नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पार्षद तथा ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के ज्येष्ठ भ्राता श्री देवेन्द्र सिंह तोमर की पार्थिव देह आज पंचतत्व में विलीन हो गई इससे पूर्व सेकड़ों की संख्या में उपस्थित उनके शुभ चिंतकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मंत्री जयभान सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष अभय चौधरी सहित अनेक विशिष्ट लोग उन्हें अंतिम विदाई देने उपस्थित थे। श्री सिंधिया और श्री नरेंद्र तोमर ने शोकाकुल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को ढाढंस बंधाते हुए शोक सांत्वना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री देवेन्द्र सिंह तोमर के निधन पर किया शोक व्यक्त
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के ज्येष्ठ भ्राता श्री देवेन्द्र सिंह तोमर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देवेन्द्र जी का सम्पूर्ण जीवन जन सेवा के प्रति समर्पित रहा। उनका निधन हम सबके लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत की पुण्यात्मा को शान्ति और शोकाकुल परिवार को यह वज्रपात सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
उल्लेखनीय है कि नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पार्षद तथा मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के भाई देवेंद्र सिंह तोमर का रविवार रात्रि को भोपाल के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था वे कुछ समय से फेफड़ों के संक्रमण के कारण बीमार चल रहे थे ।
रविवार को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी उनके लंग्स में इंफेक्शन बेकाबू होने के बाद उन्हें एयर लिफ्ट करके हैदराबाद ले जाने का निर्णय लिया गया था रविवार दोपहर पुलिस और जिला प्रशासन ने अपोलो हॉस्पिटल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया। दोपहर 2 बजे एयर एम्बुलेंस की मदद से उन्हें हैदराबाद ले जाने के लिए रवाना हुए थे ।
रास्ते में हालत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि एयर एम्बुलेंस की भोपाल में इमरजेंसी लैंडिंग कराना पड़ी थी । उन्हें भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया था ।
निधन के बाद श्री तोमर की पार्थिव देह को सोमवार की सुबह 6 बजे ग्वालियर लाया गया था
ऊर्जा मंत्री का पूरा मैनेजमेंट संभालते थे
देवेंद्र तोमर पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। पहले वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, बाद में भाजपा से जुड़ गए थे। ऊर्जा मंत्री के चुनाव का पूरा काम प्रबंधन उन्हीं के हवाले रहता था।