प्रवीण दुबे
काबुल गए मुगल बन आए बोलन लागे वानी
आब आब कर कह मरे ,सिरहाने रखा था पानी
आप सोच रहे होंगे भला आज काबुल की याद क्यों आ रही है ? तो बता देता हूँ काबुल आज पूरी दुनिया में इस कारण चर्चा में है क्यों कि वहां कट्टर इस्लामिक आतंकवादी संगठन तालिबान ने बम गोली बंदूक के द्वारा हिंसा की दम पर दुनिया में सर्वमान्य वहां की सरकार को बेदखल करके अपना आतंकी परचम फहरा दिया है। वहां अफरा तफरी का माहौल है और वहां जा बसे
भारत के तमाम वाशिंदे बीती रात से वापस भाग रहे हैं। ऊपर शुरुआत में लिखी कविता की पृष्ठभूमि में ऐसे ही घबराए हुए भारतीयों की ओर इशारा करने की हमारी कोशिश है,जिस प्रकार अफगानी भाषा में पानी को आब कहते हैं और बीती रात काबुल की तालिबानी हिंसा से जैसे तैसे बचकर भारत आए लोग मीडिया के सवालों का जवाब हिंदी की जगह अफगानी भाषा में दे रहे थे उसी दौरान उसके द्वारा पानी को आब का सम्बोधन दिया गया बस यही वजह रही कि आज तालिबानी हिंसा और तबाह होते एक इस्लामी मुल्क पर जब हमने कलम चलाई तो सबसे पहले अपने आप यह पुरानी कविता की चंद पंक्तियां लिख दी,वैसे यहां यह भी बताना बेहद जरूरी है कि पहले अफगानिस्तान भारत का ही भू भाग हुआ करता था और यहां के कांधार प्रदेश का जिक्र हमने महाभारत में भी सुना है। कौन भूल सकता है उस काबुलीवाला कहानी को , हमारे शहरों की गलियों में घूम घूमकर हींग, मेवा बेचते अफगानी पठानों की विशिष्ट शैली आखिर कौन भूल सकता है,भारत खंड खंड क्या हुआ अफगानिस्तान
भी उसी तरह मुगलिया लुटेरों का शिकार बना और भारत से दूर होता चला गया। खैर यह इतिहास की बातें हैं अभी तो अफगानिस्तान की वर्त्तमान दुर्दशा पर चर्चा बेहद जरूरी है । यहां पिछली 4 मई से तालिबान जो कुछ कर रहा है और पूरी दुनिया जिस प्रकार इस मुल्क का चीरहरण होते देख रही है वह बेहद ही शर्मनाक कहा जा सकता है। 1 मई से अमरीकी सैनिकों की घर वापसी शुरू हुई थी तीन दिन बाद ही 4 मई से आतंकी संगठन तालिबान ने यहां हिंसाचार शुरू करके लोकतांत्रिक ढंग से चुनी सरकार को बेदखल करने का खूनी खेल अंजाम दिया और पूरी दुनिया के मुल्क चुपचाप इसे देखते रहे। यह दुनिया के उन मुल्कों के मुंह पर भी तमाचा कहा जाएगा जो आए दिन पूरी दुनिया में पैर पसार रहे आतंकी व आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर उसे समाप्त करने की बात करते हैं। खासकर अफगानिस्तान के घटनाक्रम ने दुनिया के उन तमाम इस्लामिक मुल्कों को भी बेनकाब करके रख दिया है जो
फिलिस्तीन, कश्मीर जैसे मामलों पर छाती पीट विधवा विलाप करते हैं यही इस्लामिक मुल्क आतंकी तालिबान की एक इस्लामिक देश अफगानिस्तान पर बर्बरता के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलते इनका इस्लामी संगठन उस समय मुंह पर ताला लगा लेता है जब पाकिस्तान खुलेआम तालिबान को सहयोग की नीति को अंजाम दे रहा है। तालिबानी आतंकियों ने भारत को भी सीधी धमकी देकर आगाह किया है कि वह अफगानिस्तान में अपनी सेना न भेजे। अब भारत को इस घटनाक्रम पर अपनी भूमिका को स्पष्ट करने की जरूरत है। यह इस कारण भी आवश्यक है क्यों कि तालिबानी आतंकियों द्वारा अफगानिस्तान को कब्जाने के बाद पाकिस्तान उनका भारत के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा । यह भी साफ हो चुका है की तालिबान को चीन से भी सहयोग मिल रहा है। यह स्थिति भारत के लिए बेहद खतरनाक कही जा सकती है। भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके खिलाफ माहौल तैयार करने की रणनीति को और तेज करना होगा। जैसा कि सर्वविदित है बीते सालों में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 500 छोटी-बड़ी परियोजनाओं में निवेश किया है जिनमें, स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, बच्चों के होस्टल और पुल शामिल हैं. यहां तक कि भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में गणतंत्र की निशानी के तौर पर खड़ा संसद भवन, सलमा बांध और ज़रांज-देलाराम हाइवे में भी भारी निवेश किया है.अतः तालिबान के आने से भारत को भी बड़ी आर्थिक हानि होने का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि चंद रुपयों के स्वार्थों की खातिर हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। उधर इस सम्पूर्ण स्थिति को लेकर अमेरिका भी बुरी तरह बेनकाब हुआ है।
इसे बेहद ही शर्मनाक कहा जाना चाहिए कि जो अमेरिका खुद को दुनिया से आतंकवाद मिटाने का चौधरी समझता है उसी ने
फरवरी, 2020 में दोहा में व्यक्तिगत स्वार्थ
की खातिर आतंकी तालिबान से बातचीत शुरू की और दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ जहां अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को हटाने की प्रतिबद्धता जताई और तालिबान अमेरिकी सैनिकों पर हमले बंद करने को तैयार हुआ आज उसी समझौते का खामियाजा अफगानिस्तान भुगत रहा है वहां तालेबानी राज कायम हो चुका है और अमेरिका सहित दुनिया के तमाम शक्तिशाली मुल्क चुपचाप आतंकी तमाशा देख रहे हैं।



