कमान सौंपी वैसे ही ग्वालियर में इनके समर्थकों की बांछे खिल गईं देखते ही देखते भाजपा की नव संस्कृति एकबार पुनः ग्वालियर के चौराहों सड़कों पर प्रस्फुटित होना शुरू हो गई। समर्थकों ने मीडिया प्रभारी जी के बधाई वाले आदमकद होडिंग बैनर पोस्टर लगवाना प्रारंभ कर दिए। चूंकि पिछले एक पखवाड़े से शहरवासी कई बड़े नेतापुत्रों के चित्र वाले विशालकाय होडिंग देखते आ रहे थे तो उन्हें यह नए बैनर पोस्टर होडिंग देखकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। आश्चर्य तो तब हुआ जब अचानक यह नए होडिंग गायब हो गए। लोगों को समझ नहीं आया आखिर हुआ क्या ? चूंकि आजकल हर किसी के हाथ में मोबाइल है ,सोशल मीडिया का जवाना है ऐसा क्यों हुआ यह सच्चाई सामने आते देर नहीं लगी ऐसा क्यों हुआ और यही वह बात है जो यह सिद्ध करती है की आज भी नेता शब्द में केवल बुराई ही नहीं अच्छाई भी विद्धमान है भले ही वह यदाकदा ही देखने को मिलती है। मध्यप्रदेश के युवा मीडिया प्रभारी ने कृतिरुप में इसे प्रस्तुत कर दिखाया। उन्हें जैसे ही यह पता चला की उनके समर्थक ग्वालियर के चौराहों पर उनकी तस्वीर लगे बड़े बड़े होडिंग बैनर लगवा रहे हैं उन्होंने अपने अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक आग्रह पत्र जारी कर उन्हें ऐसा न करने और लगवाए होडिंग हटा लेने का आग्रह किया अपने पत्र में उन्होंने लिखा की जो खर्च वे इसपर कर रहे हैं उसे वर्तमान में राममंदिर निर्माण हेतु संचालित धन संग्रह अभियान में समर्पित करें। बस फिर क्या था समर्थकों को न केवल होडिंग लगाने का कार्य रोकना पड़ा बल्कि लगवाए होडिंग बैनर हटाना भी पड़े। निःसन्देह वर्तमान की चकाचौंध वाली राजनीति में ऐसा करना किसी भी नेता के लिए बेहद कठिन कार्य है लेकिन मध्यप्रदेश के मीडिया प्रभारी ने ऐसा करके बड़ा सन्देश दिया है ,इसकी सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है।
सभी बड़े नेताओ को भी प्रस्तुत करना चाहिए ऐसा ही आदर्श
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