सावन में बारिश होने से सांप बिलों के बाहर आ जाते हैं। ऐसे में सर्प दंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लोगों को सर्प से डर लगने लगता है। मान्यता है कि श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी को नाग देवता की पूजा करने से नागदंश का भय नहीं रहता है।
भोलेनाथ के प्रिय सावन के महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है नाग पंचमी का त्योहार। नागपंचमी और सोमवार दोनों ही दिन भगवान शिव की आराधना के लिए श्रेष्ठ होता है। इस बार सावन का सोमवार नागपंचमी के दिन है जो अपने आप में अदभुत संयोग है। माना जाता है सावन के महीने में नाग की पूजा करने, नाग पंचमी के दिन दूध पिलाने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं। यह भी मान्यता है कि नाग की पूजा करने से नागदंश का भय नहीं रहता है।
कई वर्षों के बाद 15 अगस्त और रक्षाबंधन श्रवण नक्षत्र के संयोग में मनाया जाएगा। एक अगस्त को पहला सिद्धि योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ सिद्धि योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग का संयोग है। नागपंचमी के दिन सुबह सबसे पहले नहा धोकर प्रसाद के लिए सेवई और चावल बना लें। इसके बाद एक लकड़ी के तख्त पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर नागदेवता की मूर्ति या तस्वीर रख दें। फिर जल, सुगंधित फूल, चंदन से अध्र्य दें। नाग प्रतिमा को दूध, दही, घृत, मधु, चीनी का पंचामृत बनाकर स्नान कराएं। प्रतिमा पर चंदन, गंध से युक्त जल अर्पित करें। नए वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, हरिद्रा, कुमकुम, चूर्णर्, ंसदूर, बेलपत्र, आभूषण और पुष्प माला, सौभाग्य द्व्र्य, धूप दीप, नैवेद्य, ऋतु फल, तांबूल चढ़ाएं और आरती करें।