Homeसम्पादकीयसंकट की इस घड़ी में ऐसा कार्य व्यवहार ठीक नहीं

संकट की इस घड़ी में ऐसा कार्य व्यवहार ठीक नहीं

प्रवीण दुबे

किसी  ने ठीक ही कहा है विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति का सबसे बड़ा सहारा उसका धैर्य होता है। पिछले अड़तालिस घण्टे के दौरान देश प्रदेश के तमाम छोटे बड़े शहरों से कोरोना संक्रमण से त्रस्त मानवता की जिस प्रकार ख़ौफ़ज़दा तस्वीरें सामने आ रही हैं उसने आम आदमी के बीच भय का वातावरण निर्मित कर दिया है।

रांची ,भोपाल ,बीड़ ,सहित देश के कई शहरों के श्मशानों में कतारबद्ध जलती चिताएं अस्पतालों में मची चीख पुकार व अपने परिजनों की लाशें खोजते बदहवास लोगों के मीडिया में वायरल होते तमाम ऑडियो और वीडियो किसी के भी शांत मन को बेचैन करने वाले कहे जा सकते हैं।

 

इस महामारी के बीते दो दिनों की तुलना इस सदी की भीषण दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी में काल का शिकार बने लोगों की भयावहता से की जा रही है। देश के एक बड़े अखबार ने एक तरफ कोरोना से जलती कतारबद्ध चिताएं तो दूसरी ओर भोपाल गैस त्रासदी के समय मरे लोगों के शवों की तुलनात्मक तस्वीर प्रकाशित की है।

हो सकता है एक अखबार की दृष्टि से यह तस्वीर ठीक हो लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की ऐसे समय जब आम आदमी का का मन आप्लावित है,वह महामारी के इस काल में कहीं न कहीं अपने आसपास मौत की आहट से भयभीत है ,इस तरह की सनसनीखेज तस्वीरों को प्रकाशित करना कहां तक उचित है ? इसबारे में मीडिया जगत से जुड़े जिम्मेदार लोगों को गम्भीरता से विचार करने की जरूरत है।

नकारात्मक माहौल में मन को शांत करने वाली व सकारात्मक तस्वीरों और समाचारों का महत्व बेहद बढ़ जाता है।केवल मीडिया ही नहीं इस समय समाज के हर क्षेत्र से जुड़े लोगों खासकर जनप्रतिनिधियों को भी धैर्य और संयम बरतने की आवश्यकता है। निःसन्देह जिस व्यक्ति का निकट सम्बन्धी अव्यवस्था का शिकार होता है वही उस समय पैदा होनेवाली मानसिक पीढ़ा को महसूस कर सकता है।

लेकिन यही एक नेता सामाजिक कार्यकर्ता के धैर्य की परीक्षा का भी समय होता है। पिछले दो दिनों में प्रदेश की राजधानी भोपाल से जन प्रतिनिधियों के जो वीडियो वायरल हुए हैं उसे देखकर ठीक विपरीत आचरण दिखाई देता है।

इन वायरल वीडियो में पहले एक वर्तमान विधायक और पूर्वमंत्री कोरोना के इलाज में जुटे डॉक्टर से उलझते दिखाई दे रहे हैं तो एक अन्य वीडियो में एक पूर्वमंत्री बीच सड़क पर महिला कांस्टेबल को मास्क लगाने  की समझाइश पर शाम तक सस्पेंड कराने की धमकी देते नजर आ रहे हैं , एक वर्तमान विधायक प्रशासन के निर्णय को लागू कराने निकली टीम के कार्य में बाधा डालते दिख रहे हैं।

 

आज की विपरीत परिस्थितियों में हमारे फ्रंट लाईन वर्कर के साथ इस प्रकार का व्यवहार कतई उचित नहीं कहा जा सकता। ये लोग इस भीषण महामारी के समय हमारी और आपकी रक्षा के लिए अपनो से दूर संक्रमण के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर डयूटी दे रहे हैं।

जरा कल्पना कीजिए इनके बच्चों,पत्नी व अन्य घरवालों की मनःस्थिति के बारे में समाज के प्रत्येक वर्ग को इन फ्रंटलाइन वर्कर के मान सम्मान से लेकर हर प्रकार की जरूरतों की चिंता करने का संकल्प लेना होगा।

सरकार अपने स्तर पर यह कर भी रही है लेकिन जबतक समाज की इसमें सहभागिता नहीं होगी तब तक इस प्रकार की घटनाएं समाज को शर्मसार करती रहेंगी।

यह समय राजनीतिक दुर्भावना से ऊपर उठकर सोचने का भी है। बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर सरकार ,क्राइसेस मेनेजमेंट ग्रुप और स्थानीय प्रशासन की निंदा का अभियान लगातार चला रहा है। उनका कहना है जहां चुनाव हैं वहां कोरोना प्रतिबंध क्यों आरोपित नहीं किये जा रहे ?

बात काफी हद तक सही भी है लेकिन यह भी उतना ही सच है की कोरोना की नई लहर के आंकड़े परेशान कर देने वाले है।  कोरोना ने हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। लाखों लोग संक्रमण का से ग्रसित हैं।

देश में मंगलवार को 1 लाख 85 हजार 104 नए मरीज मिले। 82,231 ठीक हुए और 1,026 की मौत हो गई। इस तरह एक्टिव केस, यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 1 लाख 1 हजार 835 की बढ़ोतरी हुई। नए मरीजों का आंकड़ा तो हर दिन नई ऊंचाई पर पहुंच ही रहा है, लेकिन पहली बार एक्टिव केस में भी एक लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

मौत का आंकड़ा भी इस साल पहली बार 1,000 के पार गया है। पिछले साल महामारी की पहली लहर में सबसे ज्यादा 1,281 मौतें 15 सितंबर को हुई थीं।

मध्यप्रदेश की बात करें तो राज्य में मंगलवार को 8,998 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। 4,070 लोग रिकवर हुए और 40 की मौत हो गई। अब तक यहां 3.53 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 3.05 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। 4,261 मरीजों की जान चली गई। 43,539 मरीजों का इलाज चल रहा है।

ग्वालियर अंचल में भी मंगलवार को संक्रमित मरीज 800 के पार जा पहुंचे मरने वालों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। आखिर यह कैसे रुकेगा ? क्या लोगों को संक्रमित होने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ देना चाहिए ?

हम सभी को यह याद रखना चाहिए की “जान है तभी जहान है” । हम और आप जब तक शारीरिक  मानसिक रूप से स्वस्थ्य होंगे तभी बाजार है व्यापार है घरबार है। अपनी नहीं तो कम से कम अपनों के बारे में सोचिए चंद दिनों की थोड़ी सी परेशानी आपको व आपके परिवार को जीवन पर्यंत सुरक्षित रख सकती हैं।

अतः हम तो आपसे यही कहेंगे “दो गज की दूरी मास्क है जरुरी घर पर ही रहें सुरक्षित रहें” हां एक जरुरी बात और यदि आप वैक्सीन वाले एज ग्रुप में आते हैं तो उठिए बिना समय गंवाए अपने पास के वैक्सीनेशन सेंटर पर जाइए और टीकाकरण कराइए यह पूर्णतः सुरक्षित है।

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