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पश्चिम UP प्रचार खत्म होने में कुछ घण्टे ही शेष,कांग्रेसियों को सिंधिया की तलाश

मेरठ । मेरठ पश्चिम का केंद्र है और पश्चिम की सियासत यहीं से आगे बढ़ती है। इसको देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 10 दिन पहले ही यहां डेरा जमाया और पश्चिम के संगठन को रात दो बजे तक मथते रहे। इसके उलट अगर कांग्रेस की बात करें तो यहां पार्टी ने कोई क्षेत्रीय कार्यालय तक नहीं खोला, जबकि पिछले चुनाव में मधुसूदन मिस्त्री काफी पहले से ही कांग्रेसियों के पेच कसने में जुट गए थे। कार्यालय भी खुला था।

इस बार प्रभारी का नाम बड़ा था। मध्य प्रदेश की जीत का सेहरा सिंधिया के सिर पर भी सजा लेकिन, सिंधिया अब तक पश्चिम की पिच पर उतरे ही नहीं। अब बताया जा रहा है कि रविवार की शाम तक वह मेरठ आएंगे। यानी चुनाव प्रचार खत्म होने से 50-60 घंटे पहले। अब इतने समय में क्या संगठन सधेगा और क्या वोटर… यह कांग्रेस जाने या कांग्रेस के वोटर। राजनीतिक जानकारों का यह भी आकलन है कि कांग्रेस इस इलाके में अपनी जमीनी हकीकत को जानते हुए उन सीटों पर गठबंधन के लिए ज्यादा परेशानी खड़ा करना नहीं चाहती ताकि भाजपा को उसका परोक्ष लाभ न मिल सके।

पश्चिम में अगर कांग्रेस के बड़े नेताओं की हलचल की बात करें तो पुलवामा अटैक के बाद शामली के शहीदों के घर राहुल और प्रियंका की चकाचौंध के बीच दुबके हुए ज्योतिरादित्य नजर आए थे। दूसरी बार जब चंद्रशेखर मेरठ के अस्पताल में भर्ती थे तो फिर प्रियंका के साथ सिंधिया भी चमके थे लेकिन, वहां भी भूमिका लगभग सहायक की ही थी।

अगर स्टार प्रचारकों की ही बात करें तो विधानसभा चुनावों में गुर्जर वोटों को साधने के लिए सचिन पायलट, पंजाबी वोटरों के लिए राजबब्बर तो मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए गुलाम नबी आजाद जैसे नेता मैदान में उतरे थे लेकिन, इस बार इनमें से कोई नहीं दिख रहा है। ऐसे में पार्टी के कार्यकर्ताओं में खलबली तो है लेकिन, हाईकमान कल्चर में वे सार्वजनिक तौर पर कुछ कह नहीं पा रहे हैं। वहीं, इसके ठीक उलट भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री की दो और मुख्यमंत्री की लगभग हर लोकसभा क्षेत्र को कवर करते हुए रैली हो चुकी है।

प्रचार में पिछड़ने की वजह पूछे जाने पर कांग्रेस प्रचार समिति के मेरठ मंडल प्रमुख अवनीश काजला ने बताया कि शेड्यूल न बन पाने की वजह से देर हुई है। वैसे सात अप्रैल को ज्योतिरादित्य सिंधिया का रोड शो और सभा होगी। आठ को बिजनौर और सहारनपुर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के साथ सिंधिया भी रहेंगे। शुक्रवार को प्रियंका गाजियाबाद में और सचिन शामली में हैं।

अपने दम पर मैदान में हैं प्रत्याशी

पश्चिम में कांग्रेस के चुनावी समर की गंभीरता इसी बात से दिखती है कि प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का दंभ भरने वाली पार्टी ने रालोद नेताओं अजित-जयंत के सामने मुजफ्फरनगर और बागपत में उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया। गाजियाबाद में पिछली बार राजबब्बर को लड़ाने वाली कांग्रेस ने इस बार कोई बड़ा चेहरा नहीं दिया। मेरठ में कांग्रेस उम्मीदवार हरेंद्र अग्रवाल पर बाहरी होने का मुद्दा हावी है। इसके साथ स्थानीय इकाई से तालमेल न बैठ पाना भी बड़ी चुनौती बन रहा है। सहारनपुर में इमरान मसूद अपने ही दम पर पूरी ताकत के साथ मैदान में राघव लखनपाल को ललकार रहे हैं तो बहनजी का साथ छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बिजनौर से चुनाव लड़वाकर वहां का चुनाव रोचक जरूर बना दिया है। पलायन से पूरे देश में चर्चा में आए कैराना से हरेंद्र मलिक भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाते दिख रहे हैं।

दे. जा साभार

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