
ग्वालियर/ देशभर में अयोध्या में बनने वाले श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सभी धर्म के लोगों में भारी उत्साह है। वहीं शहरवासी भी इस नेक काम में पीछे नहीं हैं। शहर में बचपन से लेकर 55 तक और युवाओं से लेकर वृद्धजन तक राम मंदिर निर्माण के लिए किए जा रहे धन संग्रह में पूरी श्रद्धा के साथ अपना योगदान दे रहे हैं। श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए किए जा रहे निधि संग्रह महाभियान के दौरान नगर के प्रमुख बाजार हों या पास की कॉलोनी या फिर गली मोहल्ले, सभी जगह लोग धन देने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं। धन संग्रह में अपनी आहुतियां देने के लिए अमीर-
गरीब कोई भी पीछे नजर नहीं आ रहा है। लोग इस मंदिर निर्माण कार्य के लिए खुले हाथ से दान दे रहे हैं। अब तो लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह कहां किया जा रहा है। शहर में जिस तेजी से निधि संग्रह हो रहा है उसे लगता है कि आने वाले समय में दान देने के लिए लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा।

महाभियान के तहत टोलियों के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सर्व समाज के साथ प्रबुद्धजनों के यहां पहुंचकर समर्पण का आग्रह कर रहे हैं। शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के कार्यवाह यशवंत इंदापुरकर, प्रांत सह शारीरिक प्रमुख श्याम प्रजापति, प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. जगजीत नामधारी, विभाग संघचालक विजय
गुप्ता, महानगर निधि संग्रह समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र बांदिल, अशोक पाठक, नवनीत शर्मा, रवि अग्रवाल, कमल जैन, पप्पू वर्मा, नवलकिशोर शुक्ला, मानसिंह जादौन, राकेश पांडे सहित अन्य वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन में टोलियां प्रबुद्धजनों के यहां पहुंचकर निधि संग्रह किया। साथ ही लोगों से समर्पण के लिए आग्रह भी किया। इस दौरान पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अरविन्द दूदावत, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, व्यापारी द्वारका प्रसाद गुप्ता, सनातन धर्म मंदिर के पूर्व अध्यक्ष गिर्राज किशोर गोयल, अग्रवाल हॉस्पिटल के संचालक एवं जीआर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. एसआर
अग्रवाल, डॉ. राहुल अग्रवाल, एजी ऑफिस के सेवानिवृत्त अधिकारी जगमोहन सिंह भदौरिया एवं उनकी पत्नी शकुंतला भदौरिया, पुलिस महानिरीक्षक अविनाश शर्मा के निज सचिव राकेश मोहन दीक्षित सहित कई स्थानों पर आमजन ने धनराशि समर्पित कर मंदिर निर्माण मेें अपना सहयोग दिया।
रामकाज के लिए चल रही थीं सांसें
शायद रामकाज के लिए ही 80 वर्षीय अंगद सिंह गुर्जर निवासी ग्राम राहुली बेहट मंडल की सांसें चल रहीं थीं। उनके पास जैसे ही समर्पण निधि एकत्रित कर रही टोली पहुंची और निधि संग्रह किया, उसके चंद मिनट बाद ही उनकी सांसें थम गईं। टोली को पता चला कि अंगज सिंह जी अब नहीं रहे। उससे ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे स्वयं भगवान श्रीराम ने उनके प्राणों को इसी पल के लिए थाम रखा था।


