भोपाल : 10 जुलाई /पंजाबी लोकगीत व लोक परम्पराएं भारतीय विरासत की अमूल्य धरोहर है क्योंकी भारत की विभिन्न संस्कृतियों में अनेकता होने के बावजूद एकता के दर्शन होते है । उक्त उदगार मध्यप्रदेश पंजाबी साहित्य अकैडमी की डायरेक्टर श्रीमती नीरू सिंघ ने व्यक्त किया उन्होंने आगे बताया सँस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर वचनबद्ध है कि प्रदेश में सभी भाषाओं का विकास हो ।
इंदौर के शाने ए विरासत ग्रुप के कलाकारों द्वारा गमक कार्यकम के अंतर्गत पंजाबी लोकगीत और लोक परम्पराओं पर आधारित कार्यक्रम पेश किया गया । जिसमे पारिवारिक रिश्तों के अलावा लोक गीतों में जिंदुआ, मिटी का बावा, जागो लोहड़ी , चरखा,घोड़ी सुहाग,टप्पे ,बोलियां गायन किया गया। विवाह के अवसर पर गाये जाने वाले प्राचीन लोकगीत भी गाये गये । कार्यक्रम के निर्देशक रतनजीत सिंघ शैरी ने बताया कि , पंजाबी संगीत और संस्कृति ने विश्व मे अलग पहचान बनाई है । क्योंकि जोशीली धुन पर हर कोई थिरकने लगता है ।
विक्रमजीत सिंघ, जीत सलूजा,हरदीप ईशर,संजम खनूजा,दलजीत कौर सूदन,बरजिंदर कौर , कुलवंत कौर,तरनदीप मलिक, रश्मि छाबड़ा, रविंद्र कौर,हरविंदर कौर अशमित रंधावा,जसप्रीत बाली,सुरजीत कौर , हरविंदर राखरा कलाकारों कार्यक्रम में सहयोग दिया

