धनतेरस पर भगवान धनवंतरि की पूजा भी की जाती है। पंडितों का मत है कि इस दिन की गई खरीदारी अमृत के समान चिरस्थायी रहती है। किसी वस्तु की खरीदारी और भंडारण को 13 गुना फल देने वाला बताया जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार चंद्रमा व मंगल की कन्या राशि में युति से लक्ष्मी योग बना है। सूर्य व बुध के भी इसी राशि में रहने से बुधादित्य योग रहेगा। सूर्य के राशि परिवर्तन करने से तुला संक्रांति का योग भी बना है। वहीं, सूर्योदय से सर्वार्थ सिद्धि योग और शाम को प्रदोष काल रहेगा। डॉ. जोशी के मुताबिक भगवान कुबेर का प्राकट्य प्रदोष काल में माना जाता है। धनतेरस पर मंगलवार और प्रदोष का होना अति शुभ है। नए व्यापारिक अनुबंध व खरीदी समृद्धदायी रहेगी।
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यह है खरीदारी का शुभ योग
सुबह : 10:40 से 12:10 बजे, लाभ-अमृत
दोपहर : 1:20 से 4.50 बजे, शुभ
रात्रि : 5:55 से 9.10 बजे, लाभ
इन कामों के लिए भी शुभ
धनतेरस में ज्वैलरी यानी सोना, चांदी के अलावा, बर्तन, इलेक्ट्रानिक सामान व वाहन खरीदने का चलन नए प्रतिष्ठान का उद्घाटन भी आज के दिन कर सकते हैं। अल्प मृत्यु, रोग, कष्ट आदि के निवारण के लिए सायंकाल घर के बाहर या समी वृक्ष के नीचे दीपदान करें। इसके बाद ही लक्ष्मी, कुबेर आदि का पूजन करें।