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दक्षिण व पूर्व विधानसभा : भाजपा को देख लगता ही नहीं चुनाव नजदीक हैं,जनता के बीच गजब की सक्रीयता दिखाती कांग्रेस

प्रवीण दुबे

ग्वालियर/एक तरफ मध्यप्रदेश में सत्ताधारी  दल भाजपा ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर दक्षिण विधानसभा में चुनाव लड़ने के इच्छुक पार्टी नेताओं की लंबी होती सूची के कारण टेंशन में है तो दूसरी और उसके प्रतिद्वंदी दल कांग्रेस ने इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अपने तत्कालीन विधायकों को पूरी तरह से चुनाव के लिए एक्टिव कर दिया है। उल्लेखनीय है कि इन दोनो विधानसभा क्षेत्रों से पिछली बार हुए चुनावों में कांग्रेस के सतीश सिकरवार और प्रवीण पाठक ने जीत हासिल की थी। ग्वालियर पूर्व से सतीश सिकरवार ने मुन्नालाल गोयल को और  ग्वालियर  दक्षिण से प्रवीण पाठक ने भाजपा के नारायण सिंह को हराया था।

पूर्व विधानसभा से विधायक सतीश सिंह सिकरवार का चुनाव लड़ना पूरी तरह से पक्का होने के कारण वह दमखम के साथ जनता के बीच उतर गए हैं। उनके द्वारा विधानसभा में हाथ से हाथ जोड़ों’ पद यात्राः के द्वारा लोगों से मिलने ,उनकी समस्या सुनने,मौके से ही सम्स्याओं के समाधान का सिलसिला जोर शोर से चालू है इसे मिल रहे व्यापक जनसमर्थन ने भाजपा के समर्थकों को खासा परेशानी में डाल रखा है,इतना ही नहीं उनकी महापौर पत्नी भी लगातार जनता से संपर्क बनाए हुए हैं।
भाजपा की बात की जाए तो इस विधानसभा में अभी उसका प्रत्याशी तय नहीं है।जिस प्रकार की बयानबाजी चल  रही है उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि कई दावेदार सामने होने से सिर फुट्टवल की स्थिति बनती दिख रही है।
यहां जनता के बीच जनसंपर्क करने की कोई प्लानिंग नजर नहीं आती, समस्या सुनने और उनके समाधान का कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है साथ ही कार्यकर्ता भी मुंह फुलाए होने से समस्या खड़ी हो गई है,कार्यकर्ता को मनाने समझाने वाले ही दिखाई नहीं दे रहे हैं।
दक्षिण विधानसभा में भी वर्तमान में कांग्रेस विधायक है इस वजह से यह माना जा रहा है कि इस बार भी पार्टी उनको ही अपना उम्मीदवार  बनाएगी तस्वीर साफ होने की वजह से उन्होंने भी जनता के बीच संपर्क शुरू कर दिया है हालांकि वर्तमान विधायक प्रवीण पाठक के अतिरिक्त यहां से कांग्रेस के समीकरण कुछ बदल भी सकते हैं ऐसा इसलिए कि प्रवीण पाठक कांग्रेस के जिस सुरेश पचौरी गुड से आते हैं उनका वजन इस बार बेहद कमजोर माना जा रहा है ऐसी स्थिति में चेहरा बदल भी सकता है लेकिन इसकी संभावना कम है ।
फिलहाल तो वर्तमान विधायक की स्वच्छ छवि लोगों के सुख-दुख में लगातार खड़े रहने का इतिहास और मिलनसार व्यक्तित्व का लाभ तो कांग्रेस को मिल ही रहा है जोकि आगामी चुनाव में उसके लिए रास्ता आसान कर  सकता है।
भाजपा की बात करें तो दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से सर्वाधिक उम्मीदवार दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि वह  तो दक्षिण से ही चुनाव लड़ेंगे पार्टी टिकट दे या ना दे।
उधर दूसरी ओर नारायण सिंह कुशवाह पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से हारे थे और इस बार भी दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा पिछले चुनाव में बागी होकर मैदान में उतरी पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता भी चुनाव की दौड़ में शामिल हैं इनके अलावा लगभग आधा दर्जन नाम ऐसे हैं जो इस विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं।

ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए बड़ी विषम परिस्थितियां निर्मित हो गई है यहां भी पूर्व की ही तरह जनता की समस्याएं सुनने उनका निवारण करने तथा तमाम सरकारी कल्याणकारी योजनाओं  के प्रचार और जनता के बीच बताने का काम लगभग ठप्प पड़ा है ।

जहां तक इन विधानसभा क्षेत्रों की भोगोलिक स्थिति का सवाल है तो ग्वालियर पूर्व विधानसभा का संपूर्ण भाग ग्वालियर के भीड़ भरे शहरी इलाकों का प्रतिनिधित्व करता है कमोबेश यही स्थिति ग्वालियर दक्षिण की भी कही जा सकती है। यह दोनों विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां से ग्वालियर की सभी सातों सीटों पर हवा बनती है।
फिलहाल प्रचार,संपर्क,समस्या समाधान तथा सक्रियता के मामले में यहां कांग्रेस सत्ताधारी दल से आगे निकलती दिख रही है  ।भाजपा के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी का लाभ भी कांग्रेस को मिल रहा है। हालांकि चुनाव अभी दूर है और ऊंट किस करवट बैठेगा इसका अंदाजा अभी लगाना थोड़ी जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि पूर्व और दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में अगर भाजपा ने  अपनी अंदरूनी कलह समाप्त करके सक्रियता नहीं दिखाई तो उसे आगामी चुनाव भारी पड़ सकता है।
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