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721 साल बाद धार का पहला ‘शुक्रवार’… भोजशाला में वाग्देवी के जयकारे, अखंड पूजा और महाआरती

धार 22 मई 2026/मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई को धार भोजशाला को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित कर दिया था। जिसके बाद आज पहला शुक्रवार है। हिंदू संगठनों ने आज हवन, पूजन और महाआरती का विशेष आयोजन किया , जिसे देखते हुए पूरे परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई । सुबह से ही हिंदू पक्ष के लोगों का भोजशाला पहुंचना शुरू हो गया था । बता दें, ये 721 साल बाद पहला ऐसा शुक्रवार है, जब परिसर में हिंदुओं की एंट्री हुई और  महाआरती हो रही है।

हवन-पूजन और महाआरती का कार्यक्रम

हिंदू संगठनों ने आज भोजशाला में दिन भर हवन-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया है। जिसके बाद शाम को महाआरती होगी। भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि सभी श्रद्धालु दोपहर में धानमंडी चौराहे पर एकत्र होंगे और वहां से जुलूस के रूप में भोजशाला पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।

HC ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला

बता दें, मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर का मामला दशकों पुराना है। इस मामले में मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वह पूरा परिसर उनका है। लेकिन हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जगह को देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना। जिसके बादमुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी।

वहीं, 15 मई को दिए गए 242 पन्नों के फैसले में हाईकोर्ट ने भोजशाला को 11वीं शताब्दी के परमार काल के राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी मंदिर करार दिया। इसी के साथ कोर्ट ने 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी।

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