उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान का चार दिवसीय ग्वालियर अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव सम्पन्न
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजेताओं को प्रदान किए गए पुरस्कार
साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों का किया गया सम्मान
मधुर स्मृतियों के साथ विदा हुए देश-विदेश से आए साहित्यकार
ग्वालियर के लिए सुखद और सकारात्मक संदेश दे गया साहित्य उत्सव

ग्वालियर 30 अगस्त। हमें अपनी भाषा को उन्नत करने के लिए उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करना होगा। इससे देश की सम्प्रभुता कायम रहेगी। क्योंकि सत्य की खोज, अन्वेषण और मानवीय मूल्यों की रक्षा श्रेष्ट और अनुकरणीय साहित्य से ही संभव है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रहित में साहित्य का सृजन हो। साहित्य से ही मानव जीवन, धर्म, सस्ंकृति और सभ्यता प्रतिलक्षित होती है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के द्वारा आईआईटीटीएम में आयोजित चार दिवसीय ग्वालियर अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के समापन सामारोह के बतौर मुख्यअतिथि यह बात कही।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं सेंट्रल अकेडमी स्कूल के संयुक्त तत्त्वावधान में हुए इस आयोजन में हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. बलवंत शांतिलाल जानी, फिल्मकार एवं उद्भव के ब्रांड एम्बेसडर पियूष मिश्रा, इंग्लैंड की साहित्यकार डॉ. परिन सोमानी एवं आईआईटीटीएम के डायरेक्टर डॉ. आलोक शर्मा एवं कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्रीधर पराडकर विशिष्ट अतिथि थे।
मुख्य अतिथि श्री मिश्रा ने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति और सभ्यता को उसके साहित्य से जाना जाता है। समाज व देश की समानता-असमानता, विसंगतिया एवं कु़़रुतियां सब साहित्य से ही परिलक्षित होती हैं। विभूतियों ने ग्वालियर व देश को जो उत्कृष्ट साहित्य दिया है उसके संवर्धन और संरक्षण का उद्भव सराहनीय एवं प्रशंसनीय कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जहां साहित्य होता है वहां न्याय होता है और जहां न्याय होता है वहां साहित्य होता है। साहित्य किसी शहर ही नहीं बल्कि देश का और आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शक होता है। सैंतीस सौ वर्ष पहले जिस ऋगवेद की रचना हुई थी वह आज पूरे विश्व में साहित्य के रूप में एक धरोहर है। साहित्य की गहराई सागर जैसी और ऊंचाई हिमालय की तरह है।
विशिष्ट अतिथि बलवंत जानी ने कहा कि जयपुर लिट्चेर फेस्टीवल सिर्फ और सिर्फ भारतीय साहित्य और संस्कृति की आलोचना का केंद्र बनकर रह गया है। जबकि साहित्य उत्सव के रूप में उद्भव का यह पहला प्रयास अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा है। क्योंकि भाषा का वैभव साहित्य से आता है और उद्भव ने यह कर दिखाया है। ग्वालियर उत्सव ने विधि, विधान, और क्रियाकलाप का आदर्श रूप प्रदर्शित किया है। साहित्यकारों के साथ ही बच्चों का इस उत्सव से जुड़ना सकारात्मक पहलू है।
मुख्य सरंक्षक पराडकर ने कहा कि आज की पीढी साहित्य से दूर हो रही है, उसके लिए जरूरी है कि आधुनिक परिवेश में उनकी जरूरत के मुताबिक साहित्य के साथ शब्दावली को परिवर्तित कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब लोक साहित्य की परिभाषा बदलनी होगी। जो लोगों को पसंद हो वैसा ही साहित्य गढ़ना होगा। क्योंकि समाज के साथ ही रहकर समाज को बदला जा सकता है। यह बात सच है कि विद्वान और समझदार में अंतर होता है। आप विद्वान हो सकते हैं लेकिन आपको लोगों की भावनाओं को समझना होगा उन्हें जानना होगा तभी साहित्य की सार्थकता सिद्ध होगी। ऐसे में यह भी जरूरी हो जाता है कि जीवन को साश्वत रखने की जो विद्या हो सकती है उसका संरक्षण आवश्यक है। साहित्य उत्सव इसका आधार है और साहित्य ही वह विद्या है जो हमारे संस्कारों और मूल्यों को कायम रखता है।
इससे पूर्व सेंट्रल अकेडमी स्कूल के प्राचार्य अरविंद सिंह जादौन ने स्वागत भाषण दिया। उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पाण्डेय ने अध्यक्षीय उद्बोधन एवं सचिव दीपक तोमर ने सचिवीय उद्बोधन दिया। सुरेंद्र पाल सिंह कुशवाह, मनोज अग्रवाल, आलोक द्विवेदी, मनीष मौर्य,राजेंद्र मुदगल, राजीव शुक्ला, शाहिद खान, जगदीश गुप्त एवं सुरेश वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजरानी शर्मा ने एवं आभार व्यक्त स्कूल के डायरेक्टर विनय झालानी ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथि ने साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया। साथ ही आयोजकों ने अतिथियों का सम्मान कर उन्हें स्मृति चिंह भेंट किए। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। जिसमें देवांशी कान्याल एवं तान्या डे ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। तो अंजना झा एवं समूह ने कत्थक की प्रस्तुति दी। इनके अलावा सेंट्रल अकेडमी स्कूल के विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह को भव्यता प्रदान की।
इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विजयी प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया गया।
इनका हुआ सम्मान
जगदीश सिंह तोमर
प्रकाश मिश्र
महेश कटारे
पियूष मिश्रा
डॉ. सुरेश सम्राट
पंडित सुरेश नीरव