Homeग्वालियर अंचलताकाझांकी : नेताजी का ऑडियो उवाच

ताकाझांकी : नेताजी का ऑडियो उवाच

 प्रवीण दुबे

नेताजी का ऑडियो उवाच

अपने देश में नेताजी ये कहें तो सही वो कहें तो सही उन्हें आम को इमली कहने का अधिकार है और बेचारी जनता को हां में हां मिलाने की मजबूरी । सोशल मीडिया का एक वायरल ऑडियो ऊपर लिखी बात पर सत्यता की मुहर लगाता दिखाई देता है। इसमें नेताजी की रोबीली आवाज और कटीला अंदाज भाई क्या कहने , वे जान की कीमत,तमंचे का लायसेंस, शादी ब्याह में लुगाइयों सालियों के बीच जलवा ओर तेरहवीं ….. बस बस हमने पहले ही लिखा है वो ये कहें तो सही वो कहें तो सही।

 

 

मजबूरी ने बनाया मैसेंजर

 

               

अपने कमल दल वाले नेताजी बड़े बेचारे नजर आ रहे हैं करें तो क्या करें ऊपर वालों का फरमान जो आया है ,धरी की धरी रह गई सारी वरिष्ठता मिट्टी में मिल गया प्रचारकी के समय सीखा संगठन का ज्ञान, बेचारे मैसेंजर की भूमिका निभा रहे हैं वह भी उनके लिए जिन्हें वे कल तक नोसिखिये समझते थे आज कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। महाराज का हाथ और स शर्त एंट्री का कमाल जो न कराने को मजबूर कर दे ।

 

  बिग बॉस की परेशानी

अपने बड़े अस्पताल का गुमनाम पत्र ऐसी खलबली मचाएगा यह तो किसी ने नहीं सोचा था । डॉक्टर साहब की धड़कने तो बढ़ी साथ ही अपने बिग बॉस के माथे तक पर पसीना छलछला आया । घबराहट ऐसी की नजदीकी रिश्ते से भी मुंह मोड़ना पड़ा। अब सुना है कि पत्र की सत्यता को परखने की कमान भी  सम्भाल ली गयी है  लेकिन मामला दबाने में ही भलाई  का सार सामने आता दिख रहा है। ऐसा करना उनकी मजबूरी बन गया है। जितना ही भीतर जा रहे हैं उतना ही  घबरा भी रहे हैं। कहीं मुख्यमंत्री तो कहीं बिग बॉस तो कहीं संगठन के प्यारे दुलारे डॉक्टर साहब ,हम तो यही कहेंगे चुपचाप बैठिए नहीं तो हमाम में सब…..

 

 धरी रहगई अफसरशाही

अपनी स्मार्ट सिटी की मेडम साहिबा तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही। भला इन्हें कौन समझाए इनकी इस स्मार्ट वर्किंग स्टायल ने बड़े साहब के होश फाख्ता कर दिए हैं। शहर में महाराज बाड़े से लेकर सावरकर सरोवर तक चौपाटी के चटखारे से लेकर थीम रोड की सुंदरता तक मेडम ही मेडम  जो छाई हैं। कलेक्ट्रेट वाले साहब हों या मोतीमहल वाले  समझ नहीं आ रहा क्या करें बेचारे सड़क के ट्रैफिक और बाबुओं की फाइलों तक सिमटकर रह गई साहिबी से टेंशन में हैं। फ़िलहाल हम तो यही कहेंगे इस स्मार्ट शक्तिअवतार के सामने धरी की धरी रह गई अफसरशाही।

 

 अदभुत कलाबाज मंत्री जी

आज के सोशल मीडिया युग में जिस नेता को खबरों में बने रहने का गुर नहीं मालूम वह सफल नहीं कहा जा सकता इस मामले में अपने ग्वालियर वाले मंत्री जी पूरी तरह ऊर्जा से सराबोर दिखाई देते हैं। खबरों में बने रहने के ऐसे ऐसे अजीज नुस्खे उनके पास हैं की मीडिया दिन रात उनके पीछे दौड़ लगाने को मजबूर है पता नहीं किस समय मंत्रीजी नाचने लगें,नसेनी लगाकर खम्बे पर चढ़ जाएं, खटिया डालकर लेट जाएं और तो और कब टॉयलेट साफ करने लगें ।  निश्चित ही श्रीमान मंत्री महोदय शिवराज सरकार की एक बड़ी लोकतांत्रिक खोज कहे जा सकते हैं उनमें मीडिया में छाए रहने की अदभुत कला है । समस्या का समाधान हो न हो विकास योजनाएं धरातल पर उतरे न लेकिन मंत्रीजी अपने कला कौशल के सहारे छाए हुए हैं। वे ये भी भूल गए हैं की मध्यप्रदेश बहुत बड़ा है वो केवल ग्वालियर से भोपाल तक ही नहीं अतः अपनी कला का कार्य विस्तार कीजिए और एकबार ही सही पूरे प्रदेश का दौरा तो करिए ताकि पूरा मध्यप्रदेश आपकी इस अदभुत कला का आनंद प्रत्यक्ष ले सके।

@ Praveen dubey shabdshaktinews
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