नई दिल्ली /भारत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाने तथा भारत की गौरवशाली साहित्य एवं सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित कराने के उद्देश्य से स्थापित अंतरराष्ट्रीय संस्था हिंदी साहित्य भारतीय की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारणी की घोषणा आज संस्था के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार व उत्तरप्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री श्री रविन्द्र शुक्ल ने दिल्ली में आयोजित संवाददाता। सम्मेलन में की। इसके साथ ही हिंदी साहित्य भारती द्वारा देश के तमाम प्रमुख शहरों एवं ३२ देशों में मिलाकर भारत के सभी प्रदेशों में जिले स्तर तक पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया गया। आज घोषित कार्यकारिणी में मध्यप्रदेश से वरिष्ठ समाजसेवी व पूर्व राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी को मार्गदर्शक मंडल में ,वरिष्ठ पत्रकार लेखक प्रवीण दुबे को मीडिया संयोजक व विकास दवे को शामिल किया गया।
हिंदी साहित्य भारती की अंतर्राष्ट्रीय केन्द्रीय कार्यकारिणी की सूची
1•जगद्गुरु राजराजेश्वर,हरिद्वार
2• पूज्य स्वामी डॉ शाश्वतानंद जी गिरि महामण्डलेश्वर, कुरुक्षेत्र हरियाणा
3•पूज्य स्वामी यतींद्रानंद महाराज महामण्डलेश्वर ,उत्तराखंड
4• श्री गंगाधर शास्त्री, जम्मु।
5• श्री केसरी नाथ त्रिपाठी (पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व अध्यक्ष उ•प्र• विधानसभा),वरिष्ठ साहित्यकार।
6• डॉ कप्तान सिंह सोलंकी,(पूर्व महामहिम राज्यपाल हरियाणा)
7• डॉ• शेखर दत्त (पूर्व महामहिम राज्यपाल)आइ एक एस
8• डॉ अरविंद कुमार कुलपति महारानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
9•डॉ•रत्नाकर नराले,वरिष्ठ साहित्यकार
10•पद्य श्री डॉ• विष्णु पंड्या जी अध्यक्ष गुजरात अकादमी
11• प्रो• सुरेन्द्र कुमार दुबे ,पूर्व कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय
12- प्रवीण दुबे वरिष्ठ पत्रकार, लेखक , मीडिया संयोजक
“हिंदी साहित्य भारती” विदेश कार्यकारिणी
1• प्रभारी- डॉ करुणाशंकर उपाध्याय,हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय मुंबई।
2•सह प्रभारी- डॉ•कुमुद रामानंद मंडल,पूर्व निदेशक हरियाणा साहित्य अकादमी।
• मार्गदर्शक मंडल-
1• डॉ• रत्नाकर नराले,प्रख्यात चिंतक और पुस्तक भारती संस्थान के संस्थापक, टोरेंटो।
2•प्रो बिनोद मिश्रा, महासचिव हिंदी सचिवालय।
3• डॉ ग्लानी श्रोत्रिय,इजरायल
4•डॉ रामेश्वर सिंह,अध्यक्ष भारत ,रुस मैत्री संघ,मास्को।
5• प्रो•नीलु गुप्ता,हिंदी विभागाध्यक्ष डीएंजा, कैलिफोर्निया।
अध्यक्ष- प्रो• नवीन चंद्र लोहानी,विभागाध्यक्ष हिंदी,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ।
उपाध्यक्ष-1• प्रो गीता शर्मा, पूर्व निदेशक केन्द्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली।(भारत)
2• श्री डी एन पाठक,तंजानिया।
3•श्री हेरम्ब कुलकर्णी (फिनलैंड)
4•डॉ सुधांशु शुक्ल अध्यक्ष भारतीय सांस्कृतिकऔर संबंध परिषद पीठ,वारसा (पोलैण्ड)
5•श्री तेजेन्द्र शर्मा ,प्रख्यात कहानीकार और संस्थापक (कथा यु•के•) इंग्लैंड
अंतर्राष्ट्रीय संयोजकों की सूचि
अमेरिका
1•डॉ नीलु गुप्ता,
2•डॉ मीरा सिंह
फीजी
श्री मती मनीषा रामरखा, हिंदी प्राध्यापिका।
•न्यूजीलैंड
रोहित कुमार हैप्पी हिंदी सेवी,पत्रकार।
•दक्षिण अफ्रीका
1•शिवनाथ हीरालाल,हिंदी सेवी,संपादक।
2य• प्रो ऊषा देवी शुक्ला,दर्वन विश्वविद्यालय, साउथ अफ्रिका।
•सिंगापुर
डॉ संध्या सिंह,हिंदी प्रवक्ता,सिंगापुर विश्वविद्यालय, सिंगापुर को शामिल किया गया है।
विस्तृत कार्यकारणी इस प्रकार है।
संस्था के उद्देश्य
चर्चा के दौरान डॉ रवीन्द्र शुक्ल ने कार्यकारिणी की घोषणा के साथ प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए बताया की उनके साथ देश के अनेक विद्वानों ने हिन्दी भाषा एवं हिन्दी साहित्य के उत्थान का संकल्प लेकर १५ जुलाई २०२० को हिन्दी साहित्य भारती नामक संस्था का गठन किया। अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ३५ देशों में हिन्दी साहित्य भारती सक्रिय है और भारत के २७ प्रदेशों में हमारी विधिवत रूप से गठित प्रदेश कार्यकारिणीयाँ सांगठनिक और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय हैं तथा देश के शेष प्रदेशों में संयोजक एवं प्रभारी नियुक्त किए जा चुके हैं जो गठन की प्रक्रिया में सक्रिय हैं। अनेक प्रदेशों में जनपदों और महानगरों में भी हमारा संगठन खड़ा हो चुका है।
१४ सितम्बर २०२० से १४ अक्टूबर २०२० तक *हिन्दी मास व्याख्यानमाला* का आभासी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिदिन अलग-अलग विद्वानों ने विभिन्न विषयों पर रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान दिये। अक्टूबर मास में ही *धर्म बनाम छद्म धर्मनिरपेक्षता*, *साहित्य और संस्कृति का अन्तःसम्बन्ध* एवं *संस्कार और संस्कृति* विषयों पर साप्ताहिकी के अंतर्गत अनेक शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने तार्किक विवेचना प्रस्तुत की। इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त हिन्दी साहित्य भारती द्वारा *पुस्तक समीक्षा*, *महापुरुषों की जयंती* और युवा साहित्यकारों के लिए *साहित्यिक प्रशिक्षण* के कार्यक्रम भी आयोजित किये गये।
अत्यन्त गौरव का विषय है कि हिन्दी साहित्य भारती से इस समय अनेक पूर्व राज्यपाल, अनेक विश्विद्यालयों के कुलाधिपति, कुलपति, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध साहित्यकार, नवोदित प्रतिभाशाली साहित्यकारों के अतिरिक्त अनेक हिन्दीप्रेमी और साहित्यनुरागी तन-मन-धन से तथा पूर्ण निष्ठा एवं समर्पणभाव से जुड़े हैं।
*संस्था के उद्देश्य*
संस्था के प्रमुख उद्देश्य निम्नवत हैं-
१-भारत के गौरवशाली साहित्य एवं सांस्कृतिक चेतना को विश्व पटल पर प्रतिष्ठा दिलाना।
२- भारत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाना तथा इसके लिए आवश्यक कार्य योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन करना।
३- वैश्विक स्तर पर हिन्दी की महत्ता (जिसमें भारत की सभी क्षेत्रीय बोलियाँ भी शामिल हैं) स्थापित करना और इस हेतु हिन्दी भाषा की पुनर्प्रतिष्ठा के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना।
४- हिन्दी एवं भारत की सभा भाषाओं के साहित्यकारों को वैश्विक एवं राष्ट्रीय पटल पर प्रतिष्ठा दिलाना तथा समाजोपयोगी साहित्य को भिन्न-भिन्न कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल कराना।
५- हिन्दी के समृद्ध किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर साहित्यकारों की उच्च स्तरीय कृतियों को प्रकाशित कराने की व्यवस्था कराना।
६- विश्व के हिन्दी साहित्यकारों को एक साथ एक मंच पर लाकर साहित्य के प्रदूषण को समाप्त करना।
७- विश्व के श्रेष्ठ साहित्यकारों के माध्यम से मानवता के कल्याण हेतु भारत के आदर्श मानवीय जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचना तथा देश के बौद्धिक वातावरण को सकारात्मक दिशा देना।
८- *”इदं न मम, इदं राष्ट्राय”* तथा *”माता भूमि: पुत्रोहम पृथ्विया:”* के मंत्र को केंद्र में रखकर हिन्दी में साहित्य रचना करने वाले साहित्यकारों को प्रेरित करना, जिसके लिए पुरस्कार और प्रशिक्षण आदि का आयोजन करना।
९-हर प्रदेश के उत्कृष्ट हिन्दी साहित्यकारों को देश तथा विदेश के मंचों पर स्थान दिलाना।
१०- हिन्दी भाषा, हिन्दी साहित्य तथा हिन्दी के साहित्यकारों के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, परिसंवाद, साहित्यकार सम्मेलन आदि आयोजित करना।
*हिन्दी साहित्य भारती के आयाम*
हिन्दी साहित्य भारती के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में निम्न आयामों के माध्यम से निरन्तर गतिविधियाँ चल रही हैं।
*१- राष्ट्रवन्दन, अतीत का अभिनन्दन*
इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे महान साहित्यकारों का भावपूर्ण स्मरण किया जाता है, जिनके प्रेरक व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में उतना प्रचार- प्रसार नहीं हो पाया, जिसके वे हकदार थे।
*२- राष्ट्रवन्दन, वर्तमान का अभिनन्दन*
इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे श्रेष्ठ साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व का विवेचन किया जाता है, जो वर्तमान समय में समाज और राष्ट्रहित में साहित्यसृजना कर रहे हैं। ऐसे रचनाकारों के बारे में देश के लोगों विशेष रूप से युवा साहित्यकारों को जानकारी होनी ही चाहिए, इसलिए साप्ताहिक रूप से यह कार्यक्रम निरन्तर चल रहा है।
*३- काव्य प्रतिभा सम्मान*
देश के प्रतिभाशाली कवियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना इस आयाम का उद्देश्य है।
*४- विविध विधा प्रशिक्षण कार्यक्रम*
युवा और नवोदित साहित्यकारों के लिये विविध विधाओं में लेखन की बारीकियों को समझने के लिए विशेषज्ञ साहित्यकारों और विद्वानों के मार्गदर्शन में समय- समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इस क्रम में *काव्य शिल्प प्रशिक्षण* का आयोजन किया जा चुका है। भविष्य में ललित निबन्ध, कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, यात्रा-संस्मरण आदि विधाओं में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
*५-पत्र-लेखन अभियान*
भारत में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का संवैधानिक अधिकार दिलाने के आग्रह के लिए महामहिम राष्ट्रपति जी के नाम ऑनलाईन और ऑफलाईन दोनों प्रकार से पत्र-लेखन का अभियान चलाया जा रहा है। अत्यन्त हर्ष का विषय है कि अभी तक पूरे देश में हजारों गणमान्य व्यक्ति पत्र-लेखन अभियान का हिस्सा बन चुके हैं।
*६-सदस्यता अभियान*
हिन्दी साहित्य भारती का सदस्यता अभियान भी प्रारम्भ हो चुका है। देश-विदेश में ऑनलाईन और ऑफलाईन दोनों प्रकार से सदस्यता ली जा रही है।
*७- संगोष्ठियों का आयोजन-* देश के साहित्यिक प्रदूषण समाप्त करने हेतु भिन्न-भिन्न विषयों पर केन्द्र, प्रदेश, प्रान्त एवं जनपद इकाईयों द्वारा निरन्तर संगोष्ठियों का आयोजन करना ।










