ग्वालियर 7 दिसंबर 2025/एक तरफ प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक देश में विलुप्त हो चुके चीतों का कुनबा बढ़ाने के लिए करोड़ों फूंक रहे हैं उन्हें राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देकर इन्हें अफ्रीकन देशों से भारत लाया जा रहा है भारत में विलुप्त हो चुके चीतों का वापस बसाने की ये बड़ी पहल है ऐसे में इन्हें विशेष निगरानी में रखा जाता है। यह कूनो के जंगल से बाहर निकलते हैं तो भी वन विभाग का अमला इनके पीछे रहता है। दूसरी और उनके मरने की खबरें देश वासियों को झकझोर रही हैं ताजा मामला मध्य प्रदेश में ग्वालियर के घाटीगांव से सामने आया है यहां सिमरिया टांका पर रविवार सुबह एक कार ने सड़क पार कर रहे चीते को टक्कर मार दी। यह चीता गामिनी का शावक था, जिसके मुंह पर टक्कर लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शावक के साथ दूसरा चीता बाल- बाल बच गया। जिस चीते की मौत हुई उसका नाम केजी-3 बताया जा रहा है, उसके साथ मौजूद केजी-4 चीता लापता है।
हादसा सुबह सुबह हुआ जिस समय ज्यादा उजाला नहीं था। मौके पर डीएफओ ग्वालियर सहित पुलिस अधिकारी पहुंच गए हैं। बता दें कि काफी दिनों से कूनो से निकलकर चीतों का ग्वालियर में मूवमेंट है और यह घाटीगांव इलाके में घूम रहे हैं।
ग्वालियर के करीब करहिया थाना इलाके की गोलार घाटी में चीते नजर आए थे। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें दो चीते सड़क के किनारे गायों के झुंड के बीच नजर आए थे। इन्हें देखकर वहां से गुजर रहे लोग डर गए थे। कुछ लोगों ने मोबाइल से इनका वीडियो बना लिया था। चीतों के इलाके में होने की सूचना के बाद वन विभाग की टीम लगातार इन पर नजर बनाए हुए थी।
विश्व चीता दिवस पर कूनो नेशनल पार्क में सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा मादा चीता वीरा और उसके 10 महीने के दो शावकों को जंगल में छोड़ गया था। इसके बाद इनमें से एक चीता शावक मृत मिला था। जानकारी के मुताबिक शावक अपनी मां से अलग हो गया था, इसके बाद वह ऐसे इलाके में पहुंच गया था जहां अन्य जंगली जानवर। जानवरों से संघर्ष में ही उसकी मौत होने की आशंका जताई जा रही थी। इसके पहले ज्वाला के एक शावक की इसी तरह मौत हो गई वह अपनी मां से अलग होने के बाद इसी तरह मृत मिला था।
बता दें कि चीते राष्ट्रीय धरोहर हैंं। इन्हें अफ्रीकन देशों से भारत लाया गया था। भारत में विलुप्त हो चुके चीतों का वापस बसाने की ये बड़ी पहल थी। ऐसे में इन्हें विशेष निगरानी में रखा जाता है। यह कूनो के जंगल से बाहर निकलते हैं तो भी वन विभाग का अमला इनके पीछे रहता है।